JDU ने लालू को बताया रावण… AI वीडियो से दशहरा पर चुनाव राज्य बिहार में गरमाई सियासत
दशहरा पर राजनीतिक रंग
देशभर में विजयादशमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। रावण दहन के मंच सजाए गए और अच्छाई की जीत के नारे लगे। लेकिन बिहार में इस पर्व का रंग सियासी मुकाबले में बदल गया। जदयू ने सोशल मीडिया पर एक AI-जनरेटेड वीडियो जारी कर राजनीति में हलचल मचा दी। वीडियो में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को रावण के रूप में दिखाया गया।
- जदयू का एआई वीडियो विवाद
- लालू यादव को बताया रावण
- अपराध-भ्रष्टाचार के दस सिर
- जनता के रूप में रामधनुष
- भाजपा ने तेजस्वी पर निशाना
वीडियो में लालू का चेहरा हंसते हुए दिखाई देता है, गले में राजद की पहचान वाली लालटेन का लॉकेट लटक रहा है और उनके दस सिर बनाए गए हैं। इन सिरों पर ‘भ्रष्टाचार, जातीय हिंसा, लूट, रंगदारी, अपहरण और अपराध’ जैसे शब्द लिखे गए हैं।
वीडियो में रावण दहन दृश्य
वीडियो में एक युवक को बिहार की जनता का प्रतीक बताया गया है। युवक धनुष-बाण से लालू-रावण पर वार करता है और उसे ध्वस्त कर देता है। इसके बाद स्क्रीन पर संदेश उभरता है—
“बुराई हमेशा हारती है और बिहार की जनता की जीत होगी।”
जदयू ने इसे विजयादशमी पर जनता को संदेश देने का तरीका बताया। पार्टी का कहना है कि बिहार में भ्रष्टाचार और अपराध का युग खत्म हो चुका है, अब जनता रामराज की राह पर है।
बीजेपी ने भी किया हमला
जदयू के इस वीडियो के बाद भाजपा भी पीछे नहीं रही। भाजपा नेताओं ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए उन्हें रावण रूप में पेश कर दिया। सोशल मीडिया पर तेजस्वी की तस्वीर को रावण के रूप में साझा कर भाजपा ने कहा कि “राजद का अतीत और वर्तमान दोनों ही बुराई का प्रतीक हैं।”
भाजपा नेता कुंदन कृष्ण ने कहा कि लालू राज में बिहार आतंक और भय का पर्याय बन चुका था। अपहरण, बलात्कार और लूट की घटनाएं आम थीं। जनता डर के साये में जीती थी। उनका दावा है कि जनता ने उसी बुराई का अंत कर रामराज की स्थापना की थी और यह व्यवस्था आगे भी कायम रहेगी।
विपक्ष में आक्रोश
राजद नेताओं ने जदयू और भाजपा पर अभद्र राजनीति करने का आरोप लगाया है। राजद का कहना है कि दुर्गा पूजा और दशहरा जैसे धार्मिक पर्वों को राजनीति से जोड़ना बेहद शर्मनाक है। पार्टी का तर्क है कि सत्ताधारी दल जनता की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं। तेजस्वी यादव ने भी पलटवार करते हुए कहा कि “जनता असली रावण को पहचानती है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को बर्बाद करने वाले ही असली खलनायक हैं।”
सियासी संदेश या प्रचार हथकंडा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजयादशमी के दिन रावण का दहन एक प्रतीकात्मक धार्मिक अनुष्ठान होता है। लेकिन जदयू और भाजपा ने इसे चुनावी प्रचार में तब्दील कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वीडियो के जरिए जनता के बीच यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि लालू और उनका परिवार अब भी अपराध और भ्रष्टाचार की पहचान हैं। वहीं, विपक्ष इसे जनता का ध्यान भटकाने वाला मुद्दा बता रहा है। राजद का कहना है कि महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए सत्ताधारी दल ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं।
लालू बनाम रावण तुलना पर बवाल
लालू यादव की छवि रावण से जोड़ना बिहार की सियासत को गरमा रहा है। समर्थकों का कहना है कि यह राजनीतिक स्तर पर हमला है, जबकि विरोधियों का दावा है कि यह जनता के दर्द को शब्दों में ढालने का तरीका है। दशहरा पर जहां देशभर में अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया, वहीं बिहार में इसे राजनीति की जंग का हथियार बना दिया गया। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद चुनावी माहौल को कितना प्रभावित करता है। (प्रकाश कुमार पांडेय )





