मध्यप्रदेश में चुनाव मतगणना का काउंट डाउन शुरू हो गया है। रविवार 3 दिसंबर को प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा। मध्य प्रदेश की बात करें तो ईवीएम की गणना के लिए 4369 टेबल, पोस्टल बैलेट की गणना के लिए 692 टेबल लगेंगी। वहीं मतों की गिनती के लिए सबसे अधिक 26 राउंड झाबुआ में और सबसे कम 12 राउंड सेवड़ा में होंगे।
- 230 सीटों पर होगी काउंटिंग
- मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को हुई थी 77.15% वोटिंग
- 230 सीटों पर मैदान में थे 2533 प्रत्याशी
- अब खुलेगा प्रत्याशियों की किस्मत का पिटारा
- पहले होगी डाकमत पत्रों की गणना
17 नवंबर को हुए मतदान के बाद वह घड़ी आ गई है,जब मतगणना की जा रही है। जिसका न केवल बीजेपी और कांग्रेस बल्कि समेत राजनीतिक दल ही नहीं मध्य प्रदेश की नौ करोड़ जनता को भी था। दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने दमदार तरीके से प्रचार किया और चुनाव लड़ा था। बीजेपी की बात करें तो जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान फ्रंटरनर बने हुए थे तो वहीं कांग्रेस की ओर से पूर्व सीएम और मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने अपने हाथ में बागड़ोर संभाल रखी थी। अब सत्ता का ऊंट किस आखिर करवट बैठेगा। यह रविवार 3 दिसंबर 2023 को स्पष्ट हो जायेगा। इससे पहले दोनों ही दलों की ओर से अपनी-अपनी जीत के दावे किए जा रहे हैं। कुछ एग्जिट पोल में बीजेपी एमपी में बहुमत और दो एग्जिट पोल में कांग्रेस को बहुमत मिलने का दावा किया गया था। कुछ ने कांटे के मुकाबले की बात कही थी।
बता दें विधानसभा की 230 सीटों के लिए पिछले माह 17 नवंबर को एक ही चरण में मतदान किया गया था। इस बार चुनाव में 2533 प्रत्याशी मैदान में हैं। अब तक हुए विधानसभा चुनावों के रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए मध्य प्रदेश के मतदाताओं ने 77.15% वोटिंग की। इसमें भी 78.21 प्रतिशत पुरुष और 76.03 प्रतिशत महिलाओं ने मतदान में हिस्सा लिया था। जबकि 2018 के चुनावों में 75.2 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। जो इससे पहले तक का एक रिकॉर्ड थी। अब रविवार को जिला मुख्यालयों के स्ट्रांग रूम से ईवीएम बाहर निकलेंगे साथ ही निकलेगी प्रत्याशियों की किस्मत। मतों की गिनती का काम सुबह 8 बजे शुरू हो जायेगा। एक घंटे बाद रुझान आना शुरु हो जाएंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि रविवार 3 दिसंबर को सुबह 10 बजे तक सभी सीटों के रुझान मिल जाएंगे। वहीं 2018 के आंकड़ों की बात करें तो बीजेपी 109 और कांग्रेस को 114 सीटें मिली थी। दोनों के बीच पांच सीटों का अंतर था। जबकि बसपा को दो और सपा को एक सीट और निर्दलियों के खाते में चार सीटें गईं थी।
2018 में खत्म हुआ था 15 साल का वनवास
कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस ने 15 साल बाद मध्य प्रदेश में अपनी सरकार बनाई थी। हालांकि 2020 में कांग्रेस से ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में विधायकों के पार्टी छोड़ने और भाजपा में शामिल होने पर शिवराज सिंह चौहान फिर सीएम बने थे। अब करीब साढ़े तीन साल में भाजपा ने 2018 में कई गई उन गलतियों को दूर करने की भरसक कोशिश की। जिनकी वजह से उसे सत्ता से दूर रहन पड़ा था। सीएम शिवराज ने मास्टर स्ट्रोक खलते हुए लाड़ली बहना जैसी योजनाएं भी लागू कीं। जिसमें 1.31 करोड़ महिलाओं के खाते में हर महीने 1,250 रुपये डाले गए। जिसके बाद से महिलाओं का वोट प्रतिशत बढ़ा।
भोपाल में जेल से निकलेंगे प्रत्याशी विधायक बनकर
भोपाल में सुबह 5 बजे से सुरक्षाकर्मी और मतगणना कर्मी भोपाल की पुरानी जेल मतगणना केंद्र में पहुंचना शुरू हो जायेंगे। भोपाल की सातों विधानसभा के रिजल्ट शाम तक घोषित होने की उम्मीद है। प्रति विधानसभा एवरेज टेबल 15 मानी जा रही है। बता दें सबसे ज्यादा मतदान केन्द्र भोपाल की गोविंदापुरा सीट पर 369 हैं। जबकि बैरसिया — 270, भोपाल उत्तर — 246, नरेला — 330, भोपाल दक्षिण पश्चिम — 233, भोपाल मध्य — 243 और हुजूर — 343 मतदान केन्द्र बनाए गए थे। ऐसे में हुजूर और गोविंदपुरा सीट पर 20-20 टेबल लगेंगी। जबकि उत्तर और बैरसिया सीट के लिए 16-16 टेबल पर मतगणना होगी। मध्य विधानसभा सीट के लिए 14 टेबल पर काउंटिंग की जाएगी। इसके अनुसार गोविंदपुरा में करीब 19 राउंड की गिनती होगी। हुजूर 18 राउंड, बैरसिया 17 राउंड, भोपाल उत्तर 16 राउंड,नरेला 16 राउंड, मध्य भोपाल 18 राउंड और दक्षिण पश्चिम 17 राउंड की गिनती होगी। सबसे ज्यादा 23 प्रत्याशी नरेला विधानसभा से मैदान में हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा टाइम नरेला विधानसभा में लगेगा। मतगणना की सुरक्षा को लेकर भोपाल कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने कहा कि तीन स्तर की सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई है। 900 से ज्यादा फोर्स यहां मौजूद रहेगी। इसके साथ ही मतगणना रिजल्ट को देखते हुए भी फोर्स शहर में लगाई गई है।
वहीं मतगणना की बात करें तो सुबह 8 बजे से डाक मत पत्र की गिनती शुरू होगी। साढ़े आठ बजे से ईवीएम मशीनों के मतों की गिनती होगी। मतगणना के हर राउंड के बाद प्रत्याशियों के मतों को बताया जाएगा। ईवीएम की मतगणना टेबल पर एक काउंटिंग सुपरवाइजर एक काउंटिंग असिस्टेंट और अकाउंटिंग स्टाफ साथी एक माइक्रो आब्जर्वर रहेगा। इसी प्रकार पोस्टल बैलेट की गणना टेबल पर एक सहायक रिटर्निग ऑफिसर एक काउंटिंग सुपरवाइजर दो काउंटिंग असिस्टेंट और एक माइक्रो आब्जर्वर रहेगा। इनके साथ ही अभ्यर्थी के काउंटिंग एजेंट भी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि दक्षिण पश्चिम के पोस्टल बैलेट की गिनती में सबसे ज्यादा टाइम लग सकता है। करीब 11 हजार कर्मचारियों की मतों की गिनती होगी और दक्षिण पश्चिम विधानसभा में सबसे ज्यादा सरकारी कर्मचारी माने जा रहे हैं।





