G RAM G Bill पर लोकसभा में देर रात तक घमासान, 98 सांसदों ने रखे अपने विचार; बीजेपी ने किया समर्थन, विपक्ष ने स्टैंडिंग कमेटी को भेजने की मांग

Lok Sabha debated the GAMING Bill late into the night

G RAM G Bill पर लोकसभा में देर रात तक घमासान, 98 सांसदों ने रखे अपने विचार; बीजेपी ने किया समर्थन, विपक्ष ने स्टैंडिंग कमेटी को भेजने की मांग

नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को विकसित भारत–जी राम जी (ग्रामीण रोजगार और आजीविका मिशन) संशोधन विधेयक, जिसे G RAM G Bill कहा जा रहा है, पर करीब 14 घंटे तक चली लंबी और तीखी बहस के बाद संसद का माहौल पूरी तरह गरमा गया। यह चर्चा रात 1.35 बजे तक चली, जिसमें कुल 98 सांसदों ने भाग लिया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस बिल को लेकर तीखा टकराव देखने को मिला। जहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे ‘2047 तक विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में अहम कदम बताया, वहीं विपक्ष ने इसे महात्मा गांधी के नाम और विरासत से जुड़ा मामला बताते हुए कड़ा विरोध किया और बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजने की मांग की।

सरकार देगी आज जवाब

विपक्षी दलों का मुख्य विरोध महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम में प्रस्तावित बदलाव को लेकर रहा। इंडिया गठबंधन के कई दलों ने इसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान बताया और गुरुवार सुबह संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया। विपक्ष का कहना है कि मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा कानून में बिना व्यापक विमर्श के बदलाव करना गलत परंपरा को जन्म देगा।

‘यह सरकार के पतन की शुरुआत’—विपक्ष का हमला

बहस के दौरान आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि किसी भी योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक मोदी सरकार के पतन की शुरुआत साबित होगा। वहीं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद चंद्रशेखर ने सवाल उठाया कि अगर सरकार को नाम ही बदलना था, तो इसे बाबासाहेब आंबेडकर के नाम पर क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वालों से जनता समय आने पर हिसाब जरूर लेगी।

जम्मू-कश्मीर से निर्दलीय सांसद अब्दुल रशीद शेख ने बीजेपी नेताओं पर भगवान राम के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि भगवान राम ने गरीबों और वंचितों का सम्मान किया, जबकि सरकार मनरेगा का नाम बदलकर गरीबों का अपमान कर रही है। भारतीय आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत ने इसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान करार देते हुए कहा कि सरकार धीरे-धीरे मनरेगा को खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है।

बीजेपी का पलटवार—‘नाम नहीं, काम पर फोकस’

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि विपक्ष नामकरण की राजनीति में उलझा है, जबकि मोदी सरकार डिलीवरी और परिणामों पर ध्यान देती है। उन्होंने कहा कि नया बिल किसानों, मजदूरों, महिलाओं और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में मनरेगा के नाम पर व्यापक भ्रष्टाचार हुआ, जिसे नए कानून के जरिए रोका जाएगा।

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने भी बिल का जोरदार समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी यह दर्शाती है कि सरकार इस कानून को लेकर गंभीर है। दुबे ने संविधान के अनुच्छेद 49 और 51(ए) का हवाला देते हुए तर्क दिया कि राष्ट्रपिता जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या कभी राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के नाम पर कोई सरकारी योजना बनाई गई है। उनके मुताबिक कांग्रेस इसलिए घबराई हुई है क्योंकि नए सख्त प्रावधानों से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और अब वह महात्मा गांधी के नाम पर ‘कमाई’ नहीं कर पाएगी।

स्टैंडिंग कमेटी को भेजने की मांग तेज

कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने कहा कि जिस तरह से इस बिल पर लंबी और गंभीर बहस हुई है, उससे इसकी संवेदनशीलता साफ झलकती है। उन्होंने कहा कि 98 से ज्यादा सांसदों की भागीदारी यह दिखाती है कि सदन इस मुद्दे को हल्के में नहीं ले रहा। ऐसे में विपक्ष की एकजुट मांग है कि बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए, ताकि हर पहलू पर विस्तार से विचार हो सके।

कांग्रेस सांसद वामसी कृष्णा गड्डम और प्रणिति शिंदे ने सरकार पर जल्दबाजी में कानून पारित कराने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सरकार के गैर-जरूरी फैसले उसके इरादों को उजागर करते हैं और देश में महात्मा गांधी से सभी प्यार करते हैं, सिवाय बीजेपी के।

आज मिलेगा सरकार का जवाब

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान गुरुवार को लोकसभा में बहस का जवाब देंगे। माना जा रहा है कि सरकार विपक्ष की आपत्तियों का विस्तार से खंडन करते हुए बिल को पारित कराने की कोशिश करेगी। वहीं विपक्ष भी अपने विरोध को और तेज करने के संकेत दे चुका है। कुल मिलाकर, G RAM G Bill ने संसद में एक बार फिर नाम, नीति और नीयत की राजनीति को केंद्र में ला दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार अपने बहुमत के दम पर इसे आगे बढ़ाती है या विपक्ष की मांग मानते हुए बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाता है।

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