ISRO की कामयाबी पर कुमार विश्वास का खास अंदाज में सलाम, बोले- ‘रोज ही आकाश चढ़ते जा रहे हैं हम’

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने GSLV-F17 के जरिए EOS-05 उपग्रह को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर देश की अंतरिक्ष यात्रा में एक और अहम उपलब्धि जोड़ी है। इस सफलता पर कवि और कथा वाचक कुमार विश्वास ने भी अपने खास अंदाज में वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कविता की पंक्तियों के जरिए इस उपलब्धि को देश के वैज्ञानिकों की मेहनत और प्रतिभा से जोड़ा।

कुमार विश्वास ने कविता की पंक्तियों से ISRO की सफलता को किया सलाम, वैज्ञानिकों को दी खास बधाई

कुमार विश्वास ने X पर लिखा, “स्वर्ग के सम्राट को जाकर खबर कर दो, रोज ही आकाश चढ़ते जा रहे हैं हम…!” इसके साथ उन्होंने GSLV-F17 की सफल उड़ान और EOS-05 के कक्षीय प्रक्षेपण पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारतीय वैज्ञानिकों की लगातार की गई मेहनत, वैज्ञानिक सोच और मजबूत संकल्प का परिणाम है। अपने संदेश में उन्होंने ISRO से जुड़े वैज्ञानिकों और कर्मचारियों की भी सराहना की।

ISRO के वैज्ञानिकों की मेहनत को बताया बड़ी उपलब्धि, जय हिंद के साथ दी शुभकामनाएं

कुमार विश्वास ने इसरो की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए वैज्ञानिकों और कर्मयोगियों को साधुवाद दिया। उन्होंने अपने संदेश का अंत ‘जय हिंद’ और ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष के साथ किया। उनका यह अंदाज सोशल मीडिया पर लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बना। उन्होंने अपनी कविता के जरिए अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की लगातार बढ़ती क्षमता को रेखांकित किया।

GSLV-F17 ने 2,300 किलोग्राम से ज्यादा वजनी EOS-05 को निर्धारित कक्षा की ओर पहुंचाया

दरअसल, ISRO ने शुक्रवार को GSLV-F17 रॉकेट के माध्यम से 2,300 किलोग्राम से अधिक वजन वाले EOS-05 का सफल प्रक्षेपण किया। प्रक्षेपण के लगभग 18 मिनट बाद उपग्रह को निर्धारित उप-भूतुल्यकालिक अंतरण कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचाया गया। इस मिशन को भारत के पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैज्ञानिकों ने उपग्रह को बेहद सटीक तरीके से उसकी निर्धारित दिशा में आगे बढ़ाया।

करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर तैनात होगा उपग्रह, पृथ्वी पर रखेगा लगातार नजर

EOS-05 को पृथ्वी से करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर भू-तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित किया जाना है। इस कक्षा की खासियत यह है कि उपग्रह पृथ्वी के घूमने की गति के साथ तालमेल बनाए रख सकता है। जहां कई अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट पृथ्वी की निचली कक्षा यानी LEO में काम करते हैं, वहीं EOS-05 की तैनाती इसे अलग तरह की निगरानी क्षमता देगी। GSLV के जरिए भेजा गया यह 2,300 किलोग्राम से अधिक वजन वाला सबसे भारी उपग्रह बताया गया है।

‘आसमान से नजर रखने वाली आंख’ बनेगा EOS-05, खेती से आपदा प्रबंधन तक मिल सकती है मदद

मिशन से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक ने EOS-05 को ‘आसमान से नजर रखने वाली आंख’ बताया है। इसके जरिए वास्तविक समय में तस्वीरें उपलब्ध कराने की क्षमता विकसित होने की उम्मीद है। इन तस्वीरों और आंकड़ों का इस्तेमाल कृषि, आपदा प्रबंधन समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकता है। यानी यह मिशन सिर्फ अंतरिक्ष में उपग्रह भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर मौजूद कई क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। ISRO की इस उपलब्धि पर कुमार विश्वास का संदेश भी इसी वैज्ञानिक सफलता और देश के बढ़ते अंतरिक्ष सामर्थ्य को सलाम करता नजर आया।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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