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आरएसएस के 100 साल का इतिहास: जानें 1975 में इंदिरा गांधी ने क्यों लगाया था संघ पर प्रतिबंध…!

DigitalDesk by DigitalDesk
September 30, 2025
in नागपुर, महाराष्ट्र, मुख्य समाचार, राजनीति, संपादक की पसंद
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Know the 100 year history of RSS why Indira Gandhi banned the Sangh in 1975
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आरएसएस के 100 साल का इतिहास: जानें 1975 में इंदिरा गांधी ने क्यों लगाया था संघ पर प्रतिबंध…!

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस का सफर 100 साल का हो चुका है। आरएसएस ने अपने सौ साल के इस सफर के दौरान कई उतार-चढ़ाव का सामना किया। एक दौर वो भी था जब केन्द्र की सरकार को आरएसएस पर प्रतिबंध लगाना पड़ा था। एक बार नहीं संघ पर तीन बार प्रतिबंध लगाया गया। हर प्रतिबंध के बाद संघ के स्वयं सेवकों का उत्साह दोगुना होता चला गया।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS की स्थापना 27 सितंबर 1925 को हुई थी, यह विजयादशमी का दिन था और महाराष्ट्र के नागपुर में डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने इसकी स्थापना की थी। संघ की स्थापना का उनका उद्देश्य था कि   भारतीय समाज को बौद्धिक, सांस्कृतिक और मानसिक गुलामी से मुक्त करना तथा राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करना। 100 वर्षों में संघ का इतिहास उतार-चढ़ाव, प्रतिबंधों, विस्तार और सामाजिक कार्यों से भरा रहा है।

प्रारंभिक दौर (1925–1940)

संघ का आरंभ नागपुर में एक छोटी शाखा से हुआ। शाखा प्रणाली (दैनिक अभ्यास, अनुशासन, प्रार्थना) ने स्वयंसेवकों को संगठित किया। 1930 के दशक तक संघ मध्य भारत से बाहर फैलने लगा। हेडगेवार ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया, हालांकि संघ का मुख्य फोकस समाज संगठन पर रहा। 1940 में हेडगेवार के निधन के बाद एम. एस. गोलवलकर (गुरुजी) सरसंघचालक बने।

स्वतंत्रता संग्राम और विभाजन काल (1940–1950)

गुरुजी गोलवलकर के नेतृत्व में संघ का विस्तार तेज हुआ। संघ के स्वयंसेवकों ने 1947 के विभाजन और दंगों के समय राहत कार्य किए। साल 1948 के दौरान जब महात्मा गांधी की हत्या हुई उसके बाद आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस दौरान संघ को झटका लगा, लेकिन संविधान और लोकतंत्र की प्रतिबद्धता जताने के बाद 1949 में प्रतिबंध हटा लिया गया।

संगठन विस्तार और राजनीति से दूरी (1950–1970)

संघ ने सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया। शिक्षा, श्रमिक, छात्र, किसान और महिला क्षेत्रों में संघ से जुड़े संगठन बने, जैसे भारतीय मजदूर संघ (1955), विश्व हिंदू परिषद (1964), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद। 1966 में गाय संरक्षण आंदोलन में भी संघ की सक्रिय भूमिका रही। इस दौर में संघ का राजनीतिक दलों से सीधा संबंध नहीं था, लेकिन जनसंघ (1951, श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित) में संघ पृष्ठभूमि के नेता सक्रिय रहे।

आपातकाल और संघ की भूमिका (1975–1977)

1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान संघ पर प्रतिबंध लगा। हजारों स्वयंसेवक जेल गए, भूमिगत आंदोलन में संघ ने बड़ी भूमिका निभाई। आपातकाल के बाद जनता पार्टी बनी, जिसमें जनसंघ और अन्य दल शामिल हुए।

भाजपा का उदय और संघ (1980–2000)

1980 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बनी। अयोध्या आंदोलन और राम जन्मभूमि आंदोलन में संघ परिवार की भूमिका अहम रही। 1990 के दशक में भाजपा के सत्ता में आने के साथ ही संघ का प्रभाव बढ़ा। सामाजिक सेवा कार्यों के जरिए संघ ने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास में हजारों प्रकल्प शुरू किए।

नया शतक और वैश्विक विस्तार (2000–2025)

संघ अब केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि 40 से अधिक देशों में शाखाएं चला रहा है। सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और सेवा कार्यों पर संघ का जोर बढ़ा।2014 में नरेंद्र मोदी, जो स्वयं एक संघ प्रचारक रहे, प्रधानमंत्री बने। 2025 में संघ अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। इस अवसर पर देशभर में बड़े पैमाने पर कार्यक्रम, सम्मेलन और जनसंपर्क अभियान आयोजित किए जा रहे हैं।

संघ पर तीन बार लगा प्रतिबंध

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस लंबे सफर में संघ को कई बार आलोचनाओं और विवादों का सामना करना पड़ा। खासकर तीन बड़े अवसरों पर संघ पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाया गया। आइए जानते हैं किस परिस्थिति में संघ पर तीन बार बैन लगा और कैसे ये हटाया गया।

पहली बार प्रतिबंध : गांधी हत्या के बाद (1948–1949)

30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या के बाद संघ पर पहला प्रतिबंध लगाया गया। हत्या को संघ से जोड़कर देखा गया, जिसके कारण तत्कालीन सरकार ने संगठन पर बैन लगा दिया। लगभग 18 महीने तक यह प्रतिबंध जारी रहा। 11 जुलाई 1949 को यह प्रतिबंध हटाया गया, जब तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की शर्तें संघ ने मानीं।

दूसरी बार प्रतिबंध : आपातकाल के दौरान (1975–1977)

जून 1975 में इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया। आरएसएस ने आपातकाल और सरकार की नीतियों का खुलकर विरोध किया। इसके चलते संघ पर दूसरा प्रतिबंध लगाया गया और हजारों स्वयंसेवकों को जेल भेजा गया। लगभग दो साल तक संघ प्रतिबंधित रहा। 1977 में आपातकाल समाप्त होने और चुनाव में जनता पार्टी की जीत के बाद संघ से प्रतिबंध हटा दिया गया।

तीसरी बार प्रतिबंध : बाबरी मस्जिद विध्वंस (1992–1993)

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा (बाबरी मस्जिद) गिरा दिया गया। इस घटना के बाद पूरे देश में हिंसा और तनाव का माहौल फैल गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिंह राव ने आरएसएस पर तीसरी बार प्रतिबंध लगाया। इसके साथ ही संघ के खिलाफ जांच बैठाई गई, लेकिन कोई ठोस सबूत न मिलने के कारण 4 जून 1993 को यह प्रतिबंध हटा लिया गया। आरएसएस पर लगे तीनों प्रतिबंध अलग-अलग दौर की राजनीतिक परिस्थितियों और घटनाओं से जुड़े थे। तीनों बार संघ प्रतिबंध झेलकर भी दोबारा सक्रिय हुआ और और भी व्यापक रूप से फैलता गया। आज यह दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन माना जाता है।

आरएसएस का 100 साल का इतिहास त्याग, अनुशासन और संगठन की मिसाल है। इसकी यात्रा केवल एक संगठन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इससे जुड़े अनेक अनुषांगिक संगठनों (संघ परिवार) ने भारतीय राजनीति, समाज और संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया है। आलोचनाओं और प्रतिबंधों के बावजूद संघ ने स्वयं को मजबूत किया और आज यह दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन माना जाता है। (प्रकाश कुमार पांडेय)

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Tags: #100 year history of RSS#why Indira Gandhi banned the RSS in 1975
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