भारत की इस ट्रेन में लगता है लंगर…थाली-कटोरी लेकर बैठते हैं यात्री…यात्रियों को नहीं रहती लंच-डिनर की चिंता !

Langar service for Amritsar Sachkhand Express passengers Indian Railway Catering and Tourism Corporation

ट्रेन में सफर करने पहले यह चिंता जरुर रहती है कि शाम का भोजन कैसे होगा, अधिकांश यात्री टिफिन लेकर यात्रा करते है। कई ट्रेन में ब्रेक फास्ट, लंच और डिनर मिलता है। सफर के दौरान ट्रेन में बैठे-बैठे ही उनको मनपसंदीदा खाना उन्हें मिल जाता है। रेलवे की ओर से इसके लिए सर्विस मुहैया कराई जाती है। हालांकि यात्री को इसके लिए पैसे खर्च करना पड़ते हैं। लेकिन भारतीय रेलवे की एक ट्रेन ऐसी भी है,जिसमें सफर करने वाले यात्रियों को लंच और डिनर की चिंता नहीं रहती। यात्रियों को इस ट्रेन में भरपेट भोजन मिलता है और पैसे भी नहीं देना होता है।

ट्रेन में लंगर…यात्रियों को नहीं रहती लंच-डिनर की चिंता

हम बात कर रहे हैं अमृतसर-सचखंड एक्सप्रेस की। जिसमें यात्रियों को लंगर सेवा दी जाती है। यह सिलसिला आज का नहीं है,लंबे समय से चल रहा है। भारतीय रेलवे लगातार दुनिया की बेहतरीन रेल सुविधाओं वाली रेल सेवा बनती जा रही है। रेल के सफर के दौरान यात्रियों को बहुत सारी सहूलियतें मिलती हैं। ट्रेन में बैठे-बैठे यात्रियों को उनकी पसंद का भोजन मिलता है। रेलवे की इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन @IRCTC की ओर से अलग से साइट बनाई है। जिसके जरिए ट्रेन की सीट पर बैठे-बैठे ही ऑनलाइन खाना भी मंगाया जा सकता है। हालांकि इसके लिए पैसे अदा करना होता है। लेकिन रेलवे की एक ट्रेन ऐसी है जिसमें फ्री में भरपेट भोजन मिलता है। बताया जा रहा है कि इस ट्रेन में यात्रियों के लिए लंगर सुविधा मुहैया भी कराई जाती है।
जी हां यह है अमृतसर-नांदेड़ सचखंड एक्सप्रेस, जिसमें पिछले 29 साल से यात्रियों को फ्री में खाना खिलाया जा रहा है। ट्रेन में भोजन ले जाने की जरूरत नहीं होती है। करीब 2081 किलोमीटर के सफर में यात्रियों को लंगर दिया जाता है। हालांकि सचखंड एक्सप्रेस में पैंट्री भी है, लेकिन यहां खाना नहीं बनता। इसकी मुख्य वजह यह है कि जिस समय नाश्ता मिलता है, ठीक उसी समय स्टेशन पर लंगर लगता है। जिससे नाश्ता या खाना बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ती है।

सचखंड एक्सप्रेस के सफर में 6 लंगर

सचखंड एक्सप्रेस में सफर करने वाले यात्रियों को खाने की कोई टेंशन नहीं रहती है। उन्हें फ्री में खाना मिलता है। बीते कई साल से इस ट्रेन में यात्रियों को स्पेशल लंगर परोसी जाता है। सचखंड एक्सप्रेस 39 स्टेशनों पर रुकती है। इस पूरे सफर में 6 स्टेशनों पर यात्रियों के लिए लंगर लगाया जाता है। ट्रेन भी उसी हिसाब से इन स्टेशनों का स्टापेज होता है कि लोग आराम से लंगर लेकर खा सकें।

नई दिल्ली और डबरा स्टेशन पर प्लेटफार्म के दोनों ओर सचखंड एक्सप्रेस में लंगर लगता है। जिसके लिए यात्री भी पहले से ही तैयारी कर लेते हैं। इस रेल के सभी यात्रियों के हाथों में अपने अपने बर्तन होते हैं। यहां कोई अमीर या गरीब नहीं होता। हर किसी को लंगर का ही इंतजार रहता है। जनरल बोगी से लेकर एसी कोच तक के यात्री अपने अपने बर्तन लेकर स्टेशन उतर जाते हैं।

हर दिन बदलता है लंगर का मेनू

यहां पर लंगर का मेनू हर दिन बदलता है। इसका खर्च आसपास के गुरुद्वारों को मिलने वाली दान की राशि से निकलता है। अमूमन कढ़ी-चावल, दाल, छोले,, खिचड़ी, आलू-गोभी की सब्जी, साग-भाजी लंगर में मिलती हैं।
एक जानकारी के अनुसार पिछले 29 साल में एक भी दिन ऐसा नहीं हुआ जब यहां पर लंगर ना खिलाया गया हो। यह ट्रेन अगर लेट भी होती है तो सेवादार ट्रेन के आने के इंतजार में खड़े रहते हैं। हर दिन करीब 2000 यात्रियों के लिए लंगर यहां तैयार किया जाता है।

यह है ट्रेन का इतिहास?

सचखंड एक्सप्रेस को नांदेड़ और अमृतसर के बीच चलाया जाता है। साल 1995 में सचखंड एक्सप्रेस हफ्ते में एक बार चलती थी। इसके बाद थोड़ा परिवर्तन कर हफ्ते में दो बार चलाया गया। 1997-1998 के दौरान यह हफ्ते में पांच दिन चलने लगी। इसके बाद साल 2007 से यह ट्रेन हरदिन चलाई जा रही है। बताया जाता है कि ट्रेन में लंगर की शुरुआत सिख कारोबारियों ने की थी। जिसे बाद में गुरुद्वारे की ओर से जारी रखा है। सचखंड एक्सप्रेस में सभी यात्रियों को लंगर दिया जाता है।

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