ईरान युद्ध के बीच तेल कीमतों पर बोले ट्रंप…दबाव कम करने के लिए कदम उठाने को तैयार
वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल के बीच Donald Trump ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका तेल की कीमतों पर दबाव कम करने के लिए कदम उठा सकता है। ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। रविवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हैं, क्योंकि अमेरिका के पास पर्याप्त मात्रा में तेल उपलब्ध है। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर प्रशासन ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए कदम उठा सकता है।
ईरान युद्ध से वैश्विक बाजार में हलचल
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। खास तौर पर Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के कारण तेल आपूर्ति को बड़ा खतरा पैदा हो गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग में व्यवधान आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट
इसी बीच अमेरिकी प्रशासन ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए अस्थायी छूट देने का फैसला किया है। Scott Bessent ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट जारी की है। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखना और तेल की आपूर्ति को बाधित होने से बचाना बताया जा रहा है। भारत दुनिया के बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में से एक है और उसकी तेल आपूर्ति में रूस की महत्वपूर्ण भूमिका है।
ट्रंप बोले – जरूरत पड़ी तो करेंगे हस्तक्षेप
जब एयर फोर्स वन विमान में यात्रा के दौरान पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या वह वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव कम करने के लिए और कदम उठाने को तैयार हैं, तो उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह ऐसा करने में हिचकिचाएंगे नहीं। उन्होंने कहा, “अगर ऐसा करने की जरूरत होगी तो मैं जरूर करूंगा, ताकि बाजार पर थोड़ा दबाव कम किया जा सके।” ट्रंप के इस बयान को वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने की संभावित रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर भी चर्चा
पत्रकारों ने यह भी पूछा कि क्या अमेरिका बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग कर सकता है। इस पर ट्रंप ने कहा कि फिलहाल इसकी आवश्यकता नहीं दिख रही है क्योंकि अमेरिका के पास पर्याप्त मात्रा में तेल मौजूद है। अमेरिका का Strategic Petroleum Reserve दुनिया के सबसे बड़े आपातकालीन तेल भंडारों में से एक है। पिछले महीने के अंत तक इस भंडार में करीब 41.5 करोड़ बैरल से अधिक तेल मौजूद था। यह भंडार आमतौर पर आपातकालीन परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कि युद्ध, प्राकृतिक आपदा या वैश्विक आपूर्ति संकट।
“अमेरिका के पास तेल की कोई कमी नहीं”
ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका के पास तेल की कोई कमी नहीं है और देश ऊर्जा के मामले में काफी मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा, “हमारे पास बहुत ज्यादा तेल है। हमारे देश के पास ऊर्जा संसाधनों की कोई कमी नहीं है। दुनिया में भी काफी मात्रा में तेल उपलब्ध है।” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और कई देशों में ईंधन महंगा हो रहा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से परिवहन, उद्योग और बिजली उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा कई देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। यही कारण है कि दुनिया के कई देश ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए वैकल्पिक रणनीतियों पर विचार कर रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका द्वारा भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट देना वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति कब तक बनी रहेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। ऐसे में दुनिया की नजरें अब अमेरिका और अन्य प्रमुख देशों की ऊर्जा नीतियों पर टिकी हैं, क्योंकि इनके फैसले आने वाले समय में वैश्विक बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।





