कृषक कल्याण वर्ष 2026: आधुनिक तकनीक से कृषि प्रबंधन हुआ अधिक सटीक और पारदर्शी…जानें क्या है मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का संकल्प

Kisan Kalyan Varsh 2026

कृषक कल्याण वर्ष 2026: आधुनिक तकनीक से कृषि प्रबंधन हुआ अधिक सटीक और पारदर्शी

मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उसे अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य सरकार ने फसल प्रबंधन और उत्पादन आंकलन की पारंपरिक प्रक्रिया को बदलते हुए नई तकनीकों को अपनाया है, जिससे किसानों को योजनाओं का लाभ अधिक सटीक और समयबद्ध तरीके से मिल सके।

मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में कृषि व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए तकनीक आधारित प्रणालियों का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। राज्य सरकार की ‘सारा’ और ‘उन्नति’ एग्री-जीआईएस प्रणाली के माध्यम से अब उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और खेतों की वास्तविक तस्वीरों का विश्लेषण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से किया जा रहा है। इससे फसल निगरानी, उत्पादन आंकलन और कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन को वैज्ञानिक आधार मिला है।

‘सारा’ और ‘उन्नति’ से वैज्ञानिक हुआ फसल आंकलन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि ‘उन्नति’ प्लेटफॉर्म और ‘सारा’ एप्लिकेशन के माध्यम से क्रॉप मैपिंग और फसल गिरदावरी की प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। पहले फसल का आकलन मुख्यतः पारंपरिक सर्वेक्षण और अनुमान के आधार पर किया जाता था, लेकिन अब डिजिटल और वैज्ञानिक तरीकों से खेत स्तर पर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा रहा है।

‘सारा’ ऐप के माध्यम से खेतों की लाखों तस्वीरें प्राप्त की जाती हैं, जिनका डीप लर्निंग तकनीक की सहायता से विश्लेषण किया जाता है। इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी खेत में वास्तव में कौन-सी फसल बोई गई है। इससे फसल की पहचान और उसके उत्पादन का आकलन अधिक सटीक तरीके से किया जा रहा है।

सैटेलाइट और ड्रोन से हो रही फसलों की निगरानी

प्रदेश में फसलों की पहचान और निगरानी के लिए उपग्रह चित्रों और ड्रोन सर्वेक्षण का भी उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही रैंडम फॉरेस्ट मॉडल जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से भूमि खंड यानी खसरा स्तर पर फसलों की पहचान की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव इस प्रणाली के माध्यम से अधिसूचित फसलों के लिए ‘पटवारी हल्का’ स्तर पर उत्पादन का पूर्वानुमान भी लगाया जा रहा है। इससे कृषि योजनाओं की बेहतर योजना बनाना, खाद्यान्न खरीद व्यवस्था को मजबूत करना और फसल बीमा प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना संभव हो रहा है।

सटीकता में आया बड़ा सुधार

नई तकनीक के उपयोग से फसल पहचान और आंकलन की सटीकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2022 में जहां फसल पहचान की सटीकता लगभग 66 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष 2025 तक यह बढ़कर करीब 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हाल के रबी और खरीफ मौसम में इस प्रणाली के माध्यम से 5 करोड़ 37 लाख से अधिक खेतों की तस्वीरों का विश्लेषण किया गया है। इससे वास्तविक समय में फसलों की पहचान संभव हो सकी है। साथ ही प्रदेश में 3 करोड़ से अधिक भूमि खंडों में बोई गई फसलों का डिजिटल मैपिंग भी किया गया है।

डिजिटल फसल गिरदावरी को मिला आधार

राज्य सरकार की इस पहल से डिजिटल फसल गिरदावरी की प्रक्रिया को भी मजबूती मिली है। प्रमुख फसलों की पहचान और उनके आंकड़ों का सत्यापन डिजिटल प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। वर्ष 2023 से प्रदेश में लगभग 22 हजार ‘पटवारी हल्का’ क्षेत्रों में फसल उत्पादन का आंकलन किया जा रहा है। इससे कृषि से जुड़े आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ी है और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आई है।

किसानों और बीमा कंपनियों के लिए उपयोगी

भू-स्थानिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित यह प्रणाली किसानों, सर्वेक्षकों और फसल बीमा कंपनियों के लिए भी काफी उपयोगी साबित हो रही है। इस तकनीक के माध्यम से जलवायु परिवर्तन या प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले फसल नुकसान का समय पर आकलन किया जा सकेगा। इससे किसानों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और तेज हो सकेगी।

तकनीक आधारित कृषि की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव  ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राजस्व विभाग और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से यह तकनीकी पहल विकसित की गई है। इसका उद्देश्य प्रदेश की कृषि व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और भविष्य उन्मुख बनाना है। राज्य सरकार का मानना है कि तकनीक के उपयोग से कृषि प्रबंधन में सुधार होगा और किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिलेगा। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह पहल आय सुरक्षा और बेहतर कृषि प्रबंधन सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध हो सकती है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत शुरू की गई यह पहल मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जो भविष्य में खेती को अधिक वैज्ञानिक और टिकाऊ बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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