लाड़ली बहना योजना से बदली मंजू यादव की जिंदगी
सिलाई सेंटर खोलकर बनीं आत्मनिर्भर, अन्य महिलाओं को भी दे रहीं रोजगार
भोपाल। सरकार की योजनाएं जब सही लोगों तक पहुंचती हैं तो वे केवल आर्थिक सहायता नहीं देतीं, बल्कि जीवन की दिशा भी बदल देती हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण नर्मदापुरम की रहने वाली मंजू यादव की कहानी है। कभी सीमित आय और जिम्मेदारियों के बीच अपने परिवार का सहारा बनने का सपना देखने वाली मंजू यादव आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। राज्य सरकार की मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उनके जीवन में उम्मीद की नई रोशनी जगाई। इसी सहयोग के बल पर उन्होंने अपने घर से सिलाई का काम शुरू किया और धीरे-धीरे उसे एक छोटे व्यवसाय में बदल दिया। आज वे न केवल खुद की आय का स्रोत बना चुकी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार का अवसर प्रदान कर रही हैं।
छोटे कदम से शुरू हुआ सफर
नर्मदापुरम जिले के वार्ड क्रमांक 31 दीवान चौक ग्वालटोली निवासी 30 वर्षीय मंजू यादव को जून 2023 से लाड़ली बहना योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिलने लगी। शुरुआत में यह राशि उनके लिए घर की जरूरतों को पूरा करने का सहारा बनी, लेकिन उन्होंने जल्द ही इसे अपने सपनों को साकार करने का माध्यम बनाने का फैसला किया।
मंजू को सिलाई का काम पहले से आता था। उन्होंने योजना से मिलने वाली राशि को बचाकर सिलाई मशीन और जरूरी सामान खरीदा और घर से ही कपड़ों की सिलाई शुरू कर दी। शुरुआत भले ही छोटी थी, लेकिन उनके हौसले बड़े थे।
मेहनत से मिला सफलता का रास्ता
मंजू यादव ने अपने काम को पूरी लगन और मेहनत के साथ आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे उनके काम की पहचान बनने लगी और आसपास के लोगों ने भी उनसे कपड़े सिलवाने शुरू कर दिए। ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता गया। फरवरी 2026 तक उन्हें योजना की 33वीं किश्त सहित कुल 43 हजार 500 रुपये की आर्थिक सहायता मिल चुकी है। इस राशि और सिलाई के काम से हुई कमाई को उन्होंने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में लगाया।
छोटा काम बना बड़ा सिलाई सेंटर
समय के साथ मंजू यादव ने अपने काम का विस्तार करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपनी बचत और मुनाफे का उपयोग करते हुए एक छोटा सिलाई सेंटर शुरू किया। आज उनके सेंटर में पांच सिलाई मशीनें संचालित हो रही हैं। यहां वे खुद भी काम करती हैं और अन्य महिलाओं को भी सिलाई का काम सिखाकर रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। इससे कई महिलाओं को घर के पास ही आय का साधन मिल गया है।
महिलाओं को मिल रहा रोजगार
मंजू यादव का सिलाई सेंटर अब केवल उनका व्यवसाय नहीं रहा, बल्कि यह कई महिलाओं के लिए रोजगार का माध्यम बन गया है। यहां काम करने वाली महिलाएं सिलाई सीखने के साथ-साथ अपनी आय भी अर्जित कर रही हैं। इस पहल से न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। मंजू का कहना है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं तो पूरा परिवार और समाज मजबूत बनता है।
परिवार की आर्थिक स्थिति हुई मजबूत
सिलाई सेंटर शुरू होने के बाद मंजू यादव के परिवार की आर्थिक स्थिति में भी काफी सुधार आया है। पहले जहां घर की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल होता था, वहीं अब नियमित आय से परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं। मंजू अपने बच्चों की पढ़ाई और घर की जिम्मेदारियों को भी बेहतर तरीके से निभा पा रही हैं। इससे उनके परिवार में खुशहाली और आत्मविश्वास दोनों बढ़े हैं।
योजना से मिला आत्मविश्वास
मंजू यादव भावुक होकर बताती हैं कि लाड़ली बहना योजना उनके लिए केवल आर्थिक मदद नहीं बल्कि आत्मविश्वास का स्रोत भी बनी। इस योजना ने उन्हें अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत दी। उनका कहना है कि यदि यह सहायता नहीं मिलती तो शायद वे कभी अपने व्यवसाय की शुरुआत नहीं कर पातीं। लेकिन योजना से मिली छोटी-छोटी किश्तों ने उन्हें धीरे-धीरे आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया।
आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी
आज मंजू यादव की कहानी कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि सही अवसर और थोड़ा सहयोग मिल जाए तो महिलाएं अपनी मेहनत से अपनी पहचान बना सकती हैं। लाड़ली बहना योजना के माध्यम से मिली आर्थिक सहायता ने उनके जीवन में नया विश्वास जगाया और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया। आज मंजू यादव गर्व के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं और अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही हैं। मंजू की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि सही दिशा में किया गया छोटा प्रयास भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।