मध्यप्रदेश जल गंगा संवर्धन अभियान: जिले में जल संरक्षण को जनांदोलन का रूप… जल संरक्षण के क्षेत्र में ला रहा सकारात्मक बदलाव

Jal Ganga conservation campaign in the district of Madhya Pradesh

जल गंगा संवर्धन अभियान: जिले में जल संरक्षण को जनांदोलन का रूप

मध्यप्रदेश के जिले में जल संकट से निपटने और भू-जल स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत व्यापक स्तर पर जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश की मोहन सरकार के निर्देशानुसार संचालित यह अभियान 16 जून तक चलेगा, जिसमें प्रशासनिक अमला, जनप्रतिनिधि और आमजन मिलकर सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसके तहत जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में सुनियोजित तरीके से कार्य संपादित किए जा रहे हैं।

जल संरक्षण बना जनआंदोलन

मध्यप्रदेश जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना भी है। अभियान के दौरान ग्राम स्तर पर बैठकें आयोजित कर ग्रामीणों को जल बचाने, वर्षा जल संचयन और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण का महत्व समझाया जा रहा है। अधिकारी-कर्मचारी स्वयं गांवों में पहुंचकर श्रमदान कर रहे हैं, जिससे आमजन भी प्रेरित होकर अभियान से जुड़ रहे हैं।

तालाब निर्माण और गहरीकरण पर विशेष जोर

क्षेत्र में भूमिगत जलस्तर को बढ़ाने के लिए तालाब निर्माण और पुराने तालाबों के गहरीकरण का कार्य प्राथमिकता से किया जा रहा है। जनपद पंचायत उमरबन की ग्राम पंचायत खरगोन और उखलदा में तालाब गहरीकरण का कार्य पूरा किया गया है। इन कार्यों से वर्षा ऋतु में अधिक मात्रा में जल संग्रहण संभव हो सकेगा। गहराई बढ़ने से जल अधिक समय तक संरक्षित रहेगा और आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर में सुधार होगा। विशेषज्ञों के अनुसार यदि वर्षा ज ल को स्थानीय स्तर पर ही रोक लिया जाए, तो जल संकट की समस्या काफी हद तक कम की जा सकती है। इसी उद्देश्य से तालाबों की साफ-सफाई, मरम्मत और गहरीकरण किया जा रहा है ताकि उनकी जलधारण क्षमता में वृद्धि हो सके।

कुओं और पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन

अभियान के तहत पुराने कुओं और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है। कई स्थानों पर वर्षों से उपेक्षित पड़े कुओं की सफाई कर उन्हें पुनः उपयोगी बनाया जा रहा है। इससे न केवल पेयजल उपलब्धता बढ़ेगी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल का स्थायी स्रोत भी विकसित होगा। इसके साथ ही सोकपिट में रेट्रोफिटिंग का कार्य भी संचालित है। इससे घरों और सार्वजनिक भवनों की छतों से गिरने वाले वर्षा जल  को सीधे जमीन में पहुंचाया जा सकेगा, जिससे भू-जल पुनर्भरण में सहायता मिलेगी।

नाला गहरीकरण और चेकडैम निर्माण

मध्यप्रदेश जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत नालों का गहरीकरण और विस्तारीकरण भी किया जा रहा है। वर्षा के समय तेज बहाव के कारण पानी बहकर निकल जाता है, जिससे उसका संरक्षण नहीं हो पाता। नालों की गहराई और चौड़ाई बढ़ाकर जल प्रवाह को नियंत्रित किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक पानी रोका जा सके। साथ ही चेकडैम निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। चेकडैम के माध्यम से बहते पानी को रोककर उसे धीरे-धीरे जमीन में समाहित होने का अवसर मिलता है। इससे आसपास के क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ता है और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होता है।

साफ-सफाई और जनसहभागिता

अभियान के दौरान जल स्रोतों के आसपास साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। तालाबों और नालों से गाद और कचरा हटाकर उन्हें स्वच्छ बनाया जा रहा है। इससे जल की गुणवत्ता में सुधार होगा और जलजनित बीमारियों की आशंका भी कम होगी। ग्राम पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। ग्रामीण स्वयं श्रमदान कर तालाबों की सफाई और गहरीकरण में योगदान दे रहे हैं। इससे अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप मिल रहा है।

भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल

वर्तमान समय में जल संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। बदलते मौसम चक्र और अनियमित वर्षा के कारण जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है। ऐसे में वर्षा जल का संरक्षण और भू-जल स्तर में वृद्धि ही स्थायी समाधान है। जल गंगा संवर्धन अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने सभी संबंधित अधिकारियों को समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि यह अभियान केवल औपचारिकता न बनकर स्थायी परिणाम देने वाला होना चाहिए।

मध्यप्रदेश जल गंगा संवर्धन अभियान जिले में जल संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। तालाब निर्माण, गहरीकरण, नाला सुधार, चेकडैम निर्माण और सोकपिट रेट्रोफिटिंग जैसे कार्य भविष्य में जल संकट से राहत दिलाने में सहायक सिद्ध होंगे। यदि इसी प्रकार जनसहभागिता बनी रही, तो आने वाले समय में जिले में जल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकेगी और जल संकट की समस्या काफी हद तक नियंत्रित हो सकेगी।

Exit mobile version