Bihar Election 2025 : चिराग पासवान का “नमक” बयान…बीजेपी को एक रणनीतिक मैसेज

Bihar Election 2025 : चिराग पासवान का “नमक” बयान…बीजेपी को एक रणनीतिक मैसेज

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए में सीटों को लेकर तनातनी बढ़ गई है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा है कि जैसे सब्ज़ी में नमक होता है, वैसे ही मैं भी हूं। उनके इस बयान का सीधा संदेश है कि बिहार की सियासत में उनकी अहमियत को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। चिराग 40 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रहे हैं, जबकि बीजेपी 25 से ज्यादा देने के मूड में नहीं है। 2020 में चिराग ने अकेले चुनाव लड़ा था और एक सीट जीती थी, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 5 में से सभी सीटें जीत लीं। पासवान वोट बैंक और पिछले प्रदर्शन को देखते हुए बीजेपी के लिए एलजेपी (रामविलास) अहम सहयोगी है। हालांकि, ज्यादा सीटें देने से जेडीयू नाराज़ हो सकता है। चिराग का इशारा साफ है—अगर उनकी अनदेखी हुई तो एनडीए की चुनावी “सब्ज़ी” बिगड़ सकती है। चिराग यह साफ़ इशारा कर रहे हैं कि बिहार चुनाव 2025 में उनकी भूमिका बेहद अहम होने वाली है। उनका “नमक” वाला बयान केवल मज़ाक या रूपक नहीं है। बल्कि एक रणनीतिक मैसेज है।

चिराग पासवान का “नमक” वाला संदेश

चिराग पासवान ने कहा कि जैसे सब्ज़ी में नमक ज़रूरी है, वैसे ही मैं भी हूं। इसका सीधा अर्थ है कि वह खुद को एनडीए के लिए अपरिहार्य बताना चाहते हैं। उनका कहना है कि अगर सीट शेयरिंग में उनकी बात नहीं मानी गई तो एनडीए की “सब्ज़ी” यानी चुनावी रणनीति बिगड़ सकती है।

क्यों है बयान अहम?

सीटों की मांग – चिराग 40 सीटों की मांग कर रहे हैं, जबकि बीजेपी 25 पर अड़ी है।
वोट बैंक – चिराग का दावा है कि उनकी पार्टी का प्रभाव हर सीट पर 20–25 हज़ार वोटों का है।

पिछला प्रदर्शन

2020 विधानसभा: अकेले लड़े, 135 सीटों पर उतरे, सिर्फ़ 1 सीट मिली लेकिन वोट शेयर 5.6% रहा।
2024 लोकसभा: 5 सीटों पर लड़े और सभी जीते। वोट प्रतिशत 6% से अधिक।
इससे चिराग का आत्मविश्वास बढ़ा है।

बीजेपी की दिक्कत

अगर चिराग को ज्यादा सीटें दी गईं तो जेडीयू नाराज़ हो सकता है। अगर कम दी गईं तो चिराग बगावत कर सकते हैं, जैसा 2020 में हुआ था। एलजेपी (रामविलास) के पासवान वोट NDA के लिए ज़रूरी हैं, जो बिहार की राजनीति में निर्णायक असर डाल सकते हैं।

चिराग की चेतावनी

उन्होंने साफ़ कहा कि अगर असहज हुआ तो गठबंधन से बाहर निकलने का विकल्प हमेशा खुला है।यह बयान बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति है। चिराग पासवान का “नमक” बयान NDA में अपनी पकड़ और ताक़त दिखाने का संकेत है। बीजेपी को इस बार संतुलन साधना होगा—जेडीयू को भी खुश रखना है और चिराग को भी। वरना, बिहार चुनाव में महागठबंधन इसका फ़ायदा उठा सकता है। प्रकाश कुमार पांडेय

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