जल संरक्षण बना जन-आंदोलन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जल ही जीवन का आधार है और इसके संरक्षण व संवर्धन का कार्य अब केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। मध्यप्रदेश में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के माध्यम से पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का ऐतिहासिक कार्य किया जा रहा है, जिससे राज्य जल संरक्षण के क्षेत्र में देश में अग्रणी बन गया है।
जल संरक्षण बना जन-आंदोलन
2 लाख से अधिक संरचनाएं पूर्ण
10,644 करोड़ से हो रहा विकास
ग्रामीण क्षेत्रों में जल क्रांति
अमृत सरोवर और रिचार्ज कार्य तेज
देश के लिए मॉडल बनेगा मध्यप्रदेश
2 लाख से अधिक संरचनाएं पूर्ण
राज्य में अभियान के तहत अब तक 2 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। कुल लक्ष्य 3,67,777 कार्यों का रखा गया था, जिनमें से बड़ी संख्या में परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि शेष कार्य तेज गति से प्रगति पर हैं। यह उपलब्धि जल प्रबंधन के क्षेत्र में प्रदेश की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
10,644 करोड़ से हो रहा विकास
इस विशाल अभियान के लिए राज्य सरकार द्वारा ₹10,644.02 करोड़ की स्वीकृत राशि दी गई है, जिसमें से अब तक लगभग 59.5 प्रतिशत राशि का उपयोग किया जा चुका है। इससे स्पष्ट है कि जल संरक्षण के कार्यों को न केवल योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है, बल्कि वित्तीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग भी किया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जल क्रांति
ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में जल आत्मनिर्भरता के लिए बड़े पैमाने पर कार्य किए गए हैं। 57,794 खेत तालाब और 91,838 कुआं पुनर्भरण संरचनाएं तैयार की गई हैं। इसके साथ ही 29,906 जल संरक्षण संरचनाएं और 126 अमृत सरोवरों का निर्माण पूरा हो चुका है। इन प्रयासों से भू-जल स्तर में सुधार और कृषि उत्पादन में स्थिरता आने की उम्मीद है।
अमृत सरोवर और रिचार्ज कार्य तेज
अभियान के तहत 1,152 सिंचाई परियोजनाएं और 2,721 मरम्मत कार्य पूरे किए गए हैं। वाटरशेड प्रबंधन के 4,822 कार्यों से जल संचयन क्षमता में वृद्धि हुई है।
देश के लिए मॉडल बनेगा मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश का जल प्रबंधन मॉडल पूरे देश के लिए एक उदाहरण बनेगा। इस अभियान में जनता, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की संयुक्त भागीदारी से प्रदेश ने एक नई दिशा प्राप्त की है। सरकार का लक्ष्य आने वाली पीढ़ियों को जल संकट से बचाना और सतत विकास की ओर बढ़ना है। कुल मिलाकर, जल गंगा संवर्धन अभियान ने मध्यप्रदेश को जल संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय नेतृत्व की स्थिति में पहुंचा दिया है, जो भविष्य में अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बनेगा।





