6700 एकड़ में नया कानपुर. तीन नई सिटी बदलेंगी शहर की तस्वीर
कानपुर की बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए शहर के विस्तार का बड़ा खाका तैयार किया जा रहा है। कानपुर विकास प्राधिकरण करीब 6700 एकड़ जमीन पर तीन नई सिटी विकसित करने की तैयारी में है। ग्रेटर कानपुर, न्यू कानपुर सिटी और एयरो सिटी के रूप में विकसित होने वाली इन योजनाओं में करीब 6 हजार भूखंड होंगे। ग्रुप हाउसिंग के जरिए भी बड़ी आबादी को बसाने की तैयारी है। यानी आने वाले वर्षों में कानपुर का नक्शा सिर्फ बाहर की ओर नहीं बढ़ेगा, बल्कि नई सुविधाओं के साथ एक नए शहरी ढांचे का निर्माण होगा।
6700 एकड़ में तीन नई सिटी
सबसे बड़ा प्रोजेक्ट करीब 5 हजार एकड़ में ग्रेटर कानपुर का है। इसे भीमसेन और आउटर रिंग रोड के बीच सेन पश्चिम पारा, सेन पूरब पारा, पतेहुरी, गोपालपुर, गंभीरपुर, कैथा, सरनेतपुर, दुर्जनपुर और इटारा के आसपास विकसित करने की तैयारी है। करीब 1200 एकड़ जमीन चिह्नित की जा चुकी है और भूमि अधिग्रहण की तैयारी चल रही है। यहां करीब 3500 भूखंड विकसित किए जाने हैं। इसके बाद करीब 450 एकड़ में न्यू कानपुर सिटी विकसित होगी। मैनावती मार्ग से सिंहपुर और सिंहपुर से कल्याणपुर के बीच प्रस्तावित इस योजना के लिए करीब 70 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। यहां लगभग 500 भूखंड विकसित किए जाएंगे। प्राधिकरण दीपावली के आसपास इस योजना को लॉन्च करने की तैयारी में है।
एयरो सिटी से उद्योग और रोजगार
चकेरी एयरपोर्ट के पास रूमा क्षेत्र में करीब 1251 एकड़ में एयरो सिटी विकसित की जानी है। इसके सर्वे के लिए कंपनी लगाई गई है। यहां लगभग 2 हजार भूखंड विकसित करने की योजना है। औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी जगह दी जाएगी। इसका सीधा असर रोजगार पर पड़ सकता है। एयरपोर्ट के आसपास उद्योग, कारोबार और सेवाओं का विस्तार होने से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
सिर्फ प्लॉट नहीं, पूरी आधुनिक सिटी
इन तीनों योजनाओं में सिर्फ भूखंड विकसित करने की बात नहीं है। ड्रेनेज सिस्टम, जल निकासी, पेयजल, स्कूल, कॉलेज, होटल, नर्सिंग होम और कन्वेंशन सेंटर जैसी सुविधाओं का प्रावधान किया जाएगा। करीब 6 हजार भूखंडों में लगभग 30 हजार लोगों के बसने का अनुमान है। इसके अलावा ग्रुप हाउसिंग और फ्लैटों के जरिए भी करीब 30 हजार लोगों को बसाने की योजना है। यानी इन परियोजनाओं से करीब 60 हजार लोगों के लिए नया शहरी क्षेत्र तैयार हो सकता है।
इस बार पहले मांग, फिर योजना
इस पूरी योजना की सबसे अहम बात यह है कि केडीए पुरानी गलतियों से सबक लेने की बात कर रहा है। नई योजनाएं लाने से पहले डिमांड सर्वे कराया जाएगा। यानी पहले यह समझने की कोशिश होगी कि लोगों को किस तरह के मकान, प्लॉट और व्यावसायिक संपत्तियों की जरूरत है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले बिना मांग का आकलन किए बड़ी संख्या में फ्लैट और व्यावसायिक संपत्तियां तैयार की गईं, जिनका एक बड़ा हिस्सा अब भी बिकना बाकी है।
2 हजार करोड़ रुपये फंसे
केडीए की पुरानी योजनाओं में करीब 6500 फ्लैट, होटल, मॉल और दुकानें बिकने का इंतजार कर रही हैं। बताया गया है कि इन संपत्तियों में करीब 2 हजार करोड़ रुपये की रकम फंसी हुई है। कीमतों में कमी और ई-नीलामी के प्रयासों के बावजूद पूरी तरह बिक्री नहीं हो सकी है। यही वजह है कि नई योजनाओं में मांग का आकलन पहले करने पर जोर दिया जा रहा है। सवाल सिर्फ नया शहर बसाने का नहीं, बल्कि उसे आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने का भी है।
500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल
कानपुर को नई शहरी सुविधाओं के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़ी सौगात मिलने की तैयारी है। मैकराबर्टगंज में करीब 32 हजार वर्ग मीटर जमीन पर 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल प्रस्तावित है। जमीन का भू-परिवर्तन हो चुका है और शासन से सैद्धांतिक सहमति भी मिल चुकी है। कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीपीपी मॉडल पर अस्पताल के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
नए कानपुर के सामने सबसे बड़ी चुनौती
कानपुर के विस्तार की यह योजना निश्चित तौर पर बड़े बदलाव की संभावना दिखाती है, लेकिन इसकी सफलता सिर्फ जमीन अधिग्रहण और भूखंड विकसित करने से तय नहीं होगी। नई सिटी में समय पर सड़क, पानी, सीवर, बिजली, सार्वजनिक परिवहन, स्कूल, अस्पताल और रोजगार की व्यवस्था जरूरी होगी।
सबसे बड़ा सबक पुरानी योजनाओं से ही मिलता है। अगर पहले मांग का सही आकलन नहीं हुआ तो बड़े प्रोजेक्ट में पूंजी फंस सकती है और खाली संपत्तियां शहर के विकास के बजाय आर्थिक बोझ बन सकती हैं। कुल मिलाकर 6700 एकड़ में बनने वाली ग्रेटर कानपुर, न्यू का नपुर सिटी और एयरो सिटी सिर्फ तीन नई आवासीय योजनाएं नहीं हैं। इनके जरिए कानपुर को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक विस्तार देने की तैयारी है। करीब 6 हजार भूखंड, ग्रुप हाउसिंग, औद्योगिक क्षेत्र, आधुनिक सुविधाएं और 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल इस तस्वीर को बड़ा बनाते हैं। लेकिन इस नए कानपुर की असली परीक्षा जमीन पर होगी। इस बार अगर मांग के हिसाब से योजना बनी, सुविधाएं समय पर पहुंचीं और रोजगार शहर के साथ आया, तो ये परियोजनाएं कानपुर के भविष्य की नई पहचान बन सकती हैं।





