लखनऊ में LPG सिलेंडर की किल्लत: गली-गली जली भट्टियां, इंडक्शन और कोयला बना सहारा

furnaces burning in every street

लखनऊ में LPG सिलेंडर की किल्लत: गली-गली जली भट्टियां, इंडक्शन और कोयला बना सहारा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर शहर की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। गैस की किल्लत अब केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर रेस्टोरेंट, ढाबे, स्ट्रीट फूड कारोबार, टिफिन सेवाओं और यहां तक कि शादियों के आयोजन तक पहुंच गया है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और कई लोग घंटों इंतजार के बाद भी सिलेंडर नहीं पा रहे हैं।

स्थिति यह हो गई है कि शहर की कई गलियों में भट्टियां जलती नजर आ रही हैं। होटल संचालक, ठेले वाले और छोटे दुकानदार किसी तरह अपना काम चलाने के लिए कोयले और लकड़ी की भट्टियों का सहारा ले रहे हैं। वहीं कुछ लोग इंडक्शन चूल्हों पर खाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इससे खर्च और समय दोनों बढ़ रहे हैं।

गली-गली जल रही भट्टियां

लखनऊ के चौक, आलमबाग, गोमतीनगर, हजरतगंज और इंदिरानगर जैसे इलाकों में इन दिनों एक अलग ही दृश्य देखने को मिल रहा है। जहां पहले गैस सिलेंडर पर खाना बनता था, वहां अब मिट्टी की भट्टियों और कोयले के चूल्हों का इस्तेमाल हो रहा है। स्ट्रीट फूड विक्रेताओं का कहना है कि गैस की कमी के कारण उन्हें मजबूरी में पुराने तरीके अपनाने पड़ रहे हैं। कई जगह सड़क किनारे भट्टियां जलाकर समोसे, कचौरी और चाय बनाई जा रही है। हालांकि इससे खाना बनाने में ज्यादा समय लग रहा है और मेहनत भी बढ़ गई है।

कोयले और लकड़ी की मांग में भारी उछाल

गैस की कमी के चलते कोयले और लकड़ी की मांग में अचानक 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार में मिट्टी की भट्टियों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। व्यापारियों के मुताबिक पिछले दो दिनों में ही करीब 450 भट्टियों की मांग सामने आई है। कोयला बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि पहले जहां रोजाना सीमित मात्रा में कोयला बिकता था, वहीं अब बड़ी संख्या में होटल और स्ट्रीट फूड संचालक कोयला खरीदने पहुंच रहे हैं। इससे कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

रेस्टोरेंट में आधी वैरायटी

गैस संकट का सीधा असर शहर के रेस्टोरेंट और फास्ट फूड कारोबार पर भी पड़ा है। कई रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि गैस की कमी के कारण वे अब सीमित व्यंजन ही तैयार कर पा रहे हैं। कुछ जगहों पर लकड़ी और कोयले की भट्टी पर खाना बनाया जा रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया में समय ज्यादा लगता है और उत्पादन भी कम हो जाता है। नतीजतन कई रेस्टोरेंट ने अपने मेन्यू में कटौती कर दी है और ग्राहकों को पहले की तुलना में कम विकल्प मिल रहे हैं।

शादियों में भी लकड़ी का सहारा

लखनऊ में हर दिन बड़ी संख्या में शादियों और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। अनुमान के मुताबिक शहर में रोजाना 1200 से 1500 शादियों के कार्यक्रम होते हैं। गैस संकट का असर अब इन आयोजनों पर भी पड़ने लगा है। कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि गैस सिलेंडर की कमी के कारण उन्हें कई जगह लकड़ी और कोयले की भट्टी पर खाना बनाना पड़ रहा है। इससे न केवल समय अधिक लग रहा है बल्कि लागत भी बढ़ रही है। कैटरर्स एसोसिएशन का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो खाने की कीमतों में भी बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।

इंडक्शन चूल्हा बना विकल्प, लेकिन बढ़ा खर्च

कुछ दुकानदार और टिफिन सेवा संचालक गैस की कमी से निपटने के लिए इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि इंडक्शन पर खाना बनाना हर स्थिति में संभव नहीं होता। कई तरह के व्यंजन इंडक्शन पर बनाना मुश्किल होता है और लगातार बिजली खपत के कारण खर्च भी बढ़ जाता है। छोटे कारोबारियों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ बनता जा रहा है।

टिफिन सेवा और छात्रों की बढ़ी परेशानी

गैस संकट का असर टिफिन सेवाओं पर भी साफ नजर आ रहा है। कई टिफिन सेवा संचालकों का कहना है कि इंडक्शन पर केवल सीमित व्यंजन जैसे दाल-चावल या सब्जी ही बनाई जा सकती है। अगर सिलेंडर की समस्या जल्द हल नहीं हुई तो कई टिफिन सेवाएं बंद होने की कगार पर पहुंच सकती हैं। इसका सबसे ज्यादा असर पीजी में रहने वाले छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं पर पड़ रहा है। टिफिन सेवा बंद होने से कई छात्रों को खुद खाना बनाने की मजबूरी हो रही है, जिससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें

शहर की लगभग सभी गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई उपभोक्ता सुबह से ही लाइन में लग जाते हैं और घंटों इंतजार करते हैं। कुछ लोगों को तो खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए गैस एजेंसियों की निगरानी बढ़ा दी है। साथ ही उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या अनियमितता की शिकायत टोल-फ्री नंबर पर दर्ज कराएं।

नगर निगम की सेवाओं पर भी असर

गैस संकट का असर नगर निगम की सेवाओं पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार कुछ स्थानों पर ईंधन की कमी के कारण नगर निगम के वाहनों के संचालन में भी दिक्कत आ रही है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो शहर की सफाई व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल शहर के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि गैस आपूर्ति जल्द सामान्य होगी और उन्हें इस संकट से राहत मिलेगी। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाने के प्रयास जारी हैं। हालांकि तब तक लखनऊ की गलियों में जलती भट्टियां, कोयले की आंच और इंडक्शन चूल्हों की गर्मी ही लोगों की रसोई का सहारा बनी हुई है।

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