Saturday, March 7, 2026
  • Contact
India News
  • मुख्य समाचार
  • राजनीति
  • संपादक की पसंद
  • शहर और राज्य
    • उत्तर प्रदेश
      • आगरा
      • कानपुर
      • लखनऊ
      • मेरठ
    • छत्तीसगढ
      • जगदलपुर
      • बिलासपुर
      • भिलाई
      • रायपुर
    • दिल्ली
    • बिहार
      • पटना
    • मध्य प्रदेश
      • इंदौर
      • ग्वालियर
      • जबलपुर
      • भोपाल
    • महाराष्ट्र
      • नागपुर
      • नासिको
      • पुणे
      • मुंबई
    • राजस्थान
      • अजमेर
      • कोटा
      • जयपुर
      • जैसलमेर
      • जोधपुर
  • स्टार्टअप
  • कृषि
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • धर्म
  • ऑटो
  • सरकारी नौकरी
  • वीडियो
No Result
View All Result
India News
Home शहर और राज्य दिल्ली

जेपीसी बनाई…सरकार गंवाई…जानें क्या है जेपीसी से जुड़ा अपशगुन….हिंडनबर्ग को लेकर जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के गठन से क्यों कतरा रही सरकार…!

DigitalDesk by DigitalDesk
August 14, 2024
in दिल्ली, मुख्य समाचार, राजनीति, संपादक की पसंद
0
Hindenburg Joint Parliamentary Committee JPC Lok Sabha Rajya Sabha MP Demand
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterWhatsapp

जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी जेपीसी का गठन लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को मिलाकर किया जाता है। मामले में जांच के सभी अधिकार जेपीसी के पास होते हैं। देश में 37 साल में पांच बार जेपीसी का किया गया गठन। घोटालों की जांच को लेकर पांच बार बनी जेपीसी,पांचों बार चली गई कमेटी बनाने वाली सरकार।…जानें क्या है जेपीसी से जुड़ा अपशगुन… हिंडनबर्ग और अडाणी को लेकर जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के गठन से क्यों कतरा रही एनडीए सरकार…!

  • विपक्ष की मांग जेपीसी को सौंपे हिंडनबर्ग मामला
  • जेपीसी से क्यों नहीं कराना चाहती है जांच
  • बिल पर तो हो जाता है जेपीसी का गठन
  • स्कैम पर क्यों नहीं बनाई जेपीसी कमेटी
  • हिंडनबर्ग को लेकर जेपीसी जांच की मांग दरकिनार
  • क्या जेपीसी से जुड़े अपशकुन से डरती हैं सरकारें?
  • 37 साल में पांच बार ​गठित की गई जेपीसी
  • जेपीसी बनाने के बाद चली गईं सरकारें

केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने वक्फ विधेयक 2024 पर हल्ला हुआ तो उसे जेपीसी में भेज दिया, लेकिन भ्र्ष्टाचार से जुड़ा साल 2022 से ही हिंडनबर्ग और अडानी को लेकर हो रही जेपीसी की मांग को नहीं मान रही है। वैसे 2014 के बाद सत्ता में आने वाली एनडीए की सरकार में इस तरह के कई और मामले भी देखे गए। जिसमें भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को लेकर जेपीसी के हवाले करने में हिलाहवाली की गई। नागरिकता संशोधन जैसे बिल एनडीए सरकार ने तत्काल जेपीसी में भेज दिया, लेकिन सरकार ने जेपीसी से राफेल की जांच कराने से साफ मना कर दिया। इतना ही नहीं डाटा प्रोटेक्शन जैसे कई बिल केन्द्र सरकार ने जेपीसी में भेजे, लेकिन स्कैम की मांग नहीं मानी।

Related posts

Jan Aushadhi Day 2026: सस्ती दवाइयों से करोड़ों लोगों को राहत, 12 साल में 80 से बढ़कर 18,000 तक पहुंचे जन औषधि केंद्र

Jan Aushadhi Day 2026: सस्ती दवाइयों से करोड़ों लोगों को राहत, 12 साल में 80 से बढ़कर 18,000 तक पहुंचे जन औषधि केंद्र

March 7, 2026
Gold-Silver Price Today: हफ्ते के आखिरी दिन सोना-चांदी में तेज उछाल, MCX और ग्लोबल मार्केट दोनों में चमके भाव

