10 किलोमीटर सड़क तैयार, अब चार पुलों के निर्माण की तैयारी। प्राकृतिक वादियां, आदिवासी गांव, होम स्टे और मशहूर दानेदार कलाकंद बन सकते हैं पर्यटन की पहचान।
इंदौर के करीब प्राकृतिक सुंदरता के बीच सप्ताहांत बिताने और जंगल में कैंपिंग का अनुभव लेने वालों के लिए कालाकुंड एक नए पर्यटन केंद्र के रूप में उभरने की तैयारी में है। इंदौर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित यह क्षेत्र अपनी पहाड़ियों, घने जंगलों, शांत आदिवासी गांवों और पारंपरिक मिठाई कलाकंद के लिए जाना जाता है। अब इसे आदर्श पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित करने की दिशा में सड़क और पुलों जैसी बुनियादी सुविधाओं पर काम किया जा रहा है।
जंगल की खूबसूरती बरकरार, पर्यटन को मिलेगा रास्ता
कालाकुंड की सबसे बड़ी विशेषता यहां का प्राकृतिक परिवेश है। विंध्याचल पर्वत श्रेणी की पहाड़ियों के बीच बसे सात से अधिक आदिवासी गांवों में 20 से ज्यादा होम स्टे संचालित हैं। यहां आने वाले पर्यटक ग्रामीण जीवन, स्थानीय संस्कृति और प्रकृति के करीब समय बिताने का अनुभव लेते हैं।
मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण ने वन संपदा और औषधीय पौधों से समृद्ध जंगल को बचाते हुए करीब 10 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा किया है। वर्ष 2024 में सड़क का काम पूरा होने के बाद अब इस क्षेत्र तक पहुंच आसान बनाने के लिए नदी पर पुलों की जरूरत प्रमुख मुद्दा बनी हुई है।
चार पुल बनेंगे पर्यटन और ग्रामीण संपर्क की नई कड़ी
कालाकुंड क्षेत्र में बारिश के दौरान पहाड़ी नदियां और चोरल नदी का जलस्तर आवागमन में बाधा बनता है। कई बार रास्ते अवरुद्ध होने से पर्यटकों के साथ स्थानीय ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। निजी दोपहिया और चारपहिया वाहनों से आने वाले पर्यटकों के लिए भी बारिश के मौसम में पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
इसी समस्या के समाधान के लिए चार पुलों के निर्माण की निविदा प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी दी गई है। विभाग के महाप्रबंधक लोकेंद्र मंडलोई के मुताबिक, इसी वर्ष निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है। 30 मई को कलेक्टर शिवम वर्मा की रात्रि चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने पुल निर्माण की मांग प्रमुखता से उठाई थी।
पुल बनने से पहाड़ियों में बसे आठ गांवों के लोगों को स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल, आंगनवाड़ी और राशन दुकानों तक पहुंचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। बारिश में शहर से संपर्क बाधित होने की समस्या कम हो सकती है। यानी यह निर्माण केवल पर्यटन के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
हेरिटेज ट्रेन के साथ सड़क मार्ग से भी पहुंचेंगे पर्यटक
कालाकुंड क्षेत्र में पातालपानी से चलने वाली हेरिटेज ट्रेन पर्यटकों के आकर्षण का एक माध्यम है। सड़क संपर्क बेहतर होने और पुल बनने के बाद निजी वाहनों से आने वाले लोगों के लिए भी विकल्प बढ़ सकते हैं। इससे सप्ताहांत पर्यटन, प्रकृति भ्रमण और जंगल कैंपिंग जैसी गतिविधियों को विस्तार मिलने की संभावना है।
यहां बना संभागीय स्काउट-गाइड कैंपिंग केंद्र भी पर्यटन और शिविर गतिविधियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, जंगल में कैंपिंग बढ़ाने के साथ वन संरक्षण, सुरक्षा, स्वच्छता और पर्यटकों की आवाजाही के नियमन पर ध्यान देना जरूरी होगा।
दानेदार कलाकंद बनेगा स्थानीय पहचान
कालाकुंड की पहचान यहां बनने वाले पारंपरिक कलाकंद से भी जुड़ी है। गांव के पशुपालक गाय और भैंस के दूध से कम शक्कर वाली दानेदार मिठाई तैयार करते हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाला यह कलाकंद पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बन सकता है।
यदि पर्यटन सुविधाओं के साथ स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा दिया जाता है, तो ग्रामीण परिवारों को होम स्टे, स्थानीय भोजन और पारंपरिक मिठाई की बिक्री से अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं।
अब विकास के साथ संरक्षण की चुनौती
कालाकुंड को पर्यटन ग्राम बनाने की योजना में सड़क, पुल, होम स्टे और कैंपिंग सुविधाएं अहम भूमिका निभा सकती हैं। लेकिन वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि पर्यटन बढ़ने के साथ जंगल, औषधीय पौधों और स्थानीय संस्कृति को कितना सुरक्षित रखा जाता है। स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी और उनके लिए रोजगार के अवसर भी इस विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे।
कुल मिलाकर, कालाकुंड इंदौर के आसपास प्रकृति आधारित पर्यटन का नया केंद्र बनने की संभावनाएं रखता है। करीब 10 किलोमीटर सड़क तैयार होने के बाद अब चार पुलों के निर्माण पर नजर है। यदि संपर्क सुविधाएं बेहतर होती हैं और पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन विकसित किया जाता है, तो कालाकुंड सप्ताहांत की सैर, जंगल कैंपिंग और ग्रामीण अनुभव के लिए आकर्षक गंतव्य बन सकता है।