श्रावण-भादौ मास में बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ने वाली रिकॉर्ड भीड़ को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने उज्जैन रेलवे स्टेशन पर अभूतपूर्व व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। पहली बार स्टेशन पर वन-वे ट्रैफिक सिस्टम लागू किया जाएगा, ताकि लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारु और सुरक्षित बनाया जा सके। 30 जुलाई से 7 सितंबर तक प्रतिदिन करीब 95 हजार से अधिक यात्रियों के उज्जैन पहुंचने का अनुमान है। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने सुरक्षा, निगरानी और यात्री सुविधाओं का व्यापक खाका तैयार किया है।
पहली बार स्टेशन पर लागू होगी वन-वे व्यवस्था
भीड़ नियंत्रण के लिए रेलवे प्रशासन ने स्टेशन परिसर में एक नई ट्रैफिक व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित योजना के अनुसार श्रद्धालुओं को प्लेटफॉर्म नंबर-1 से प्रवेश दिया जाएगा, जबकि निकासी प्लेटफॉर्म नंबर-8 से होगी। इससे यात्रियों की आवाजाही एक दिशा में रहेगी और प्लेटफॉर्म पर भीड़ का दबाव कम होगा।
इसके अलावा माल गोदाम की ओर से होने वाली एंट्री को पूरी तरह बंद रखा जाएगा, ताकि अनियंत्रित भीड़ स्टेशन परिसर में प्रवेश न कर सके। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह व्यवस्था यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ स्टेशन पर ट्रैफिक प्रबंधन को भी बेहतर बनाएगी।
ड्रोन कैमरों से होगी निगरानी, सुरक्षा बल रहेंगे तैनात
इस बार रेलवे केवल पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहेगा। पूरे स्टेशन परिसर और आसपास के क्षेत्रों की ड्रोन कैमरों से लाइव निगरानी की जाएगी। ड्रोन के जरिए भीड़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव हो सके।
इसके साथ ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के अतिरिक्त जवान तैनात किए जाएंगे। संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी और यात्रियों को सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग सुरक्षा टीमों की तैनाती की जाएगी।
1200 यात्रियों के लिए बनेगा विशाल होल्डिंग एरिया, अतिरिक्त ट्रेनें भी तैयार
श्रद्धालुओं को स्टेशन के बाहर अनावश्यक भीड़ से बचाने के लिए लगभग 1200 यात्रियों की क्षमता वाला वाटरप्रूफ होल्डिंग एरिया तैयार किया जा रहा है। यहां यात्रियों को बारिश और धूप दोनों से सुरक्षा मिलेगी तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें चरणबद्ध तरीके से स्टेशन के भीतर भेजा जाएगा।
आरपीएफ थाना प्रभारी नरेंद्र यादव के अनुसार, इन व्यवस्थाओं का प्रस्ताव रेल मंडल को भेज दिया गया है। इसके साथ ही भोपाल रूट पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए छह अतिरिक्त ट्रेनें चलाने की तैयारी भी की जा रही है, ताकि यात्रियों को यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
सिंहस्थ 2028 की तैयारी का बनेगा ट्रायल मॉडल
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि सावन-भादौ में लागू की जा रही यह विशेष व्यवस्था केवल वर्तमान भीड़ प्रबंधन तक सीमित नहीं है। इसे आगामी सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रायल के रूप में देखा जा रहा है।
आरपीएफ और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्म और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। उद्देश्य यह है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिले। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजनों के दौरान भी इसी व्यवस्था को और व्यापक स्तर पर लागू किया जा सकता है।
महाकाल की नगरी उज्जैन में हर वर्ष सावन-भादौ के दौरान आस्था का विशाल सैलाब उमड़ता है। इस बार रेलवे की नई रणनीति न केवल भीड़ प्रबंधन को नई दिशा देगी, बल्कि देश के बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए आधुनिक और तकनीक आधारित प्रबंधन का एक नया मॉडल भी प्रस्तुत कर सकती है।