भारत-रूस संबंधों पर लावरोव का बड़ा बयान…UNGA के मंच से बोले रूसी विदेश मंत्री
भारत अपने फैसले खुद लेने में सक्षम, रिश्ते हैं बेहद गहरे
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने में पूरी तरह सक्षम है और यही उसकी ताकत है। लावरोव ने स्पष्ट किया कि रूस भारत के इस आत्मनिर्णय और विदेश नीति की दिशा का सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह राष्ट्रीय हितों को बढ़ावा देने के लिए विदेश नीति चला रहे हैं, वह सराहनीय है। भारत के निर्णयों में आत्मविश्वास और स्वतंत्रता झलकती है, और यही कारण है कि रूस और भारत के रिश्ते विशेष और लंबे समय से भरोसे पर टिके हुए हैं।
रणनीतिक साझेदारी से ‘विशेषाधिकार प्राप्त साझेदारी’ तक
लावरोव ने भारत-रूस संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” से कहीं आगे बताया। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ वर्ष पहले भारत ने रूस के साथ साझेदारी के स्वरूप को और मज़बूत करने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद इसे “विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” का नाम दिया गया। उन्होंने कहा कि यह केवल शब्दों का बदलाव नहीं है, बल्कि यह भारत और रूस के रिश्तों की गहराई और मजबूती को दर्शाता है। लावरोव के मुताबिक, यह संबंध किसी तीसरे देश के प्रभाव या दबाव पर आधारित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों की ऐतिहासिक दोस्ती और परस्पर सम्मान पर टिके हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों पर लावरोव की टिप्पणी
लावरोव ने इस मौके पर साफ कहा कि भारत और अमेरिका के बीच जो भी स्थिति बनती है, या भारत और किसी अन्य देश के साथ जो रिश्ते रहते हैं, वह भारत-रूस संबंधों का पैमाना नहीं हैं। उन्होंने कहा कि रूस इस बात को भलीभांति समझता है कि भारत बहुध्रुवीय दुनिया में संतुलित कूटनीति अपनाता है और सभी देशों के साथ अपने हितों के अनुसार रिश्ते रखता है। यही वजह है कि रूस भारत को एक भरोसेमंद साझेदार मानता है और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना करता है।
व्यापक द्विपक्षीय एजेंडा
लावरोव ने भारत और रूस के बीच के सहयोग क्षेत्रों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का द्विपक्षीय एजेंडा बेहद व्यापक है, जिसमें शामिल हैं:
व्यापार और निवेश
सैन्य और तकनीकी सहयोग
वित्त और बैंकिंग
मानवीय मामलों में सहयोग
स्वास्थ्य सेवा
उच्च तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता
ऊर्जा और तेल क्षेत्र
बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय (एससीओ, ब्रिक्स आदि)
उन्होंने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत और रूस का तालमेल मजबूत है।
मोदी-पुतिन मुलाकात और आने वाले दौरे
रूसी विदेश मंत्री ने हाल ही में चीन के तिआनजिन में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन का जिक्र किया, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अहम बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं की मुलाकातों से यह स्पष्ट होता है कि रिश्ते कितने घनिष्ठ हैं। लावरोव ने बताया कि दिसंबर में राष्ट्रपति पुतिन भारत यात्रा पर आएंगे। वहीं, इस साल भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर रूस का दौरा करेंगे और खुद लावरोव भी भारत आने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की लगातार मुलाकातें और संवाद रिश्तों को और मजबूत करते हैं।
भारत की आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान
लावरोव ने भारत के आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की भी सराहना की। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अगर अमेरिका भारत को तेल बेचना चाहता है, तो भारत उसकी शर्तों पर चर्चा करने को तैयार है। लेकिन भारत किस देश से कितना और क्या खरीदेगा, यह उसका स्वतंत्र निर्णय होगा। उन्होंने कहा कि रूस भारत के इस दृष्टिकोण को समझता है और उसका सम्मान करता है। यह वही आत्मसम्मान है, जो भारत की वैश्विक छवि को और मजबूत करता है।
तेल और व्यापारिक रिश्ते
भारत और रूस के बीच तेल व्यापार को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना और दबाव रहा है। लेकिन लावरोव ने साफ कहा कि वे भारत से यह नहीं पूछते कि वह कितना तेल खरीदेगा या व्यापारिक रिश्तों का भविष्य क्या होगा। उन्होंने कहा कि भारत इन फैसलों को खुद लेने में पूरी तरह सक्षम है। यही वजह है कि रूस भारत को एक विश्वसनीय और स्वाभिमानी सहयोगी मानता है।
भरोसे और सम्मान पर टिके रिश्ते
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बयान से एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया कि भारत और रूस के रिश्ते केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि गहरे विश्वास और परस्पर सम्मान पर आधारित हैं। आज जब दुनिया में भू-राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं, भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रूस का उस पर भरोसा दोनों देशों की साझेदारी को और खास बना देता है। भारत-रूस संबंधों का यह संदेश न केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजा, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत वैश्विक राजनीति में एक आत्मनिर्भर और निर्णायक शक्ति बनकर उभर चुका है। प्रकाश कुमार पांडेय





