अंतिम सोम प्रदोष व्रत….जानें तिथि, मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व…!
हिंदू पंचांग और शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना का एक अत्यंत फलदायक और शुभ व्रत माना गया है। हर माह की त्रयोदशी तिथि (शुक्ल और कृष्ण पक्ष दोनों) को यह व्रत रखा जाता है। जब यह तिथि सोमवार के दिन आती है, तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहते हैं, जो शिवभक्तों के लिए विशेष रूप से पुण्यदायक होता है।
अंतिम सोम प्रदोष व्रत, कब है?
तिथि: 23 जून 2025, सोमवार
त्रयोदशी तिथि 22 जून 2025 की रात 1 बजकर 21 मिनिट से प्रारंभ
त्रयोदशी तिथि 23 जून 2025 की रात 10 बजकर 9 मिनिट पर समाप्त हो रही है
प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल)
शाम 07:20 बजे से रात 09:20 बजे तक
यह जून महीने का अंतिम प्रदोष व्रत भी है।
धार्मिक महत्व: क्यों करें सोम प्रदोष व्रत?
सोमवार और त्रयोदशी का योग भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ समय होता है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को करने से पापों का नाश, धन-संपत्ति में वृद्धि, आरोग्यता और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जिन व्यक्तियों की कुंडली में चंद्र दोष या मानसिक बेचैनी हो, उनके लिए यह व्रत विशेष लाभकारी होता है। यह व्रत कर्ज मुक्ति, विवाह में बाधा, और संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी किया जाता है।
व्रत व पूजा विधि: कैसे करें सोम प्रदोष व्रत?
प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें भगवान शिव की कृपा के लिए सोम प्रदोष व्रत रखते हैं। पूरे दिन उपवास रखें। फलाहार किया जा सकता है।
प्रदोष काल में शिवलिंग का पूजन करें
कैसे करें अभिषेक——जल और दूध के सथ ही दही, घी, शहद और गंगाजल से भोलेनाथ का अभिषेक करें।
अर्पण: बेलपत्र, धतूरा, आक, चंदन, फूल, फल, भस्म आदि अर्पित करें।
मंत्र जाप: “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जाप करें।
पाठ: शिव चालीसा, शिवाष्टक, या शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।
रात्रि में शिव नाम का स्मरण करते हुए भक्तिपूर्वक उपवास समाप्त करें या अगले दिन पारण करें। व्रत के दिन सत्य बोलें, क्रोध व कलह से बचें। मंदिर जाकर शिवलिंग पर जलधारा चढ़ाएं। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या जल दान करें।