सौरभ पर छापे से नेताओं और अधिकारियों का गठजोड़ उजागर…जानें क्या है लाल और नीली डायरियों का सच…!

सौरभ पर छापे से नेताओं और अधिकारियों का गठजोड़ उजागर…जानें क्या है लाल और नीली डायरियों का सच…!

राजेश शर्मा और सौरभ शर्मा पर आयकर विभाग की कार्रवाई में 30 अलग अलग बैंक लॉकर मिले हैं। जांच एजेंसियों की नजर अब इन लॉकर पर है। संभावना जताई जा रही है बैंक के इन लॉकर्स में जमीनों की खरीद-फरोख्त से जुड़े अहम दस्तावेज के साथ नगदी और सोना भी मिल सकता है। बता दें सौरभ शर्मा के साथ उसके करीबी चेतन सिंह गौर के ठिकानों से जांच एजेंसियों को सैकड़ों रजिस्ट्रियां मिली हैं।

छापे की खबर कैसे लीक हुई
कार कौन छोड़कर गया
कार की 6 लोग देखरेख कर रहे थे, वो कौन थे
सौरभ 15 साल ही नौकरी की
इतने कम समय में कैसे करोड़ों कमाए
क्या है सौरभ के ठिकानों से मिली ‘डायरी का सच’
क्या दुबई शिफ्ट होने की तैयारी में था सौरभ शर्मा

आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उसके सहयोगी चेतन सिंह गौर के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापामार कार्रवाई से यह तो खुलासा हो चुका है कि नेताओं और अधिकारियों के गठजोड़ ने मध्यप्रदेश में पिछले कुछ सालों में करोड़ों अरबों के भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है। दरअसल ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि सौरभ शर्मा की परिवजन विभाग में नियुक्ति से लेकर उसकी पूरी नौकरी और आरटीओ चेक पोस्टों पर उसकी नियुक्तियां, उगाही से लेकर भ्रष्टाचार के पैसों की बंदरबांट की पूरी कहानी यह बताती है कि मध्यप्रदेश में नेताओं और अधिकारियों के बीच किस तरह से गठजोड़ के साथ भ्रष्टाचार के काम को अंजाम दिया जा रहा है।

जंगल में मिली कार से आयकर विभाग की टीम को जिस इनोवा कार से 54 किलो सोना और दस करोड़ रुपये नकदी मिली थी वह इनोवा कार चेतन गौर की है। उसमें रखा सोना और नकदी सौरभ शर्मा की निकली है। इस खुलासे के बाद अब यह आशंका भी जताई जा रही है कि सौरभ शर्मा के यहां छापे की कार्रवाई की सूचना लीक हो गई थी? यह हम इसलिए कहा रहे हैं क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में सोना और नकदी सौरभ शर्मा और उसके करीबी चेतन सिंह गौर के ठिकानों पर आयकर छापे से पहले ही इनोवा में भरकर मिंडोरा के जंगल में पहुंचा दी जाती है।

सूत्रों की मानें तो पूर्व आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा के खिलाफ जब से जांच पड़ताल शुरू हुई थी वो तब से वह चौकन्ना हो चुका था। इतना ही नहीं भ्रष्टाचार में फंसने की आशंका के चलते ही सौरभ ने नौकरी से वीआरएस लेकर बिल्डर बनने का फैसला किया था। इसके बाद वह दुबई में निवेश करने के साथ ही परिवार के साथ इुबई में ही शिफ्ट होने की तैयारी कर रहा था। जिससे काली कमाई का पूरा पैसा देश से बाहर निवेश कर उसे किसी तरह बचाया जा सके। संभवत: आयकर विभाग और जांच एजेंसियों को भी इसकी भनक लग गई थी कि पूर्व आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा को छापेमारी की तैयारी की भनक लग चुकी है। ऐसे में आनन-फानन में छापा मार कार्रवाई की गई।

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