ग्लोबल इकोनॉमी स्पेशल रिपोर्ट….‘ये अमेरिकी इतिहास का सबसे मूर्खतापूर्ण कदम…’ टॉप इकोनॉमिस्ट बोले – ट्रंप टैरिफ ने खुद BRICS को जीत दिलाई

Jeffrey Sachs a renowned economist at Columbia University called it the most foolish move in the history of American foreign policy

ग्लोबल इकोनॉमी स्पेशल रिपोर्ट….‘ये अमेरिकी इतिहास का सबसे मूर्खतापूर्ण कदम…’
टॉप इकोनॉमिस्ट बोले – ट्रंप टैरिफ ने खुद BRICS को जीत दिलाई

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ ने न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है बल्कि अमेरिकी विदेश नीति पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जेफरी सैश ने इस फैसले को “अमेरिकी विदेश नीति के इतिहास का सबसे मूर्खतापूर्ण कदम” बताया है। उनका कहना है कि इस निर्णय ने ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) को एक नई ताकत और अभूतपूर्व एकजुटता प्रदान की है।

भारत पर डबल टैरिफ का असर

ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारत से आने वाले कई उत्पादों पर 50% का टैरिफ लगा दिया था। इसके अलावा, रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ भी लगाया गया। इन दोनों फैसलों ने भारत-अमेरिका रिश्तों में खटास डाल दी है।

जेफरी सैश का मानना है कि ट्रंप ने जिस तरह से भारत पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश की, उससे उल्टा असर हुआ है। भारत ने न केवल इस दबाव को झेला बल्कि BRICS के भीतर समन्वय और भी मजबूत हो गया। उन्होंने कहा –
“डोनाल्ड ट्रंप ने खुद अपने हाथों से BRICS को जीत दिलाने का काम किया है। जिस तरह से भारत को निशाना बनाया गया, उसने उसे और मजबूती से रूस और चीन के साथ खड़ा कर दिया है।”

भारतीयों ने लिया सबक

जेफरी सैश ने चेतावनी दी है कि ट्रंप के इस कदम से भारत का अमेरिका पर भरोसा डगमगा गया है। उन्होंने कहा –“भारत एक ऐसा देश है जिसे अमेरिका दशकों से बढ़ावा दे रहा था, लेकिन इस तरह अचानक टैरिफ अटैक करने से भरोसे की नींव कमजोर हुई है। अब चाहे टैरिफ हटा भी दिए जाएं, भारतीयों ने यह सबक सीख लिया है कि अमेरिका पर आंख बंद कर भरोसा नहीं किया जा सकता।”
यह बयान भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश का विश्वास खोना अमेरिका के लिए लंबी अवधि में नुकसानदेह हो सकता है।

लिंडसे ग्राहम सबसे खराब सीनेटर

ट्रंप प्रशासन की नीति पर सवाल उठाते हुए जेफरी सैश ने अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने उन्हें “अमेरिकी सीनेट का सबसे खराब सीनेटर” करार दिया। दरअसल, ग्राहम ने हाल ही में रूस से भारत की तेल खरीद पर सवाल उठाते हुए कहा था कि भारत केवल मुनाफाखोरी कर रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अलास्का में हाल ही में हुई ट्रंप–पुतिन मुलाकात का कारण भारत पर टैरिफ दबाव बनाना था। सैश के मुताबिक, ग्राहम के ऐसे बयान अमेरिका की साख और भी कमजोर कर रहे हैं।

अमेरिकी राजनयिक की चेतावनी

केवल अर्थशास्त्री ही नहीं, बल्कि पूर्व अमेरिकी राजनयिक भी ट्रंप के फैसले से असहमत हैं। पूर्व अमेरिकी राजदूत जेफ्री पायट ने कहा कि चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति भारत जैसे भरोसेमंद सहयोगी के बिना संभव ही नहीं है।

उन्होंने चेताया – “भारत पर 50% टैरिफ लगाने से द्विपक्षीय विश्वास पर गहरा असर पड़ा है। यह कदम उस साझेदारी की नींव को हिला रहा है जिस पर अमेरिका और भारत दशकों से काम कर रहे हैं।” पायट के अनुसार, अगर अमेरिका भारत को अपने साथ बनाए रखना चाहता है, तो उसे जल्द ही इन गलतियों को सुधारना होगा।

BRICS को मिला बड़ा फायदा

ट्रंप के टैरिफ अटैक ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संतुलन को भी प्रभावित किया है। जहां एक तरफ अमेरिका भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत BRICS समूह के भीतर और ज्यादा सक्रिय होता जा रहा है। रूस के साथ तेल व्यापार में भारत का सहयोग और बढ़ा है। चीन के साथ क्षेत्रीय समन्वय मजबूत हुआ है। ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका भी भारत के समर्थन में खुलकर सामने आ रहे हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि BRICS अब पहले से कहीं ज्यादा सशक्त और एकजुट दिख रहा है। इसका श्रेय अनजाने में डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को जाता है।

अमेरिकी रणनीति पर सवाल

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की मौजूदा विदेश और आर्थिक नीतियां कहीं न कहीं उसके दीर्घकालिक हितों के खिलाफ काम कर रही हैं। चीन को रोकने की रणनीति भारत के बिना अधूरी है। भारत जैसे देश पर दबाव बनाना उलटा पड़ सकता है। टैरिफ युद्ध से अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ रहा है। जेफरी सैश का कहना है कि अगर अमेरिका ने अपनी रणनीति में सुधार नहीं किया तो आने वाले समय में BRICS न केवल आर्थिक बल्कि भू-राजनीतिक स्तर पर भी अमेरिका को चुनौती देगा।
डोनाल्ड ट्रंप का भारत पर 50% टैरिफ लगाने का फैसला अमेरिकी इतिहास में एक बड़ी भूल साबित हो रहा है। इससे न केवल भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव बढ़ा है, बल्कि BRICS को नई ऊर्जा और मजबूती मिली है। जहां एक तरफ अमेरिकी विशेषज्ञ इसे “सबसे मूर्खतापूर्ण कदम” बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत ने इस घटना से सबक लेकर अपनी कूटनीति और आर्थिक साझेदारी को और संतुलित करने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। सवाल यह है कि क्या अमेरिका अब भी अपनी गलतियों से सबक लेगा या फिर अपनी ही नीतियों से वैश्विक संतुलन खो देगा? (प्रकाश कुमार पांडेय)

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