केरल विधानसभा चुनाव: कांग्रेस के लिए आगे की राह क्या?
अहम बैठक से शशि थरूर की दूरी, पार्टी के भीतर चर्चाओं का दौर तेज
नई दिल्ली | 24 जनवरी केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर हलचल तेज होती नजर आ रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर का एक अहम रणनीतिक बैठक में शामिल न होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इस बैठक का उद्देश्य आगामी केरल विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस की रणनीति पर मंथन करना था। हालांकि, थरूर की ओर से साफ किया गया है कि उनकी अनुपस्थिति किसी राजनीतिक मतभेद की वजह से नहीं, बल्कि पहले से तय साहित्यिक कार्यक्रम के कारण थी।
पार्टी बैठक से क्यों रहे अनुपस्थित?
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने पार्टी की रणनीतिक बैठक में हिस्सा नहीं लिया क्योंकि उन्हें केरल के कोझिकोड में आयोजित केरल लिटरेचर फेस्टिवल में अपनी नई पुस्तक ‘श्री नारायण गुरु’ पर बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। थरूर के कार्यालय की ओर से बताया गया कि उन्होंने पहले ही पार्टी नेतृत्व को अपनी व्यस्तता की जानकारी दे दी थी और इसी वजह से वे बैठक में शामिल नहीं हो सके। थरूर हर साल इस साहित्यिक महोत्सव में हिस्सा लेते रहे हैं और इसे एशिया के सबसे बड़े साहित्यिक आयोजनों में से एक माना जाता है।
राहुल गांधी से जुड़ा हालिया विवाद
थरूर की अनुपस्थिति इसलिए भी ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इससे कुछ दिन पहले ही केरल के कोच्चि में आयोजित कांग्रेस की ‘महापंचायत’ के दौरान उन्हें कथित तौर पर नजरअंदाज किए जाने की खबरें सामने आई थीं। बताया गया कि 19 जनवरी को आयोजित इस कार्यक्रम में जब राहुल गांधी मंच पर पहुंचे, उस समय शशि थरूर संबोधन दे रहे थे। राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद कई नेताओं का अभिवादन किया, लेकिन थरूर का नाम नहीं लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, इससे शशि थरूर खुद को “गहराई से अपमानित” महसूस कर रहे थे, क्योंकि मंच पर मौजूद होने के बावजूद उनका उल्लेख नहीं किया गया।
कांग्रेस ने किया खंडन
हालांकि कांग्रेस पार्टी ने इन अटकलों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस में किसी तरह का आंतरिक मतभेद नहीं है और थरूर को गलत तरीके से पेश किया है।
पीएम मोदी के कार्यक्रम में दिखे थरूर
दिलचस्प बात यह है कि शशि थरूर हाल ही में तिरुवनंतपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम में भी नजर आए थे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कई वंदे भारत ट्रेनों का उद्घाटन किया। इस उपस्थिति को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चाएं हुईं, हालांकि थरूर इससे पहले भी कई मौकों पर राष्ट्रीय हित से जुड़े कार्यक्रमों में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर शामिल होते रहे हैं।
दिल्ली में हुई AICC की बैठक
इस बीच, दिल्ली में हुई अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की बैठक में पार्टी के कई शीर्ष नेता मौजूद रहे। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, राहुल गांधी, जयराम रमेश, दीपा दासमुंशी, मीरा कुमार समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। हालांकि, पार्टी नेताओं का कहना है कि शशि थरूर और केंद्रीय नेतृत्व के बीच किसी भी तरह का मतभेद नहीं है।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब शशि थरूर किसी AICC बैठक में शामिल नहीं हुए हों। इससे पहले भी उन्हें ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनने को लेकर पार्टी के भीतर आलोचना का सामना करना पड़ा था। उस समय पार्टी के कुछ नेताओं ने सवाल उठाए थे क्योंकि राहुल गांधी, जयराम रमेश और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे वरिष्ठ नेताओं को उस प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं किया गया था।
केरल चुनाव का सियासी गणित
गौरतलब है कि केरल विधानसभा चुनाव मई 2026 से पहले होने हैं, हालांकि चुनाव आयोग ने अभी आधिकारिक तारीखों की घोषणा नहीं की है। राज्य में सियासी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। केरल में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है—
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वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF),
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कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF),
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और बीजेपी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)।
140 सदस्यीय विधानसभा में सत्ता हासिल करने के लिए सभी दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुट गए हैं। कांग्रेस और बीजेपी, दोनों ही सत्तारूढ़ सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले LDF को सत्ता से बाहर करने की कोशिश में हैं।शशि थरूर की बैठक से दूरी और हालिया घटनाक्रम ने भले ही कांग्रेस के भीतर चर्चाओं को हवा दी हो, लेकिन पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश दे रहा है कि संगठन एकजुट है। केरल चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक संतुलन बनाए रखते हुए सशक्त रणनीति तैयार करना होगी। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि कांग्रेस इन चर्चाओं को पीछे छोड़कर चुनावी मैदान में कितना प्रभावी प्रदर्शन कर पाती है।