योगी सरकार की बड़ी सौगात: ट्रंप टैरिफ से जूझ रहे यूपी के निर्यातकों को राहत का तोहफ़ा

योगी सरकार की बड़ी सौगात: ट्रंप टैरिफ से जूझ रहे यूपी के निर्यातकों को राहत का तोहफ़ा

लखनऊ। वैश्विक व्यापार में बढ़ते तनाव और अमेरिकी ‘ट्रंप टैरिफ’ के असर से परेशान उत्तर प्रदेश के निर्यातकों के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। राज्य सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति-2025-30’ के तहत कई नई प्रोत्साहन योजनाओं को लागू कर दिया है, जिससे प्रदेश के उद्योगों को न केवल निर्यात बढ़ाने बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में भी मदद मिलेगी।

बंदरगाह तक माल पहुंचाने पर आर्थिक प्रोत्साहन

राज्य सरकार ने निर्यातकों को लॉजिस्टिक लागत में सीधी राहत दी है। अब बंदरगाहों तक माल पहुंचाने के लिए सरकार 20 से 40 हजार रुपये तक की सहायता देगी। 20 फुट के कंटेनर से माल भेजने पर ₹20,000। 40 फुट के कंटेनर से माल भेजने पर ₹40,000। या कुल माल भाड़े का अधिकतम 30 प्रतिशत राशि, जो भी कम हो — सरकार की ओर से चुकाई जाएगी। यह निर्णय उन सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयों (MSME) के लिए बड़ा सहारा है जो उत्तर प्रदेश से समुद्री मार्ग से निर्यात करती हैं। प्रदेश में न तो बड़ा बंदरगाह है, न ही सीधा समुद्री तट — इसलिए अधिक परिवहन खर्च अब तक यूपी के निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा क्षमता को कम करता था।

निर्यात प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना

‘निर्यात प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना’ के तहत राज्य सरकार ने तय किया है कि जिन इकाइयों के निर्यात में हर साल बढ़ोतरी होगी, उन्हें उस वृद्धि का एक प्रतिशत या अधिकतम ₹20 लाख तक का प्रोत्साहन मिलेगा। यह प्रोत्साहन केवल उन इकाइयों को मिलेगा जो कम से कम तीन साल से लगातार निर्यात कर रही हैं। इस नीति से सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है — प्रदेश की औद्योगिक इकाइयों को सतत विकास और उत्पाद विविधीकरण की ओर प्रेरित करना। इससे विशेष रूप से टेक्सटाइल, हैंडीक्राफ्ट, फूड प्रोसेसिंग, लेदर और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यातकों को लाभ मिलेगा।

निर्यात बीमा पर भी मदद – जोखिम से सुरक्षा

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भुगतान जोखिम को देखते हुए सरकार ने निर्यातकों को बीमा कराने पर भी सहायता देने का निर्णय लिया है। शासनादेश के मुताबिक, भारतीय निर्यात क्रेडिट गारंटी निगम (ECGC) से निर्यात साख बीमा कराने वाले निर्यातकों को प्रिमियम की राशि का 30 प्रतिशत या अधिकतम ₹5 लाख का प्रोत्साहन दिया जाएगा। हालांकि, इसका लाभ पाने के लिए निर्यातकों को बीमा कराने के 90 दिनों के भीतर आवेदन करना होगा। इस कदम से न केवल निर्यातकों का जोखिम घटेगा, बल्कि नए व्यापारिक साझेदारों के साथ विश्वास भी बढ़ेगा।

डाकघर निर्यात केंद्र सहायता योजना

राज्य सरकार ने छोटे निर्यातकों — विशेषकर कुटीर उद्योगों, शिल्पकारों और ग्रामीण उत्पादकों — के लिए डाक मार्ग से निर्यात को बढ़ावा देने की योजना भी बनाई है। ‘डाकघर निर्यात केंद्र सहायता योजना’ के तहत निर्यात पर आने वाले डाक खर्च का 75 प्रतिशत, या प्रति निर्यातक एक वर्ष में अधिकतम ₹1 लाख तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा।

इस राशि में जीएसटी शामिल नहीं होगा।

योजना का लाभ पाने के लिए निर्यातकों को हर तीन महीने में निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। यह योजना खासकर उन इकाइयों के लिए लाभदायक होगी जो हस्तशिल्प, बेंत-बांस उत्पाद, जरी-जरदोजी, और हैंडलूम जैसे क्षेत्रों में काम करती हैं।

सेवा क्षेत्र के निर्यातकों को भी बढ़ावा

राज्य सरकार ने अब तक वस्तु निर्यात तक सीमित प्रोत्साहन योजनाओं के दायरे को बढ़ाते हुए सेवा क्षेत्र को भी शामिल किया है। आईटी, आईटीईएस, फिनटेक, पर्यटन, स्वास्थ्य, लॉजिस्टिक, ऑडियो-विजुअल और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों के निर्यातकों को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। ऐसे उद्यमियों को विदेशी मेलों, बायर-सेलर मीट या प्रदर्शनियों में भाग लेने पर वित्तीय सहायता दी जाएगी। स्टॉल किराए या भागीदारी लागत का 75 प्रतिशत या ₹2 लाख, जो भी कम हो, सरकार वहन करेगी। इससे यूपी के सेवा निर्यातकों को वैश्विक बाजार में अपने नेटवर्क विस्तार का मौका मिलेगा।

शासनादेश जारी, लक्ष्य – 2030 तक निर्यात में दोगुनी वृद्धि

अपर मुख्य सचिव (MSME) आलोक कुमार ने मंगलवार को शासनादेश जारी करते हुए कहा कि “सरकार का उद्देश्य 2030 तक प्रदेश के निर्यात को दोगुना करना है। निर्यातक अब केवल व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था के प्रेरक बल हैं। योगी सरकार का यह कदम ‘मेक इन यूपी, एक्सपोर्ट फ्रॉम यूपी’ के लक्ष्य को मजबूत करने वाला साबित होगा। वर्तमान में उत्तर प्रदेश से करीब 2.2 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक निर्यात होता है, जो पिछले छह वर्षों में दोगुना हुआ है।

ट्रंप टैरिफ की पृष्ठभूमि और असर

अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाए गए ‘ट्रंप टैरिफ’ यानी आयात शुल्क वृद्धि ने भारतीय उत्पादों की लागत को वैश्विक बाजार में बढ़ा दिया था। इससे खासतौर पर टेक्सटाइल, चमड़ा, ग्लास, और ब्रास उद्योग प्रभावित हुए। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, फिरोजाबाद, कन्नौज और बनारस जैसे निर्यात केंद्रों को इसका सीधा नुकसान झेलना पड़ा। अब योगी सरकार की इस नीति से यूपी के निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में राहत मिलेगी और राज्य के उत्पादों को नए बाजारों में दोबारा पहचान मिलेगी।

अर्थव्यवस्था को मजबूती की दिशा में कदम

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन योजनाओं से यूपी के एमएसएमई क्षेत्र को नई गति मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और निर्यात-आधारित उद्योगों में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, यह नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन को भी मजबूत करेगी। योगी सरकार की नई निर्यात प्रोत्साहन नीति न केवल व्यापारिक राहत है, बल्कि एक रणनीतिक आर्थिक पहल भी है — जो उत्तर प्रदेश को भारत के ‘निर्यात इंजन’ में तब्दील करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। अब यूपी का लक्ष्य स्पष्ट है — “लोकल से ग्लोबल तक, हर उत्पाद में उत्तर प्रदेश की पहचान।

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