दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से जारी छात्रों का आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने घोषणा की कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद प्रमुख मांगों पर सहमति बन गई है। इसके बाद संगठन ने अपने समर्थकों और आंदोलन में शामिल छात्रों से शांतिपूर्वक अपने घर लौटने की अपील की। आंदोलन की समाप्ति का ऐलान संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया गया, जहां संगठन के नेताओं ने सरकार के साथ हुई बातचीत की जानकारी साझा की।
सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त करने का लिया गया फैसला
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार ने संगठन की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है। इसी के आधार पर धरना समाप्त करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल सभी छात्रों और समर्थकों से अपील की कि अब आंदोलन खत्म हो चुका है और सभी लोग शांतिपूर्वक अपने-अपने घर लौट जाएं। संगठन का कहना है कि बातचीत के जरिए समाधान निकालने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेताओं ने समझौते के अहम बिंदुओं की दी जानकारी
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि सरकार के साथ हुई चर्चा में कई मुद्दों पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि मंगलवार तक लिखित आश्वासन मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, ₹1 करोड़ के मुआवजे से जुड़े प्रस्ताव पर भी सहमति बनी है। परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार (ब्रॉड रिफॉर्म) को लेकर सरकार और संगठन भविष्य में मिलकर काम करने पर भी सहमत हुए हैं।
छात्रों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर सरकार ने दिए महत्वपूर्ण आश्वासन
संगठन ने बताया कि सरकार को उनका विस्तृत मांग-पत्र सौंप दिया गया है। सीजेपी नेताओं के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत से ही उनका उद्देश्य छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों का समाधान कराना था। उनका कहना है कि सरकार द्वारा प्रमुख मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद अब आंदोलन जारी रखने की आवश्यकता नहीं रह गई है।
जेपी नड्डा ने छात्रों पर कार्रवाई नहीं होने का दिया भरोसा
सीजेपी नेताओं ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ हुई तीसरे दौर की बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान लिखित मसौदा भी साझा किया गया। संगठन के मुताबिक, सरकार ने यह भरोसा दिया है कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई नई कार्रवाई नहीं की जाएगी। यदि किसी छात्र के खिलाफ पहले से एफआईआर दर्ज हुई है, तो उसे वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। साथ ही भविष्य में भी इस मामले में किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाने का आश्वासन दिया गया है।