बिहार की सियासत में हलचल: चिराग पासवान के बयानों और प्रशांत किशोर से नज़दीकियों के बीच बड़े ‘सियासी खेला’ की आहट
क्या NDA से अलग राह चुनने की तैयारी में हैं चिराग पासवान? प्रशांत किशोर से जुड़ाव ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
बिहार की राजनीति इन दिनों एक बार फिर उफान पर है। केंद्र में मंत्री पद पर आसीन और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान राज्य सरकार की आलोचना करते हुए जिस तरह से खुलकर नीतीश कुमार और उनकी सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं, उसने बिहार की राजनीतिक दिशा को लेकर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) से चिराग की बढ़ती राजनीतिक जुबानी नजदीकियों ने इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है।
चिराग के तीखे तेवर और विरोध के संकेत
बीते एक से डेढ़ महीने के भीतर चिराग पासवान कई मौकों पर नीतीश सरकार की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक विफलता, और अपराध पर नियंत्रण की नाकामी को लेकर आलोचना कर चुके हैं। 26 जुलाई को मीडिया से बातचीत में चिराग ने यहां तक कह दिया था कि “प्रशासन अपराधियों के सामने नतमस्तक है। बिहार में हत्या, लूट, अपहरण, बलात्कार की घटनाएं कम नहीं हो रहीं। दुख है कि मैं ऐसी सरकार को समर्थन दे रहा हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि ये वही सरकार है जिसका हिस्सा खुद LJP (रामविलास) है और चिराग खुद NDA गठबंधन में शामिल हैं। सवाल उठता है कि यदि चिराग गठबंधन में रहते हुए इतनी तीखी आलोचना कर रहे हैं तो इसके पीछे राजनीतिक रणनीति का संकेत है या अंदरूनी असंतोष?
सभी 243 सीटों पर लड़ने की घोषणा — क्या है संकेत?
केन्द्र की मोदी सरकार में मंत्री चिराग पासवान ने हाल ही में बिहार के सारण की एक जनसभा के दौरान ऐलान किया कि उनकी पार्टी राज्य के विधानसभा चुनाव में सामान्य सीट से चुनाव मैदान में उतरेगह। इसके साथ ही चिराग ने ये भी कहा कि राज्य विधानसभा की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी पार्टी की है।
ये घोषणा कई मायनों में अहम मानी जा रही है क्योंकि एनडीए गठबंधन में रहते हुए यह व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है कि एक घटक दल सभी सीटों पर चुनाव लड़े। इससे यह भी संकेत मिल रहा है कि चिराग भविष्य में एनडीए से अलग राह चुन सकते हैं या गठबंधन को पुनर्गठित करने की ओर बढ़ सकते हैं।
पीके से बढ़ती निकटता — बड़ा ‘सियासी खेला’?
23 जुलाई को चिराग पासवान ने प्रशांत किशोर (PK) को ईमानदार नेता बताते हुए खुले मंच से उनकी सराहना की। चिराग ने कहा “जो नेता जाति-धर्म से ऊपर उठकर राज्य की सोच रखता है। उसका स्वागत होना चाहिए।” उन्होंने ये भी जोड़ा कि पीके बिहार की राजनीति में ईमानदार भूमिका निभा रहे हैं। चिराग-पीके की यह पारस्परिक सराहना और एक-दूसरे को “मित्र” कहकर संबोधित करना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संभावित राजनीतिक समीकरणों की ओर संकेत करता है। पीके यानी प्रशांत किशोर पहले ही बिहार में जनसुराज आंदोलन के जरिए राजनीतिक विकल्प की जमीन तैयार कर रहे हैं। अगर चिराग पासवान उनके साथ खुलकर आते हैं तो यह गठजोड़ राज्य में मौजूदा सत्ता समीकरणों को गंभीर चुनौती दे सकता है।
क्या ‘तेजस्वी भाई’ भी समीकरण में शामिल होंगे?
चिराग पासवान के रिश्ते तेजस्वी यादव और लालू परिवार के साथ भी मधुर माने जाते हैं। चिराग तेजस्वी को “छोटा भाई” कहकर संबोधित करते हैं। ऐसे में राजनीतिक पंडित यह अनुमान लगा रहे हैं कि क्या भविष्य में चिराग और तेजस्वी की राजनीतिक राह भी एक हो सकती है? चिराग पासवान, पीके और तेजस्वी यादव जैसे चेहरे बिहार में किसी साझा मंच पर एक साथ आते हैं, तो यह गठजोड़ JDU और BJP गठबंधन NDA को चुनाव में चुनौती दे सकता है।
चिराग के बदले तेवर — संकेत या सीधा इशारा?
राजनीति में बयान केवल शब्द नहीं होते, वे संकेत होते हैं। चिराग पासवान ने न केवल सरकार की आलोचना की, बल्कि यह भी कहा कि उन्हें अफसोस है कि वे ऐसी सरकार का हिस्सा हैं। यह भावनात्मक दूरी और राजनीतिक असहमति दोनों दर्शाता है। ऐसे समय में जब बिहार में विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, चिराग की ऐसी बयानबाजी से यह साफ है कि वे कोई बड़ा कदम उठाने की तैयारी में हैं। क्या यह प्लान-B की झलक है या फिर पूरी रणनीति का एक हिस्सा — यह आने वाला समय तय करेगा।
सियासी भूचाल से पहले की खामोशी?
बिहार की राजनीति में “मौसम का पूर्वानुमान” करने वाले चिराग पासवान ने जिस तरह अपनी बातें सार्वजनिक रूप से रखी हैं, उससे साफ है कि वे महज आलोचना नहीं कर रहे, बल्कि राजनीतिक भविष्य की नींव रख रहे हैं। चिराग का प्रशांत किशोर की तरफ झुकाव, सरकार से असंतोष, और स्वतंत्र चुनावी घोषणाएं — इन सभी पहलुओं को मिलाकर देखें तो स्पष्ट है कि बिहार में बड़ा सियासी खेला होने जा रहा है।
क्या चिराग NDA से अलग होंगे? क्या PK और चिराग साथ आएंगे? क्या बिहार की राजनीति एक नए गठबंधन की ओर बढ़ रही है? इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में मिलेंगे। लेकिन इतना तय है कि बिहार का चुनावी रण इस बार पहले से ज्यादा रोमांचक होने वाला है। (प्रकाश कुमार पांडेय)