मध्य पूर्व में सैन्य जमावड़े पर ईरान का तीखा रुख
किसी भी हमले को ‘पूर्ण युद्ध’ मानेगा ईरान, अमेरिका को सख्त चेतावनी
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान ने कहा है कि अगर उस पर किसी भी तरह का हमला हुआ—चाहे वह सीमित हो, सर्जिकल हो या किसी और नाम से किया जाए—तो उसे ईरान के खिलाफ पूर्ण युद्ध माना जाएगा और उसका जवाब बेहद कठोर तरीके से दिया जाएगा। यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका अपने सैन्य संसाधनों को तेजी से मध्य पूर्व की ओर भेज रहा है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने, नाम न जाहिर करने की शर्त पर, कहा कि अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि यह सैन्य तैयारी किसी वास्तविक टकराव के इरादे से नहीं की जा रही है, लेकिन हमारी सेना सबसे खराब हालात के लिए पूरी तरह तैयार है। इसी वजह से ईरान में हर स्तर पर हाई अलर्ट घोषित है।”
अमेरिकी सैन्य तैनाती से बढ़ा तनाव
पेंटागन लगातार मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। अमेरिका ने अपना विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके साथ तीन विध्वंसक युद्धपोत इस क्षेत्र में भेजे हैं। यह स्ट्राइक ग्रुप हाल ही में दक्षिण चीन सागर से रवाना हुआ था और फिलहाल हिंद महासागर में है। इसके जल्द ही फारस की खाड़ी और बहरीन में मौजूद अन्य अमेरिकी नौसैनिक जहाजों से जुड़ने की उम्मीद है। इस तैनाती के साथ करीब 5,700 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिक मध्य पूर्व पहुंचेंगे। इसके अलावा अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एफ-15ई स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमानों को भी क्षेत्र में तैनात किया है। वहीं ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कतर में टाइफून लड़ाकू विमान भेजे हैं, जिसे उसने ‘रक्षात्मक कदम’ बताया है।
ट्रंप का बयान: ‘हम ईरान पर नजर रखे हुए हैं’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस सैन्य तैनाती की पुष्टि की है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने “एक विशाल सैन्य बेड़ा” ईरान की ओर भेजा है। ट्रंप ने कहा, “हम ईरान पर नजर रखे हुए हैं। मैं नहीं चाहता कि कुछ भी हो, लेकिन हम उन्हें बहुत बारीकी से देख रहे हैं।” ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यह सैन्य तैनाती “एहतियातन” की जा रही है, लेकिन अगर ईरान की ओर से हालात बिगड़े, तो सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ईरान की सख्त चेतावनी
ईरान ने साफ किया है कि इस बार किसी भी तरह के हमले को हल्के में नहीं लिया जाएगा। ईरानी अधिकारी ने कहा, “इस बार अगर कोई हमला हुआ—चाहे वह सीमित हो, असीमित हो, सर्जिकल हो या काइनेटिक—हम उसे अपने खिलाफ पूर्ण युद्ध मानेंगे और उसका जवाब सबसे कठोर तरीके से देंगे।” यह बयान उस पृष्ठभूमि में आया है, जब जून महीने में अमेरिका समर्थित इजरायली हमलों के जरिए ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई थी। उन्हीं घटनाओं के बाद से क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।
सैन्य गतिविधियों में तेजी
विश्लेषकों के मुताबिक, हाल के दिनों में दर्जनों अमेरिकी सैन्य मालवाहक विमान मध्य पूर्व की ओर जाते देखे गए हैं। यह स्थिति पिछले साल जैसी मानी जा रही है, जब ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों के बाद अमेरिका ने तेजी से सैन्य तैनाती की थी। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अपने देश में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए और फांसी जैसी सजाओं पर आगे बढ़ा, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि “पिछले साल ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमले तब के मुकाबले बहुत छोटे लगेंगे।”
ईरान के भीतर हालात भी तनावपूर्ण
ईरान इस वक्त गंभीर घरेलू संकट से भी जूझ रहा है। दिसंबर के अंत में आर्थिक बदहाली और राजनीतिक दमन के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि सरकारी कार्रवाई में अब तक 5,032 लोगों की मौत हो चुकी है और 27,600 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं। हालांकि ईरानी सरकार ने इन आंकड़ों को खारिज करते हुए आधिकारिक मृतक संख्या 3,117 बताई है, जिसमें सुरक्षा बलों के जवान, आम नागरिक और सरकार के मुताबिक “अमेरिका समर्थित दंगाई” शामिल हैं। मध्य पूर्व में बढ़ता सैन्य जमावड़ा और ईरान की आक्रामक चेतावनी वैश्विक राजनीति के लिए गंभीर संकेत हैं। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की आशंका लगातार गहराती जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कूटनीति तनाव को कम करती है या क्षेत्र एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है।