Gold Price Outlook: सोना-चांदी में बड़ी गिरावट: 5 दिन में सोना ₹4,440 टूटा, चांदी भी लुढ़की

March 7, 2026

चर्चा है कि एक अपशकुन को इसके पीछे की जवह बताया जाता है। कहा जाता है कि जब-जब देश में किसी भी घोटाले भ्रष्टाचार लेकर जांच जेपीसी के हवाल की, तब-तब उस समय तो सरकार को क्लीन चिट मिली, लेकिन आखिर में वो सरकार ही नहीं रही।

अब तक 4 बार गठित हुई जेपीसी

1987 में बोफोर्स घोटाले का मामला सुर्खियों में आया था। स्वीडन की एक कंपनी बोफोर्स ने भारतीय सेना को हथियार सप्लाई किये थे। जिस पर स्वीडन के ही एक रेडियो ने गंभीर आरोप लगाये थे। आरोप यह था कि बोफोर्स डील के बदले कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेताओं को रुपये दिये गये हैं। इटेलियन बिचौलिए क्वात्रोकि के जरिए यह रुपए मिले। बोफोर्स घोटाला के केन्द्र में राजीव गांधी ही थे।इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने संसद से सड़क तक हंगामा किया। हंगामें के बाद आखिरकार राजीव गांधी की सरकार ने इसे लेकर जेपीसी के गठन की घोषणा की।

बी शंकरानंद की अध्यक्षता वाली जेपीसी में जांच हुए लेकिर बोफोर्स घोटाले में राजीव गांधी को क्लीन चिट मिल गई। हालांकि विपक्ष दलों ने इस कमेटी पर जांच में धांधली का आरोप लगाया। घोटाले के सामने आने के दो साल बाद साल 1998 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला। उस समय वीपी सिंह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय मोर्चा सरकार अस्तित्व में आई।

इसके बाद 1992 में हर्षद मेहता शेयर घोटाले ने नरसिम्हा राव सरकार को परेशान किया। शेयर घोटाला में कई आला नेताओं के नाम सामने आए थे। आखिरकार मामले में बहुत किरकिरी होने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने इसे लेकर जेपीसी गठित की। कांग्रेस सांसद रामनिवास मिर्धा की अध्यक्षता जेपीसी का गठन किया गया। रामनिवास मिर्धा की रिपोर्ट में तब नरसिम्हा राव सरकार को क्लीन चिट मिल गई थी। हालांकि नरसिम्हा राव सरकार का हर्षद मेहता और जैन हवाला कांड ने पीछा नहीं छोड़ा। इसके बाद साल 1996 में चुनाव हुए तो कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला और नरसिम्हा राव को पीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। सियासी गलियाारों में उस समय भी चर्चा जमकर हुई कि जेपीसी जांच सरकार के लिए अपशकुन ही साबित हुई है।

हर्षद मेहता स्कैम की ही तरह साल 2001 में केतन पारेख घोटाला भी सामने आया था। उस समय केंद्र में बीजेपी की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर जेपीसी बनाने का दबाव भारी पड़ा तो उन्होंने केतन पारेख घोटाले की जांच को लेकर जेपीसी के गठन की घोषणा कर दी। अटल सरकार ने बीजेपी सांसद प्रकाश मणि त्रिपाठी को जांच कमेटी का अध्यक्ष बनाया। स्वभाविक था पहले की सरकारों की तरह त्रिपाठी कमेटी ने भी जांच-पड़ताल के बाद तत्कालीन अटल सरकार को क्लीन चिट दे दी।

इसके दो साल बाद अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने एक और मामले में जांच के लिए जेपीसी बैठाई। यह मामला पेय-पदार्थ के नियामक बनाने को लेकर केन्द्र सरकार की भूमिका को लेकर था। जेपीसी की अध्यक्षता शरद पवार को सौंपी गई। तब पवार कमेटी की ओर से जांच के बाद केंद्र सरकार को तो क्लीन चिट दे दी। लेकिन कमेटी ने पेय-पदार्थ बनाने वाली कंपनियों के लिए गाइडलाइंस तय करने की सिफारिश कर दी। दोनों मामलों में जेपीसी के गठन के एक साल बाद साल 2004 में हुए आम चुनाव में वाजपेयी सरकार सत्ता से बाहर हो गई। तब भी जेपीसी वाला अपशकुन ही साबित हुआ।

