संसदीय समिति की सरकार और कॉलेजियम को सलाह, लीक से हटकर सोचें तो होगी न्यायाधीशों की नियुक्ति

पैनल ने कार्यपालिका और न्यायपालिका को दिखाया आईना

जजों की नियुक्ति को लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के बीच टकराव पर संसदीय समिति की बड़ी टिप्पणी आई है। हाईकोर्ट में खाली पदों को लेकर समिति ने कार्यपालिका और न्यायपालिका से कहा है कि वे इस स्थाई समस्या से निपटने के लिए लीक से हटकर विचार करें, तभी समस्या का समाधान निकल सकता है।

कानून और कार्मिक पर विभाग से संबंधित स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वह न्याय विभाग की टिप्पणियों से सहमत नहीं है कि हाई कोर्ट में जजों की रिक्तियों को भरने के लिए समय का संकेत नहीं दिया जा सकता है।

न्यायाधीशों के खाली पद चिंता का विषय

समिति ने कहा कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर, 2021 तक तेलंगाना, पटना और दिल्ली के तीन हाई कोर्ट थे, जहां 50 प्रतिशत से ज्यादा पद खाली थे और 10 हाई कोर्ट में 40 प्रतिशत से ज्यादा सीटें खाली थीं। पैनल ने कहा- ये सभी बड़े राज्य हैं, जहां जजों और जनसंख्या का अनुपात पहले से ही कम है और इस तरह खाली पद होना गहरी चिंता का विषय हैं। बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी इस समिति के अध्यक्ष थे।

25 हाई कोर्ट में सिर्फ 778 जज कर रहे हैं काम

बता दें कि देश में कुल 25 हाई कोर्ट हैं। पांच दिसंबर तक हाई कोर्ट में जरूरी 1,108 जजों के बदले केवल 778 जज ही काम कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक विगत 25 नवंबर को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम से हाई कोर्ट में नियुक्त किए जाने वाले जजों के संबंध में बीस फाइलों पर पुनर्विचार करने को कहा था। इन बीस मामलों में से 11 एकदम नए थे, जबकि नौ वह मामले थे जिन्हें सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने दोबारा लौटाया था। केंद्र सरकार ने विभिन्न हाईकोर्ट के सभी नए नामों पर अपनी आपत्ति दर्ज करते हुए लौटा दिया है।

रिटायर जज की हाईकोर्ट में नियुक्ति पर सहमति नहीं

सेवानिवत्त न्यायाधीशों को हाईकोर्ट में तदर्थ जज के तौर पर नियुक्त करने पर भी सहमति नहीं बनी है। कानून मंत्रालय के मुताबिक इसमें काफी सारी जटिलताएं हैं, जिनकी वजह से इसे पूरा नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को ऐसी सलाह दी थी। यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद224-ए के तहत की जाती है।

Exit mobile version