लखनऊ बना UNESCO की ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ — भारत का दूसरा शहर जिसने जीता गौरव अवधी तहर, चाट की खुशबू और नवाबी स्वाद ने दिलाई वैश्विक पहचान

Lucknow became the second Indian city to win UNESCO Creative City of Gastronomy

लखनऊ बना UNESCO की ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ — भारत का दूसरा शहर जिसने जीता गौरव

अवधी तहर, चाट की खुशबू और नवाबी स्वाद ने दिलाई वैश्विक पहचान

“लखनऊ — नवाबों का शहर, तहज़ीब का शहर, और अब दुनिया के गैस्ट्रोनॉमिक नक्शे पर भी अपनी पहचान बना चुका शहर… यूनेस्को ने लखनऊ को ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ घोषित किया है। यानी अब लखनऊ की चाट, कबाब और अवधी स्वाद की सुगंध सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में महसूस की जाएगी…” लखनऊ की पाककला को मिला वैश्विक सम्मान

लखनऊ को उसकी समृद्ध और विविध पाककला विरासत के लिए यूनेस्को (UNESCO) की ‘क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क’ (UCCN) सूची में शामिल किया गया है।यह सम्मान ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ के रूप में मिला है — और इस खिताब को पाने वाला भारत का दूसरा शहर बन गया है। इससे पहले हैदराबाद को यह वैश्विक मान्यता प्राप्त हुई थी। यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्रे अजोले ने विश्व नगर दिवस (World Cities Day 2025) के अवसर पर 58 नए शहरों को रचनात्मक शहरों के नेटवर्क में शामिल किया, जिनमें लखनऊ भी प्रमुख नाम है।

भारत के लिए गर्व का पल

भारत के यूनेस्को स्थायी प्रतिनिधिमंडल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा भारत के लिए गर्व का क्षण! लखनऊ की समृद्ध पाककला विरासत को अब विश्व मंच पर पहचान मिली है।”इस घोषणा के साथ अब यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क में 100 से अधिक देशों के 408 शहर शामिल हो चुके हैं।यह नेटवर्क उन शहरों को सम्मानित करता है जो रचनात्मकता के माध्यम से सतत और समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा देते हैं।

लखनऊ — नवाबों की तहज़ीब और स्वाद का संगम

लखनऊ की पहचान सिर्फ उसकी भाषा, शायरी और अदब से नहीं, बल्कि उसके खाने के अंदाज़ से भी है।यह शहर चाट, कबाब, बिरयानी, निहारी और परंपरागत अवधी व्यंजनों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।टुंडे कबाब से लेकर मख्खन मलाई तक — हर स्वाद में नवाबी नफ़ासत की झलक मिलती है।अब यूनेस्को ने इन पाक परंपराओं को वैश्विक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है।

कैसे मिला लखनऊ को यह खिताब

इस साल जून में भारत सरकार ने लखनऊ को आधिकारिक रूप से यूनेस्को के लिए नॉमिनेट किया था, उसके अवधी भोजन और पाक परंपरा के संरक्षण के प्रयासों को देखते हुए।यूनेस्को ने लखनऊ की गैस्ट्रोनॉमिक विविधता, पारंपरिक खाना पकाने की कला, और स्थानीय संस्कृति में भोजन के महत्व को ध्यान में रखते हुए इसे चुना।यह खिताब लखनऊ की उस परंपरा को भी सम्मान देता है, जिसमें खाना केवल स्वाद नहीं, बल्कि कला और संस्कार का प्रतीक है।

क्या है UNESCO Creative Cities Network (UCCN)

UCCN की स्थापना वर्ष 2004 में हुई थी। इसका उद्देश्य है“उन शहरों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना जो संस्कृति और रचनात्मकता का उपयोग सतत विकास, रोजगार और सामाजिक सामंजस्य के लिए करते हैं।”इस नेटवर्क में शहरों को सात श्रेणियों में चुना जाता है।

क्राफ्ट्स और फोक आर्ट्स (Crafts & Folk Arts)
डिज़ाइन (Design)
फिल्म (Film)
गैस्ट्रोनॉमी (Gastronomy)
साहित्य (Literature)
मीडिया आर्ट्स (Media Arts)
संगीत (Music)
लखनऊ को इसमें ‘गैस्ट्रोनॉमी’ कैटेगरी में शामिल किया गया है।

दुनिया के और कौन से शहर बने ‘गैस्ट्रोनॉमी सिटी’

यूनेस्को ने इस वर्ष पाककला श्रेणी में मातोसिन्होस (पुर्तगाल), कुएनका (इक्वाडोर) और लखनऊ (भारत) को शामिल किया है। जबकि अन्य श्रेणियों में न्यू ऑरलियंस (अमेरिका) और किसुमु (केन्या) को संगीत के लिए रियाद (सऊदी अरब) को डिज़ाइन के लिए, गीजा (मिस्र) को फिल्म के लिए, मलंग (इंडोनेशिया) को मीडिया आर्ट्स के लिए, और एबरिस्टविथ (ब्रिटेन) को साहित्य के लिए चुना गया है।
अगला यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क सम्मेलन 2026 में मोरक्को के एस्सौइरा शहर में आयोजित होगा।

लखनऊ के लिए इसका मतलब क्या है

इस मान्यता का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब लखनऊ को विश्व स्तरीय मंच पर अपने फूड कल्चर, फूड फेस्टिवल्स और पाक-इनोवेशन को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। इससे पर्यटन, होटल उद्योग, रोजगार और स्थानीय ब्रांड वैल्यू में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है। नगर निगम और राज्य सरकार ने पहले ही ‘लखनऊ गैस्ट्रोनॉमी हेरिटेज सर्किट’ बनाने की योजना तैयार की है, जिसमें पुराने शहर के पारंपरिक भोजन स्थलों को वैश्विक स्तर पर प्रमोट किया जाएगा।

UNESCO DG ऑड्रे अजोले का बयान

यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्रे अजोले ने कहा “रचनात्मक शहर यह दिखाते हैं कि संस्कृति और सृजनशीलता विकास के ठोस प्रेरक हो सकते हैं। लखनऊ जैसे शहर यह प्रमाण हैं कि स्थानीय परंपराएं भी वैश्विक परिवर्तन की प्रेरक बन सकती हैं।

लखनऊ की पहचान को मिला नया आयाम
“लखनऊ — जहां ज़ुबान पर तहज़ीब है और स्वाद में इतिहास…

नवाबों के इस शहर की खुशबू अब सीमाओं के पार फैल चुकी है। चाहे चौक की गलियों की टोकरी में रखे गोलगप्पे हों, या बड़े इमामबाड़े के पास बिकती मलाई। हर स्वाद में अब ‘यूनेस्को’ की मुहर लगी है। यूनेस्को ने इसे ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ बनाकर नवाबों की रसोई को दुनिया के नक्शे पर सजा दिया है। वाकई, ये शहर अब सिर्फ खाने का नहीं, संस्कृति का भी स्वाद बन गया है। (प्रकाश कुमार पांडेय)

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