मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव: क्या चुनावी समर में भाजपा की नैया पार लगायेंगे ये कर्णधार ?

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब प्रचार छोटी छोटी गली और नुक्कड़ तक पहुंच गया है। ये चुनाव बीजेपी के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछली बार 2018 में 15 साल सत्ता में रही बीजेपी को कांग्रेस से हार का सामना करना पड़ा था। तब कमलनाथ की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार बनी, लेकिन वह भी 15 महीने में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बागी होने से गिर गई। पिछले चुनाव में सफल रहने वाली कांग्रेस को इस बार भी उम्मीद है कि वह बीजेपी को कड़ी टक्कर देगी।

बीजेपी भी यह जानती और मानती है कि मुकाबला इस बार भी टक्कर का होने वाला है और कांग्रेस इस बार भी उसके लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। लिहाजा बीजेपी ने नरेन्द्र सिंह तोमर जैसे अपने वरिष्ठ नेताओं तक को विधायक के चुनाव में टिकट देकर मैदान में उतार दिया है। इस सबके बीच बीजेपी के पांच बड़े नेता हैं जो प्रदेश में सियासत की धुरी का काम करते हैं। यह है सीएम शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रहलाद पटेल और पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय नेता बीजेपी के लिए चुनावी समर में पांडवों से कम नहीं हैं। यही वजह है कि बीजेपी ने इस बार इनमें से सिंधिया को छोड़कर चार को चुनाव मैदान में प्रत्याशी बनाकर उतार दिया है।

सीएम रहे शिवराज ने मजबूत की जमीन

सीएम रहते शिवराज सिंह चौहान ने एमपी में बीजेपी की जमीन मजबूत करने का काम किया है। बता दें पहली बार 1991 में शिवराज विदिशा संसदीय क्षेत्र से चुने गए थे। इस सीट से उन्होंने 3 बार जीत हासिल की थी। इस बीच 2005 में बाबू लाल गौर के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया था। उमा भारती के बाद मुख्यमंत्री के तौर पर शिवराज के कार्यकाल से उल्लेखनीय बदलाव आया। जिसमें सीएम शिवराज ने जमीनी स्तर की शासन की नीतियों को पहुंचाने और जनता से जुड़ने पर जोर दिया। हालांकि साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली पराजय ने शिवराज के कद और छवि को नुकसान पहुंचाया। लेकिन उनकी किस्मत बुलंदी पर थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बागी तेवर दिखाए तो कमलनाथ की सरकार धराशाई हो गई और भाजपा को फिर सरकार बनाने का मौका मिल गया। हालांकि सियासी जानकार बताते हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के आने से सीएम शिवराज सिंह चौहान का पक्ष पहले की तरह मजबूत नहीं रहा। ऐसे में बुधनी सीट पर भी सभी कर नजर होगी, जहां से शिवराज सिंह चौहान चुनाव लड़ रहे हैं।

ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया के सहारे बीजेपी को मिलेगा चंबल का ‘बल’

केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साल 2002 में राजनीति में कदम रखा था। इसके बाद पिता और वरिष्ठ कांग्रेस नेता माधवराव सिंधिया के निधन के बाद गुना लोकसभा उपचुनाव जीता था। उन्होंने साल 2002 से 2019 लोकसभा में तक गुना का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि साल 2019 लोकसभा चुनाव में उन्हें बीजेपी प्रत्याशी केपी यादव से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद साल 2020 में भाजपा में शामिल हुए तो परिस्थितियां बदली। हालांकि सिंधिया भले ही बीजेपी में आ गए हों लेकिन केंद्र में उनका कद भी अच्छा खासा हो लेकिन राज्य स्तर की बात करें तो बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता दीवार बनकर उनके सामने खड़े हैं। इतना ही नहीं उनके साथ कांग्रेस से बीजेपी में आने वाले कई नेता वापस कांग्रेस में जा चुके हैं। यही वजह है कि यह विधानसभा चुनाव भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के भविष्य का फैसला करेगा।

केन्द्र से प्रदेश की सियासत में लौटे विजयवर्गीय

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का चुनाव मैदान में उतरना बता रहा है कि सरकार बनाने के लिए पार्टी हर स्तर पर प्रयास करती नजर आ रही है। मध्य प्रदेश के अनुभवी नेताओं में शामिल कैलाश विजयवर्गीय को इंदौर 1 नंबर सीट से मैदान में उतारा है। एक बार तो प्रत्याशियों की सूची में अपना नाम देख वे स्वयं भी हैरान थे। लेकिन बीजेपी आलाकमान उन्हें इस चुनाव में खास मकसद से केंद्र की राजनीति से प्रदेश स्तर पर लेकर आया है। ऐसे में इंदौर 1 नंबर के चुनाव पर भी सबकी नजर लगी हुई है।

प्रबंधन में माहिर हैं नरेंद्र सिंह तोमर

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पहले बीजेपी ने मध्य प्रदेश में चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक बनाया था। इसके बाद जब प्रत्याशियों की सूची जारी होने का सिलसिला शुरु हुआ तो एक सूची में उनका नाम भी शामिल किया गया। वे प्रमुख उम्मीदवारों में से एक माने जाते हैं। चुनाव के लिए पार्टी ने उन्हें भी मैदान में उतारकर खास संदेश देने की कोशिश की है। बता दें 1998 में नरेन्द्र सिंह तोमर पहली बार विधायक चुने गए ​थे। इसके साथ ही साल 2006 और 2012 में दो कार्यकालों के लिए पार्टी प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। वे तीन बार मुरैना से सांसद चुने गए हैं।

लोधी वोट को मजबूत करने मैदान में प्रह्लाद पटेल

उमा भारती इस चुनाव के परिदृश्य से लगभग गायब सी हो गईं हैं। ऐसे में लोधी वोटर्स को साधने के लिए बीजेपी ने पांच बार सांसद रहे प्रह्लाद सिंह पटेल चुनाव मैदान में उतार दिया। वर्तमान में केन्द्र सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और जल शक्ति राज्य मंत्री प्रहलाद पटेल का लोधी समुदाय पर खासा प्रभाव माना जाता है। लोधी वोटों को अपने पाले में करने की कोशिश में पार्टी ने उन्हें जालम सिंह पटेल की नरसिंहपुर सीट से उम्मीदवार बना कर मैदान में उतार दिया है।

Exit mobile version