सबसे अधिक राजस्व निस्तारण में लखनऊ अव्वल, CM योगी की मॉनीटरिंग से आया सुधार
योगी सरकार की पहल से तेज़ हुआ राजस्व विवादों का निपटारा, जौनपुर जिला न्यायालयों ने भी रचा रिकॉर्ड
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राजस्व विवादों के निस्तारण की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त मॉनीटरिंग का असर अब स्पष्ट दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री योगी ने प्रशासनिक तंत्र को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राजस्व से जुड़े विवादों और वादों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए, ताकि जनता को त्वरित न्याय मिल सके और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित हो। सरकार के इसी फोकस और लगातार की गई समीक्षा बैठकों का परिणाम है कि अक्टूबर माह में प्रदेश भर में 3 लाख 24 हजार 897 राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया। इनमें लखनऊ जिला पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा, जबकि जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर ने बाजी मारी।
- लखनऊ बना राजस्व निस्तारण में अव्वल
- सीएम योगी की मॉनीटरिंग का असर
- राजधानी में 15,260 मामले निपटे
- प्रयागराज-दूसरे, गोरखपुर तीसरे स्थान
- जौनपुर फिर जनपद स्तर पर नंबर वन
- जिलावार समीक्षा से बढ़ी कार्यक्षमता
- भू-राजस्व मामलों में भी सुधार
- प्रशासनिक पारदर्शिता का बढ़ा दायरा
- डीएम विशाख अय्यर ने साझा की रिपोर्ट
- योगी सरकार की नीति दे रही परिणाम
लखनऊ बना प्रदेश का नंबर-1 जिला
राजस्व परिषद की आरसीसीएमएस (Revenue Court Computerized Management System) की अक्टूबर रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ में 15,260 राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया, जो पूरे प्रदेश में सर्वाधिक है। लखनऊ की इस उपलब्धि का श्रेय वहां की प्रशासनिक तत्परता और सीएम योगी की लगातार मॉनीटरिंग को दिया जा रहा है। लखनऊ की जिलाधिकारी विशाख जी. अय्यर ने बताया “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिले में राजस्व विवादों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। सभी उपजिलाधिकारी और तहसीलदार स्तर पर मामलों की सुनवाई और निस्तारण की समयबद्ध व्यवस्था बनाई गई है।” लखनऊ के बाद प्रयागराज (10,501 मामले), गोरखपुर (8,165 मामले), कानपुर नगर (7,866 मामले) और शाहजहांपुर (7,707 मामले) शीर्ष पांच जिलों में शामिल हैं।
सीएम योगी की सख्त मॉनीटरिंग से आया सुधार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर महीने सभी जिलों की समीक्षा बैठक में राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की स्थिति पर बारीकी से नजर रखते हैं। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया है कि जनता के भूमि और राजस्व विवादों को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। योगी सरकार ने ‘न्याय आपके द्वार’ अभियान के तहत राजस्व विवादों को डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा है। इससे प्रत्येक केस की स्थिति की मॉनीटरिंग अब रीयल टाइम में की जा सकती है। अधिकारी अपने-अपने स्तर पर यह देख सकते हैं कि कौन सा मामला कितने समय से लंबित है और कहां विलंब हो रहा है।
जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर अव्वल
वहीं, जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर ने लगातार तेरहवें महीने भी प्रथम स्थान हासिल किया है। जौनपुर डीएम डॉ. दिनेश चंद्र सिंह के मुताबिक, मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप जिले में राजस्व न्यायालयों में कार्यकुशलता और पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है। आरसीसीएमएस रिपोर्ट के अनुसार, जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड द्वारा निर्धारित 250 मामलों के मासिक मानक के मुकाबले 480 मामलों का निस्तारण किया — यानी 192 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की। इसके बाद लखीमपुर खीरी ने मानक 300 के सापेक्ष 334 मामलों का निस्तारण कर दूसरा स्थान प्राप्त किया, जबकि बस्ती ने 310 मामले निपटा कर तीसरा स्थान पाया।
जिलाधिकारी न्यायालयों की उपलब्धि
जिलाधिकारी न्यायालयों में भी जौनपुर ने रिकॉर्ड बनाया है। अक्टूबर माह में जौनपुर डीएम न्यायालय ने निर्धारित 30 मामलों के मानक के मुकाबले 71 मामलों का निस्तारण कर 236.67% की उपलब्धि दर्ज की। दूसरे स्थान पर भदोही रहा, जहां 63 मामले निपटाए गए, जबकि मऊ डीएम न्यायालय ने 51 मामलों का निस्तारण कर तीसरा स्थान प्राप्त किया। इस प्रदर्शन ने दिखाया कि जमीनी स्तर पर न्यायालयों में कामकाज न केवल तेज हुआ है, बल्कि न्याय वितरण प्रणाली में लोगों का भरोसा भी बढ़ा है।
भू-राजस्व मामलों में भी पहले नंबर पर जौनपुर
सिर्फ सामान्य राजस्व वाद ही नहीं, भू-राजस्व मामलों के निस्तारण में भी जौनपुर ने शानदार प्रदर्शन किया है। अपर जिलाधिकारी भू-राजस्व, जौनपुर ने निर्धारित 50 के मानक के सापेक्ष 184 वादों का निस्तारण कर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस श्रेणी में गाजीपुर (36 वाद) और मीरजापुर (24 वाद) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि भूमि विवादों के समाधान में जिला प्रशासन ने बेहतरीन समन्वय और सक्रियता दिखाई है।
राजस्व सुधार की नई दिशा
राजस्व विवादों का तेज़ निस्तारण योगी सरकार की “जनसुनवाई से न्याय की गारंटी” नीति का हिस्सा है। सरकार ने सभी जिलों में ई-रजिस्टर, ई-फाइलिंग और केस-ट्रैकिंग सिस्टम लागू किए हैं। जिससे फाइलों के अटकने या दबने की संभावना लगभग खत्म हो गई है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि “राजस्व विवादों का निस्तारण सिर्फ प्रशासनिक कार्य नहीं, यह जनता के अधिकार और न्याय से जुड़ा मामला है। जनता को त्वरित न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
न्याय की गति से बढ़ता विश्वास
राजस्व न्यायालयों में मामलों की त्वरित सुनवाई और निपटारे से आम नागरिकों का शासन-प्रशासन में विश्वास बढ़ा है। जहां पहले भूमि और रजिस्ट्री से जुड़े विवाद वर्षों तक लंबित रहते थे, वहीं अब डिजिटल मॉनीटरिंग और समयबद्ध कार्रवाई से माह-दर-माह हजारों मामले सुलझाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक “बेस्ट प्रैक्टिस” के रूप में अपनाया जा सकता है। लखनऊ और जौनपुर की उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मॉनीटरिंग और डिजिटल पारदर्शिता प्रणाली ने राजस्व प्रशासन को गति और जवाबदेही दोनों दी है। एक ओर जहां राजधानी लखनऊ प्रशासनिक दक्षता से अग्रणी बना है, वहीं जौनपुर जैसे जिलों ने स्थानीय न्यायालयों में इतिहास रचा है। राजस्व विवादों के त्वरित निस्तारण की यह पहल न केवल प्रशासनिक सुधार का उदाहरण है, बल्कि यह जनता के जीवन में विश्वास, न्याय और सुशासन का नया अध्याय भी खोल रही है।
(प्रकाश कुमार पांडेय )