जन्माष्टमी पर थरूर की सीख: भगवान कृष्ण से क्या सीखें नेता? दिग्विजय ने कसा तंज- क्या मोदी-शाह मानेंगे?
शशि थरूर ने कृष्ण जन्माष्टमी पर नेताओं को दी सलाह, दिग्विजय सिंह ने पोस्ट की सराहना की लेकिन साथ ही प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को लेकर उठाए सवाल स्वतंत्रता दिवस के एक दिन बाद यानी 16 अगस्त को देशभर में जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने भारतीय राजनीति और नेताओं को भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं से प्रेरणा लेने की सलाह दी। थरूर ने अपने संदेश में गीता और महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के नेताओं को कृष्ण के जीवन और उनके उपदेशों से सीख लेकर जनता के हित में कार्य करना चाहिए।
हालांकि थरूर की इस पोस्ट पर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने उन्हें बधाई तो दी लेकिन साथ ही एक तंज भी कस दिया। दिग्विजय ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह श्रीकृष्ण की इन शिक्षाओं का पालन करेंगे?
थरूर का संदेश…नेताओं को कृष्ण से सीखना चाहिए जीवन का धर्म
शशि थरूर ने अपने संदेश में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल धार्मिक कथाओं तक सीमित नहीं है बल्कि उसमें गहन राजनीतिक, कूटनीतिक और नेतृत्व संबंधी शिक्षाएं भी छिपी हैं। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति सार्वजनिक जीवन और खासकर राजनीति से जुड़ा है, उसे कृष्ण के उपदेशों को आत्मसात करना चाहिए।
धर्म सर्वोपरि— थरुर
थरूर ने लिखा कि भगवान कृष्ण ने हमेशा धर्म की रक्षा को सर्वोपरि माना। उन्होंने कई ऐसे कार्य किए जो आमजन को जटिल या अस्पष्ट लग सकते हैं, लेकिन उनका अंतिम उद्देश्य हमेशा धर्म की स्थापना और अधर्म का नाश करना ही था। उन्होंने नेताओं को सलाह दी कि वे निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर देश और जनता के हित में निर्णय लें। राजनीति में केवल पद या प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि समाज के कल्याण के लिए काम करना ही असली धर्म है।
कूटनीतिक और राजनीतिक सोच की कला
कांग्रेस सांसद ने कहा कि कृष्ण एक श्रेष्ठ रणनीतिकार और कूटनीतिज्ञ थे। महाभारत युद्ध से पहले उन्होंने शांति की पहल की, परंतु जब दुर्योधन ने उनकी बात नहीं मानी तो उन्होंने पांडवों को जीत दिलाने के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन दिया। थरूर ने कहा कि इसी प्रकार नेताओं को भी समझना चाहिए कि राजनीतिक जीवन में कूटनीति और दीर्घकालिक सोच कितनी महत्वपूर्ण है। विपक्षियों के साथ संवाद, गठबंधन और योजनाओं का निर्माण एक नेता की असली ताकत है।
सशक्त नेतृत्व का महत्व
थरूर ने कहा कि कृष्ण स्वयं युद्ध में हथियार नहीं उठाते, बल्कि अर्जुन के सारथी बनकर उन्हें मार्गदर्शन देते हैं। यही एक सच्चे नेता की पहचान है—जो स्वयं सुर्खियों में रहने की बजाय अपनी टीम को सक्षम बनाकर सफलता की राह दिखाता है। उन्होंने नेताओं से आग्रह किया कि वे अपनी टीम और कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाएं। नेतृत्व का मतलब केवल सामने रहना नहीं, बल्कि सही दिशा दिखाना और कठिन समय में मार्गदर्शक बनना है।
निष्काम कर्म का दर्शन
थरूर ने भगवद् गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि कृष्ण ने कर्म को प्रधान बताया है। अर्जुन को उन्होंने समझाया था कि व्यक्ति को केवल अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए, फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। इसी तरह नेताओं को भी सत्ता, प्रसिद्धि और धन की लालसा छोड़कर निष्काम भाव से जनता की सेवा करनी चाहिए। थरूर के अनुसार यही भाव नेताओं को सही और न्यायपूर्ण निर्णय लेने में मदद करेगा।
मानव स्वभाव की गहरी समझ
थरूर ने कहा कि कृष्ण को मानव स्वभाव का गहरा ज्ञान था। उन्होंने दुर्योधन जैसे अहंकारी शासक से भी बात की और युधिष्ठिर जैसे धर्मात्मा को भी मार्गदर्शन दिया। एक अच्छा नेता वही है जो इंसानों की सोच और भावनाओं को समझे। नेताओं को एक अच्छा श्रोता होना चाहिए, ताकि वे अपनी टीम और जनता दोनों को जोड़ सकें।
लोकसंग्रह और समाज कल्याण
थरूर ने बताया कि कृष्ण ने चाहे ग्वाले का जीवन जिया हो या राजा का, उन्होंने हर भूमिका में समाज के कल्याण को प्राथमिकता दी। उन्होंने नेताओं को याद दिलाया कि राजनीति का असली उद्देश्य सामाजिक न्याय और समतामूलक समाज की स्थापना होना चाहिए। केवल समर्थकों के लिए नहीं, बल्कि सभी वर्गों के कल्याण के लिए काम करना ही नेता का असली धर्म है।
अहंकार और अधर्म से बचाव
थरूर ने कहा कि महाभारत की कहानी यह सिखाती है कि अहंकार और अधर्म का अंत विनाश में होता है। दुर्योधन और उसके सहयोगियों का यही हश्र हुआ। उन्होंने नेताओं से कहा कि उन्हें विनम्र रहना चाहिए और सत्ता का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। अहंकार और अन्याय से कोई भी नेता लंबे समय तक टिक नहीं सकता।
भगवान नहीं बन सकते, अनुकरण करना सीखें”
अपने संदेश के अंत में थरूर ने लिखा, “हम सभी श्रीकृष्ण नहीं बन सकते, लेकिन हम उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सही दिशा में चल सकते हैं। हमें रणनीतिक सोच, निष्काम सेवा, सामाजिक न्याय और सच्चे नेतृत्व को प्राथमिकता देनी चाहिए।”