वायरल वीडियो विवाद: कर्नाटक के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रामचंद्र राव निलंबित
सरकार ने दिए निष्पक्ष जांच के आदेश
सोशल मीडिया पर एक कथित आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद कर्नाटक प्रशासन में हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो के सामने आते ही राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और डीजीपी (सिविल राइट्स एन्फोर्समेंट) रामचंद्र राव को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब वीडियो को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में तीखी चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, सोमवार 19 जनवरी को सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई वीडियो क्लिप वायरल हुए। इन वीडियो में कथित तौर पर रामचंद्र राव को अलग-अलग महिलाओं के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाए जाने का दावा किया गया। वीडियो तेजी से वायरल होने लगे और देखते ही देखते मामला तूल पकड़ गया। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया और मामले की जांच के आदेश देते हुए राव को निलंबित कर दिया।
रामचंद्र राव ने आरोपों को किया खारिज
विवाद बढ़ने के बीच रामचंद्र राव ने सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने वायरल वीडियो को पूरी तरह फर्जी, मनगढ़ंत और साजिश का हिस्सा बताया। कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर के आवास के बाहर मीडिया से बातचीत में राव ने कहा कि वे इस घटनाक्रम से पूरी तरह स्तब्ध हैं।
वीडियो आठ साल पुराना होने का दावा
जब मीडिया ने रामचंद्र राव से पूछा कि क्या वायरल वीडियो पुराना हो सकता है, तो 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी रामचंद्र राव ने कहा कि यदि पुराने वीडियो की बात की जाए, तो करीब आठ साल पहले वे बेलगावी में तैनात थे। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने फिर स्पष्ट किया कि चाहे वीडियो पुराना हो या नया, उसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है।
राव ने यह भी बताया कि वीडियो सामने आने के बाद उन्होंने गृह मंत्री से मिलने की कोशिश की, लेकिन किसी कारणवश मुलाकात नहीं हो सकी। वहीं सरकार ने साफ कर दिया है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का सख्त रुख
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पूरे प्रकरण को गंभीर बताते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा,“इस मामले की पूरी जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर उचित और सख्त कार्रवाई की जाएगी।” मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद साफ है कि सरकार इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
रान्या राव से जुड़ा पुराना विवाद
रामचंद्र राव पहले भी विवादों में रह चुके हैं। गौरतलब है कि वे अभिनेत्री रान्या राव के सौतेले पिता हैं। मार्च 2025 में रान्या राव को कर्नाटक के सबसे बड़े गोल्ड स्मगलिंग मामलों में गिरफ्तार किया गया था। दुबई से लौटते समय उनके पास से 14.8 किलो सोने की छड़ें बरामद की गई थीं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 12.56 करोड़ रुपये बताई गई थी।
इसके बाद जांच एजेंसियों ने बेंगलुरु के लवेल रोड स्थित उनके आवास पर छापेमारी की थी। इस दौरान वहां से 2.06 करोड़ रुपये के सोने-जेवरात और 2.67 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। इस मामले में जब रान्या राव के सौतेले पिता और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रामचंद्र राव की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे, तब राज्य सरकार ने उन्हें एहतियातन छुट्टी पर भेज दिया था।
हालांकि, करीब पांच महीने बाद उनकी बहाली कर दी गई थी। लेकिन अब एक बार फिर वायरल वीडियो विवाद ने उन्हें कटघरे में खड़ा कर दिया है। फिलहाल रामचंद्र राव निलंबित हैं और पूरे मामले की जांच शुरू हो चुकी है। सरकार का कहना है कि जांच निष्पक्ष होगी और किसी भी दबाव में आए बिना सच्चाई सामने लाई जाएगी। वहीं रामचंद्र राव खुद को निर्दोष बताते हुए जांच में पूरा सहयोग करने की बात कह रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ कर्नाटक पुलिस की छवि पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट की सत्यता और उसके दुरुपयोग को लेकर बहस को तेज कर दिया है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह मामला साजिश है या फिर आरोपों में कोई सच्चाई छिपी है।





