नई दिल्ली। आप जगदीश धनकड़ जी को कितना जानते हैं? फिलहाल वह उपराष्ट्रपति हैं। उनका सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस, बंगाल में राज्यपाल के पद पर रहते ममता बनर्जी से सीधा टकराव का सफर लंबा रहा है। वह राजनीति के परिपक्व खिलाड़ी रहे हैं।
- उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़. अब राज्यसभा की चेयर से सत्ता पक्ष और विपक्ष के टकराव को रोकने और सदन सुचारू रुप से चलाने की जिम्मेदारी जगदीप धनखड़ के कंधों पर है
- वह जानते हैं कि अब राजनेताओं से सीधा टकराव संभव नहीं और यही वजह है कि बजट सत्र के पहले चरण में सदन में हंगामे के बाद कई विपक्ष सांसदों को नोटिस थमाने के बाद धनखड़ सांसदों को नसीहत देने से नहीं चूके
- उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है, संसद के अंदर कोई कुछ भी बोले, उस पर न तो सिविल और न ही क्रिमिनल मुकदमा दर्ज हो सकता है, संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत ये एक बड़ा अधिकार सांसदों को दिया है
- वैसे, धनकड़ ने ये भी कहा कि ये प्रिविलेज अनक्वालिफाइड नहीं है, हम लोगों का दायित्व है कि जो कुछ सदन में बोलें, जिम्मेदारी और प्रामाणिक तरीके से बोलें
नौकरी अगर आश्रितों को देनी है, तो नियम बदल डाले
अब तक राज्यसभा में, किसी कर्मचारी के निधन के बाद उसके परिवार के किसी व्यक्ति को उतने ही दिन के लिए नौकरी मिलती थी, जितने दिनों का मृत व्यक्ति का कार्यकाल बचा होता था। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के संज्ञान में ये बात आई, तो उन्होंने तत्काल प्रभाव से नियम को बदलने का आदेश अधिकारियों को दे दिया। अब कर्मचारी अनुकंपा के आधार पर मिली नौकरी तब तक कर सकते हैं जब तक उनकी रिटायरमेंट की उम्र तक न पहुंचे। इससे सभी कर्मचारी जय-जय कर रहे हैं।
महिला सांसदों का सशक्तीकरण
पीएम मोदी की महिलाओं को मुख्यधारा में लाने और उनके सशक्तीकरण की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए राज्यसभा के चेयरमैन जगदीप धनखड़ को जैसे ही पता चला कि सदन की इथिक्स समिति में कोई महिला नहीं है, तो उन्होंने इसे बदल दिया। धनकड़ ने पूछा कि जब बात आचरण की हो रही हो तो उस समिति में महिला ही नहीं रहेगी तो उस समिति का कौई औचित्य ही नहीं बनता। उन्हें बताया गया कि सदन के नियमों के तहत समिति के सदस्यों की संख्या पूरी हो चुकी है, फिर धनकड़ के हस्तक्षेप से नियमों में परिवर्तन भी हुआ और उन्हीं के कहने पर अब इथिक्स समिति में 3 महिलाएं है।
चुनौतियां बड़ी हैं
उपराष्ट्रपति के लिए चुनौतियां बड़ी हैं, क्योंकि बजट के दूसरे भाग के लिए सदन जब बैठेगा तब विपक्ष फिर से दो-दो हाथ करने के इरादे से उतरेगा। इसीलिए, जब राज्यसभा के पीठासीन अधिकारियों को चुनने की बारी आई तो जगदीप धनखड़ एक बार फिर कार्रवाई करते नजर आए। उन्होंने ये कहा कि पीठासीन अधिकारियों में महिलाएं भी हों तो और बेहतर होगा।
उन्होंने छोटी पार्टियों से महिला सांसदों को पीठासीन अधिकारियों के पैनल में डालने की वकालत की। चेयरमैन की पहल पर पहली बार नामांकित सदस्यों में से एक और महिला सदस्य पीटी उषा को पीठासीन अधिकारियों के पैनल पर डाला गया।
राज्यसभा के हरेक कर्मी से मिल रहे हैं धनकड़
सदन का हंगामा राज्यसभा चेयरमैन को चिंतित कर रहा है। सत्र नहीं भी चल रहा है और उपराष्ट्रपति हर रोज संसद जाकर अपने कमरे में बैठ रहे हैं। वह क-एक कर व्यक्तिगत रुप से तमाम कर्मचारियों से मिल रहे हैं। ये कर्मचारी अधिकारियों से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक के हैं। दरअसल उनकी इस कवायद के पीछे है राज्यसभा के कामकाज और संचालन और रोजमर्रा की गतिविधियों में आ रही समस्याओं पर उनकी राय जानना। ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोई उपराष्ट्रपति और राज्यसभा का चेयरमैन कर्मचारियों से ऐसी मुलाकात कर रहा हो और उन्हीं से समस्यों का समाधान मांग रहा हो।