देशभर में मनाए जा रहे Jan Aushadhi Diwas के मौके पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने Pradhan Mantri Bhartiya Janaushadhi Pariyojana से जुड़े लोगों और लाभार्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह योजना देश के आम नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जन औषधि केंद्रों के जरिए लाखों परिवारों को इलाज का खर्च कम करने में मदद मिल रही है और स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच पहले से ज्यादा आसान हो गई है।
सस्ती और भरोसेमंद दवाइयों तक आम लोगों की पहुंच बढ़ाने का राष्ट्रीय अभियान बन चुकी है जन औषधि योजना
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि जन औषधि योजना केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि देश के करोड़ों लोगों के लिए राहत का माध्यम बन चुकी है। इस योजना के तहत देशभर में जन औषधि केंद्रों के जरिए ऐसी दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं जो बाजार में मिलने वाली ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफी सस्ती हैं। इससे खासतौर पर उन परिवारों को फायदा हुआ है जिन्हें लंबे समय तक चलने वाले इलाज के कारण आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता था।
लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों के इलाज को सुलभ बनाने में योजना की भूमिका
सरकार का मानना है कि किसी भी गंभीर या लंबे समय तक चलने वाली बीमारी का इलाज किसी परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं बनना चाहिए। इसी सोच के साथ इस योजना को आगे बढ़ाया गया है। जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयां आम बाजार की तुलना में लगभग 50 से 80 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं। इससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को बड़ी राहत मिलती है और वे बिना ज्यादा खर्च के इलाज जारी रख पाते हैं।
जन औषधि केंद्रों के जरिए देशभर के परिवारों ने 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बचत की
सरकारी आंकड़ों के अनुसार जन औषधि केंद्रों से दवाइयां खरीदने के कारण देशभर के नागरिक अब तक 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत कर चुके हैं। रोजाना करीब 15 लाख लोग इन केंद्रों से दवाइयां खरीदते हैं। यह संख्या इस बात का संकेत है कि लोगों का भरोसा इस योजना पर लगातार बढ़ रहा है और अब यह लाखों परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का एक भरोसेमंद विकल्प बन चुकी है।
12 वर्षों में तेजी से बढ़ा जन औषधि केंद्रों का नेटवर्क और बिक्री में भी कई गुना वृद्धि
पिछले एक दशक में इस योजना का विस्तार काफी तेजी से हुआ है। वर्ष 2014 में जहां देश में सिर्फ 80 जन औषधि केंद्र थे, वहीं 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर लगभग 18,000 तक पहुंच गई है। यानी करीब 224 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। बिक्री के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2014-15 में इन केंद्रों की कुल बिक्री 7.29 करोड़ रुपये थी, जो फरवरी 2025 तक बढ़कर 2,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। इससे स्पष्ट होता है कि लोगों में सस्ती दवाइयों के प्रति भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
महिलाओं की भागीदारी और सस्ते सैनिटरी पैड जैसी पहल से सामाजिक बदलाव की दिशा में भी बढ़ रहा है कदम
जन औषधि योजना केवल दवाइयों तक सीमित नहीं है बल्कि यह सामाजिक जागरूकता और महिला सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जन औषधि केंद्रों पर अब 2,110 से अधिक दवाइयां और 315 सर्जिकल उत्पाद उपलब्ध हैं, जो 29 चिकित्सकीय श्रेणियों में आते हैं। इसके अलावा महिलाओं की स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यहां सिर्फ 1 रुपये प्रति पैड की कीमत पर सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जाते हैं और अब तक 100 करोड़ से ज्यादा पैड बेचे जा चुके हैं। खास बात यह भी है कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में खुले नए जन औषधि केंद्रों में करीब 60 प्रतिशत केंद्र महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जो महिला उद्यमिता को भी बढ़ावा दे रहे हैं।