मनमोहन सरकार में भी निकला JPC का जिन्न

साल 2000 से 2010 में एक बार फिर से जेपीसी का जिन्न हंगामे के साथ बाहर निकला। इस बार 2जी स्पैक्ट्रम घोटालों को लेकर जांच की मांग थी। संचार मंत्रालय पर 2जी स्पैक्ट्रम आवंटन में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे। इसके बदले सरकार को रिश्वत मिलने का भी आरोप विपक्ष ने लगाया और इसे बड़ा मुद्दा बना लिया। इसे लेकर तत्कालीन मनमोहन सरकार की घेराबंदी की गई। दरअसल केस में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ केन्द्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम का नाम जोड़ा जा रहा था। ऐसे में किरकिरी होते देख केन्द्र की मनमोहन सरकार ने जेपीसी गठित कर दी। कांग्रेस सांसद के पीसी चाको को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। पीसी चाको की अध्यक्षता वाली इस जेपीसी ने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह और तत्कालीन केन्द्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम को क्लीन चिट दे दी। हालांकि क्लीन चिट मिली फिर भी जेपीसी की यह कमेटी तत्कालीन मनमोहन सरकार के लिए अनशगुन ही साबित हुई और 2014 में कांग्रेस की मनमोहन सिंह की सरकार आमचुनाव में धराशाही हो गई।

Post Views: 146
Tags: #Demand for Hindenburg jpc#Joint Parliamentary Committee#JPC Lok Sabha Rajya Sabha MP
LIVE India News

लाइव इंडिया न्यूज 2016 से आप तक खबरें पंहुचा रहा है। लाइव इंडिया वेबसाइट का मकसद ब्रेकिंग, नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, बिजनेस और अर्थतंत्र से जुड़े हर अपडेट्स सही समय पर देना है। देश के हिंदी भाषी राज्यों से रोजमर्रा की खबरों से लेकर राजनीति नेशनल व इंटरनेशनल मुद्दों से जुडी खबरें और उनके पीछे छुपे सवालों को बेधड़क सामने लाना, देश-विदेश के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों का विश्लेषण बेबाकी से करना हमारा मकसद है।

Vihan Limelite Event & Entertainment Pvt Ltd
Regd Office Flat No 1
Mig 3 E 6
Arera Colony Bhopal

Branch Office
Main Road. Tikraparaa
Raipur CG

Director Deepti Chaurasia
Mobile No 7725016291

Email id - liveindianewsandviews@gmail.com

Currently Playing

West Bengal: ममता का ‘चुनावी मास्टरस्ट्रोक’, आचार संहिता से पहले दो बड़ी योजनाओं का एलान, आज से ही बंगाल में लागू

West Bengal: ममता का ‘चुनावी मास्टरस्ट्रोक’, आचार संहिता से पहले दो बड़ी योजनाओं का एलान, आज से ही बंगाल में लागू

West Bengal: ममता का ‘चुनावी मास्टरस्ट्रोक’, आचार संहिता से पहले दो बड़ी योजनाओं का एलान, आज से ही बंगाल में लागू

मुख्य समाचार
T20 World Cup : इंग्लैंड को हराकर भारत फाइनल में, धोनी-साक्षी का मजेदार रिएक्शन वायरल

T20 World Cup : इंग्लैंड को हराकर भारत फाइनल में, धोनी-साक्षी का मजेदार रिएक्शन वायरल

मनोरंजन
बिहार में बड़ा सियासी बदलाव? राज्यसभा में Nitish Kumar, नए CM को लेकर तेज हुई चर्चा

बिहार में बड़ा सियासी बदलाव? राज्यसभा में Nitish Kumar, नए CM को लेकर तेज हुई चर्चा

बिहार

RSS Unknown Feed

  • Contact

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

No Result
View All Result
  • Home
  • मुख्य समाचार
  • शहर और राज्य
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • संपादक की पसंद
  • मनोरंजन
  • स्टार्टअप
  • धर्म
  • कृषि

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

Go to mobile version