योगी-मोदी-शाह से बृजभूषण परिवार की मुलाकात…जानें आखिर क्या वजह है…
उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति इन दिनों अलग-अलग वजहों से गरमाई हुई है। यूपी में बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का परिवार लगातार शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर रहा है, तो वहीं बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वास्थ्य और नेतृत्व को लेकर विपक्षी सवालों का उनके बेटे निशांत कुमार ने जवाब दिया है।
दिल्ली दरबार तक पहुंचा बृजभूषण परिवार
सीएम योगी से शुरू हुआ बृजभूषण परिवार का मुलाकातों का सिलसिला अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह तक जा पहुंचा है। मंगलवार को बृजभूषण के बेटे और कैसरगंज से बीजेपी सांसद करण भूषण सिंह ने अपने परिवार के साथ पीएम मोदी से मुलाकात की। उनकी बेटी कामाक्षी सिंह और बेटा अमर्थ भूषण सिंह ने पीएम को छोटा-सा गदा भेंट किया। पीएम मोदी ने बच्चों से पढ़ाई पर चर्चा की और अंत में कहा—“अपने बाबा (बृजभूषण) को मेरा प्रणाम कहना।
इसके पहले, बृजभूषण शरण सिंह ने लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ से 31 महीने बाद 55 मिनट लंबी बैठक की थी। फिर उनके बेटे विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से भी मुलाकात की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौर बीजेपी संगठनात्मक बदलाव और भविष्य की रणनीति से जुड़ा हो सकता है।
बिहार: निशांत बोले—“नीतीश ही होंगे चेहरा”
वहीं दूसरी ओर बिहार में विपक्ष लगातार यह प्रचारित कर रहा था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का स्वास्थ्य ठीक नहीं है और वे अब सक्रिय नहीं रह पा रहे। इस पर उनके बेटे निशांत कुमार ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री बिल्कुल फिट और सक्रिय हैं। चुनाव उन्हीं के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।”
विपक्ष की ओर से निकाली जा रही ‘वोट अधिकार यात्रा’ पर निशांत ने कहा कि यह चुनाव आयोग का विषय है, विपक्ष सिर्फ सुर्खियों के लिए यह कर रहा है। पीएम मोदी की बिहार यात्रा पर भी उन्होंने सकारात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि हर दौरे से बिहार को नई योजनाएं मिलती हैं। निशांत ने नीतीश सरकार की 20 साल की उपलब्धियां गिनाते हुए शिक्षा, बिजली, सड़क और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए कामों का बखान किया और कहा कि विकास की रफ्तार और तेज होगी।
जहां यूपी में बृजभूषण परिवार की सक्रियता को लेकर राजनीतिक कयासबाज़ी तेज है, वहीं बिहार में नीतीश कुमार के बेटे निशांत ने साफ कर दिया है कि अगले चुनाव का नेतृत्व नीतीश ही करेंगे। दोनों राज्यों की हलचल यह संकेत देती है कि 2025 के विधानसभा चुनावी मौसम से पहले राजनीतिक समीकरणों का जमाना अभी और गरमाने वाला है।





