इजरायल-ईरान युद्ध: लेबनान पर फिर हमला, नेतन्याहू ने कहा – आगे और “कई बड़े सरप्राइज”
दुबई: मिडिल ईस्ट में जारी इजरायल-ईरान युद्ध का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। युद्ध के नौवें दिन रविवार तड़के इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर एक बार फिर बड़ा सैन्य हमला किया। इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने संकेत दिया है कि युद्ध के अगले चरण में “कई बड़े सरप्राइज” देखने को मिल सकते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
लेबनान में हमले, मौत का आंकड़ा 300 के पार
इजरायल के ताजा हवाई हमलों में लेबनान में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही वहां कुल मृतकों की संख्या 300 से अधिक हो गई है। इजरायली सेना ने पहले ही लेबनान के बड़े हिस्सों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का आदेश दिया था। इजरायल का कहना है कि उसका सैन्य अभियान उन सशस्त्र समूहों को खत्म करने के लिए चलाया जा रहा है जिन्हें Iran का समर्थन प्राप्त है। इजरायली सेना का दावा है कि इन संगठनों के जरिए ईरान क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
28 फरवरी से शुरू हुआ युद्ध
यह युद्ध 28 फरवरी को तब शुरू हुआ जब Israel और United States ने संयुक्त रूप से ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए। इन हमलों का लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना बताया गया। अमेरिका और इजरायल ने यह भी संकेत दिया कि उनका उद्देश्य ईरान की मौजूदा सरकार को कमजोर करना या सत्ता परिवर्तन की स्थिति पैदा करना भी हो सकता है। इन हमलों के बाद संघर्ष तेजी से फैल गया और अब इसका असर पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में दिखाई देने लगा है। युद्ध के बाद से ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई पड़ोसी देशों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे हैं। इसके अलावा इजरायल ने लेबनान में अपने हमलों को तेज कर दिया है। संघर्ष का दायरा इतना बढ़ गया है कि साइप्रस से लेकर श्रीलंका के समुद्री क्षेत्रों तक सैन्य गतिविधियों और हमलों की खबरें सामने आई हैं। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ है और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है।
नेतन्याहू का बड़ा बयान
शनिवार देर रात प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने युद्ध के अगले चरण की रणनीति पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि इजरायल का लक्ष्य ईरान की मौजूदा सत्ता को अस्थिर करना और वहां राजनीतिक बदलाव का रास्ता खोलना है। इस बयान के कुछ ही समय बाद इजरायल ने एक और बड़ा हमला किया। शनिवार रात तेहरान में एक तेल भंडारण केंद्र को निशाना बनाया गया। यह अब तक का पहला ऐसा हमला माना जा रहा है जिसमें किसी नागरिक औद्योगिक स्थल को निशाना बनाया गया। हमले के बाद आसमान में आग की ऊंची-ऊंची लपटें दिखाई दीं और पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
ईरान ने पड़ोसी देशों से मांगी माफी
इधर ईरान ने पड़ोसी देशों पर हुए हमलों के लिए खेद जताया है। हालांकि इसके बावजूद ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले खाड़ी देशों में जारी हैं और कुछ हमलों में आम नागरिकों की भी मौत हुई है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने रविवार को एक बार फिर नरम रुख अपनाते हुए कहा कि क्षेत्र के सभी देश ईरान के दोस्त और भाई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल “षड्यंत्र और दुष्प्रचार” के जरिए क्षेत्रीय देशों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम धमकी, अन्याय और किसी भी तरह के दबाव के सामने सिर नहीं झुकाएंगे।”
ईरान की सत्ता संरचना और सीमित अधिकार
विशेषज्ञों के अनुसार ईरान की सत्ता व्यवस्था में राष्ट्रपति के अधिकार सीमित होते हैं। देश की वास्तविक सैन्य शक्ति अर्धसैनिक संगठन Islamic Revolutionary Guard Corps के पास है, जो बैलिस्टिक मिसाइलों और बड़े सैन्य अभियानों को नियंत्रित करता है। यह संगठन सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता को जवाबदेह होता है। युद्ध की शुरुआत में हुए हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई थी। इसके बाद देश में एक नेतृत्व परिषद बनाई गई है जो फिलहाल सरकार का संचालन कर रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संघर्ष इसी तरह बढ़ता रहा तो पूरा मध्य-पूर्व अस्थिर हो सकता है। तेल आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी इसका गंभीर असर पड़ सकता है। वहीं इजरायल और ईरान दोनों ही पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह युद्ध और भी तीव्र हो सकता है, जिससे दुनिया भर की निगाहें अब इस क्षेत्र पर टिक गई हैं।