पीएचई मंत्री पर 1000 करोड़ रुपए कमीशन का आरोप…जानें क्या है आखिर पूरे मामले की सच्चाई…?..क्या है कमीशन का काला सच?

पीएचई मंत्री पर 1000 करोड़ रुपए कमीशन का आरोप…जानें क्या है आखिर पूरे मामले की सच्चाई…!

मध्य प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पीएचई की मंत्री संपतिया उईके इस दिनों खासी चर्चा में हैं। दरअसल उन पर 1000 करोड़ रुपए कमीशन लेने का आरोप एक पूर्व विधायक ने लगाया है। यह आरोप संयुक्त क्रांति पार्टी अध्यक्ष और बालाघाट जिले की लांजी सीट से सपा के पूर्व विधायक किशोर समरीते ने लगाए हैं। समरिते ने इस मामले की पीएमओ में शिकायत की थी। जिसके बाद मामला सुर्खियों में आ गया।

मंत्री संपतिया उईके की प्रतिक्रिया

मंत्री ने कहा है कि वे भोपाल से बाहर हैं। लेकिन अधिकारियों से पूछ रहीं हैं कि किस आधार पर जांच करवाई जा रही है। वे जब भोपाल आएंगी, तो बात करूंगी।

पीएमओ से जांच के आदेश जारी किये गये थे। इसके बाद एमपी के पीएचई विभाग ने अपने ही विभाग की मंत्री संपतिया उईके के खिलाफ जांच बैठाई। हालांकि जांच के आदेश के बाद पीएचई के प्रमुख अभियंता की ओर से इस मामले को निराधार भी बता दिया गया। इधर इस मामले को लेकर मंत्री संपतिया उइके की भी प्रतिक्रिया सामने आ गई है।

मंत्री के खिलाफ विभाग के ही प्रमुख अभियंता ने दिए थे जांच के आदेश

विभाग के प्रमुख अभियंता ईएनसी संजय अंधवान ने इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री से की गई शिकायत और केंद्र की ओर से रिपोर्ट तलब किये के बाद जांच के आदेश दिए थे। प्रमुख अभियंता कार्यालय की ओर से मध्य प्रदेश के सभी मुख्य अभियंता पीएचई और परियोजना निदेशक मप्र जल निगम को भी इस मामले को लेकर पत्र लिखकर 7 दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया।

विभाग की ओर से जारी किये गये दिशा निर्देश में कहा गया है कि मध्यप्रदेश के जल जीवन मिशन को केन्द्र सरकार की ओर से मिले करीब 30 हजार करोड़ के खर्च की विस्तार से जांच की जाए। इसके अतिरिक्त मंडला जिले के कार्यपालन यंत्री की संपत्तियों की भी जांच के निर्देश दिए गए।

जांच में शिकायतकर्ता के आरोप निराधार!

जांच के आदेश के बाद बालाघाट जिले के कार्यपालन यंत्री की ओर से जो रिपोर्ट भोपाल भेजी गई उसका हवाला देते हुए विभाग के प्रमुख अभियंता ईएनसी संजय अंधवान ने कहा है कि शिकायतकर्ता पूर्व विधायक किशोर समरीते की ओर से कोई भी प्रमाण नहीं दिये गये। मात्र आरटीआई सूचना के अधिकार के तहत ही विभागीय अधिकारी की ओर से भेजे गए पत्र को ही आधार बनाया गया था। ईएनसी ने यह भी कहा है कि बालाघाट संभाग के कार्यपालन यंत्री ने पूर्व विधायक और शिकायतकर्ता किशोर समरीते को यह जानकारी दी थी कि किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है।

विभाग की ओर से प्रेस नोट जारी कर दी ये सफाई

इस पूरे मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने आननफाानन में प्रेस रिलीज भी जारी की और कहा कि शिकायतकर्ता संयुक्त क्रांति पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व विधायक किशोर समरीते ने प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रेषित किए गए लेटर में जो भी आरोप लगाए गये हैं उन आरोप में कोई भी प्रमाण अपनी शिकायत के साथ संलग्न नहीं किए गये हैं। यह शिकायत केवल काल्पनिक मनगढंत आधारहीन है। साथ ही यह भी कहा गया कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की मंत्री पर जो आरोप भी लगाए गए हैं वे सभी तथ्यहीन और निराधार हैं।

मध्य प्रदेश PHE मंत्री संपतिया उईके पर भ्रष्टाचार के आरोप

संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व विधायक किशोर समरीते ने मंत्री संपतिया उईके पर ₹1000 करोड़ कमीशन लेने का आरोप लगाया है। यह आरोप प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में दर्ज शिकायत के ज़रिए सामने आया।

शिकायत और जांच की प्रक्रिया

पीएमओ ने इस शिकायत पर संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए। इसके बाद PHE विभाग (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग) ने स्वयं अपने ही मंत्री के खिलाफ जांच शुरू कर दी।

प्रमुख अभियंता (ईएनसी) संजय अंधवान ने सभी मुख्य अभियंताओं और जल निगम के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को पत्र लिखकर 7 दिन में रिपोर्ट मांगी। जल जीवन मिशन के तहत राज्य को मिले ₹30,000 करोड़ की फंडिंग के उपयोग की भी जांच के निर्देश दिए।

जांच के कुछ ही समय बाद PHE विभाग ने एक प्रेस रिलीज जारी की गई। शिकायत को “मनगढंत, आधारहीन और काल्पनिक” बताया गया। कहा गया कि शिकायतकर्ता ने कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। विभाग का कहना है कि आरोप सिर्फ RTI के ज़रिए मिली विभागीय चिट्ठियों पर आधारित हैं, जिनमें किसी अनियमितता का ज़िक्र नहीं है।

अब सवाल यह है कि ….

क्या किसी मंत्री के खिलाफ उसी विभाग द्वारा जांच शुरू करना निष्पक्ष माना जा सकता है? क्या विभाग द्वारा ही आरोपों को खारिज करना संस्थागत पारदर्शिता पर सवाल नहीं उठाता?…(प्रकाश कुमार पांडेय)

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