लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश की कई दिग्गज नेताओं की सीटों पर वोटिंग जारी है। अंतिम चरण में जिन 57 सीटों पर वोटिंग हो रही है वहां पिछली बार एनडीए को सबसे अधिक 32 सीटों पर जीत मिली थी। जबकि UPA को 9 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था और अन्य दलों को 16 सीट मिली थी। यहां यह कहना थोड़ा मुश्किल है कि इस अंतिम चरण के मतदान में कौन सा दल बड़ा हासिल करेगा और कौन से दल को अपनी जमीन गवना पड़ेगी। दरअसल 2019 के लोकसभा चुनाव में इनमें से 25 बीजेपी को, 8 कांग्रेस को, 4 बीजद, 3 जदयू, , 2-2 अकाली दल, 1 टीएमसी इसी तरह बसपा व अपना दल, 1-1 आप-झामुमो के पास थी।
- अंतिम चरण की 57 सीट, वोटिंग जारी
- लोकसभा चुनाव का अंतिम चरण
- दिग्गज नेताओं की सीटों पर वोटिंग जारी
- अंतिम चरण में जिन 57 सीटों पर वोटिंग
- पिछली बार एनडीए को सबसे मिली थी 32 सीट
- UPA को 9 सीटों पर ही करना पड़ा था संतोष
- अन्य दलों को 16 सीट मिली थी
2019 में हुआ था 65.24 प्रतिशत मतदान
लोकसभा की इन सीटों पर 2019 के चुनाव में 65.24%, 2014 में 65.07% और 2009 में 58.71% वोटिंग हुई थी। माना जा रहा है कि इस बार यदि 66% मतदान भी हुआ, तो पिछले 3 चुनाव की वोटिंग का रिकॉर्ड टूटेगा। बता दे 2019 के चुनाव में में सबसे ज्यादा वोटिंग पश्चिम बंगाल की बशीरहाट सीट पर 85.43% हुई थी। जबकि सबसे कम पटना साहिब सीट पर 45.8% वोटिंग दर्ज की गई थी।
हिमाचल में 6 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव
सातवें और अंतिम चरण कैसे चुनाव को राजनीतिक दलों ने गंभीरता से लिया और सघन प्रचार प्रसार कर इस बात के संकेत दिए की यह सीट उनके लिए कितने महत्वपूर्ण है। नैतिक दलों ने इस अंतिम चरण में अपने चुनावी लाभ को अधिकतम करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। इस चरण में हिमाचल प्रदेश की 6 विधानसभा सीटों के लिए भी उपचुनाव हो रहे हैं यह सत्ता धारी कांग्रेस के पास थी। ऐसे में हिमाचल प्रदेश की इन विधानसभा सीटों के चुनाव नतीजे कांग्रेस सरकार की भाग्य का फैसला करेंगे।
पश्चिम बंगाल में TMC ओडिशा में BJD का सबकुछ दांव पर
पश्चिम बंगाल में टीएमसी और उड़ीसा में बीजद जैसी क्षेत्रीय पार्टियों के लिए भी भी अंतिम चरण के चुनाव में बहुत कुछ दांव पर लगा है। TMC इस चरण में पश्चिम बंगाल की अपनी 9 सीटों का बचाव करेगी, जबकि बीजद पर ओडिशा की 6 में से 4 लोकसभा सीटों को बचाने की जिम्मेदारी है। अकाली दल ने 2019 का चुनाव बीजेपी के साथ गठबंधन में लड़ा था। वह भी पंजाब में अपनी 2 सीटों को बचाने के लिए कशमकश करती नजर आ रही है। पंजाब की 13 सीटों पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की मजबूत उपस्थिति को देखते हुए अकाली दल के लिए उन 2 सीटों को बचाए रखना इतना आसान नहीं होगा।क्या बचेगी पंजाब में आप की सीट
अंतिम चरण के चुनाव में अधिकांश पार्टियां इसलिए कड़ी मेहनत कर रही हैं, क्योंकि सभी पार्टियों का कुछ न कुछ इसमें दांव पर लगा है। इस अंतिम चरण में कांग्रेस 2019 के चुनाव में पंजाब में जीती गई आठ सीटों का बचाव के लिये प्रचार-प्रसार में पूरी ताकत झोंक दी थी। उसके सहयोगी बी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा और आप भी पंजाब में तीन सीटों का बचाव करेंगे। इनमें से संगरूर सीट आप ने उपचुनाव में खो दी थी, जिसे अकाली दल के सिमरनजीत सिंह मान ने जीता था। इस चरण में BJP अपेक्षाकृत कमजोर है और वह 34.7% वोटों के साथ 57 में से केवल 25 सीटों का बचाव करती नजर आ रही है। जबकि उसके सहयोगी जदयू, राष्ट्रीय लोक मंच, अपना 1 दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी 4 सीट पर बचाओ के लिए पूरी ताकत झोंकते नजर आए।
पंजाब में चुनावी मुकाबले की बदली तस्वीर
पंजाब में चुनावी मुकाबले की तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है। क्योंकि 2019 में वहां कांग्रेस और अकाली भाजपा गठबंधन के बीच संघर्ष था। इस बार पंजाब की धरती पर आम आदमी पार्टी-कांग्रेस से लड़ाई है। बीजेपी से गठबंधन तोड़ने के बाद अकाली दल इस इस बार के चुनाव में चुनाव में मौका खोता दिखाई दे रहा है। उधर पश्चिम बंगाल की जिन 9 सीटों पर मतदान जारी है वहां टीएमसी सबसे मजबूत है। TMC ने 2019 में इन सीटों पर 50% से अधिक वोटों के साथ जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार BJP ने बंगाल में टीएमसी का चुनाव गणित बिगाड़ने के बहुत प्रयास किए हैं। ऐसे में पश्चिम बंगाल की इन सीटों पर कड़ी लड़ाई होने वाली है। उधर बिहार में एनडीए के लिए अपनी सभी 8 सीटों को बचाना भी आसान नहीं है क्योंकि वहां पर बीजेपी की सहयोगी जदयू ने अपनी राजनीतिक जमीन खो दी है। ओडिशा की बात करें तो यहां पर इस चरण में जिन 6 सीटों पर मतदान हो रहा है सियासी जानकार बताते हैं कि उनमें से 4 पर बीजद आसानी से आगे है। इनमें से सिर्फ 2 पर बीजेपी ने पिछले चुनाव में अतीत में जीत दर्ज की थी। हालांकि इस बार ओडिशा में भी चुनावी तस्वीर बदली हुई नजर आ रही है।





