America Air Strikes In Iran: ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध में अमेरिका भी अब खुलकर शामिल हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सेनाओं ने ईरान के तीन बड़े परमाणु साइट्स नतांज और इस्फहान, फोर्डो पर सफलतापूर्वक हवाई हमला किया है। वहीं दूसरी ओर ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका की ओर से किये गये हमले के बाद ईरान भी ने इजरायल के कुछ शहरों पर ताबड़तोड़ तरीके से मिसाइलें दागी हैं। इजरायल के कई शहरों में लगातार सायरन की आवाजें साफ तौर पर सुनाई दे रहीं हैं। सुरक्षा के लिहाज से लोग वहां लगातार बॉम्ब शेल्टर्स में पनाह लेते नजर आ रहे हैं।
अमेरिका की ओर से 22 जून की सुबह को ईरान के परमाणु ठिकानों पर बंकर बस्टर हमले किये गये। इसके बाद पश्चिम एशिया में स्थिति बेहद संवेदनशील और विस्फोटक हो गई है। इस घटनाक्रम को समझने के लिए 5 प्रमुख सवालों के जवाब जानना ज़रूरी है।
अमेरिका को खुली जंग में क्यों उतरना पड़ा?
अमेरिका की सीधी सैन्य कार्रवाई के पीछे कई वजहें हैं
इजरायल का दबाव और सहयोग
इजरायल लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खतरा मानता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बीच “पूर्ण समन्वय” की पुष्टि हुई है।
ईरान के परमाणु खतरे का जवाब
अमेरिका ने माना कि फोर्डो, नतांज और इस्फहान जैसी साइट्स में परमाणु संवर्धन की गतिविधियां बढ़ी थीं।
रणनीतिक संदेश
ट्रम्प ने साफ किया कि यह हमला ईरान को “बातचीत के लिए मजबूर करने” और पूरे क्षेत्र को यह संकेत देने के लिए किया गया है कि अमेरिका पीछे नहीं हटेगा।
बंकर बस्टर बम क्या हैं और ये कितने प्रभावी रहे?
बंकर बस्टर बम विशेष रूप से गहरे ज़मीन के भीतर बने ठिकानों को नष्ट करने के लिए बनाए जाते हैं। इनमें से कुछ का नाम है। GBU-57 MOP (Massive Ordnance Penetrator) GBU-28 ये बम सैकड़ों फीट ज़मीन के भीतर घुस सकते हैं। भूमिगत परमाणु सुविधाओं को नष्ट करने में सक्षम हैं।
फोर्डो, जो एक पहाड़ के नीचे बना है। उस पर “पूरा पेलोड” गिराने की बात ट्रम्प ने की — जो इसकी पूरी तरह तबाही की ओर संकेत करता है।
अब आगे क्या हो सकता है?
ईरान की जवाबी कार्रवाई की आशंका। ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका की ओर से किये गये हमले के बाद ईरान भी ने इजरायल के कुछ शहरों पर ताबड़तोड़ तरीके से मिसाइलें दागी हैं। ईरान समर्थित मिलिशिया, जैसे हिज़बुल्ला या इराकी इस्लामिक रेजिस्टेंस, क्षेत्र में अमेरिकी या इजरायली ठिकानों को निशाना बना सकते हैं। सीधे मिसाइल हमले या ड्रोन स्ट्राइक का भी खतरा है।
मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध का खतरा
लेबनान, सीरिया, इराक और यमन जैसे देशों के ज़रिए यह संघर्ष और फैलेगा। रूस, चीन, यूरोपीय संघ इस पर प्रतिक्रिया देंगे। यह जियोपॉलिटिकल तनाव को बढ़ा सकता है।
ईरान की सैन्य और राजनीतिक प्रतिक्रिया कैसी रही?
ईरान ने हमलों को स्वीकार किया है, लेकिन साथ ही “आपने शुरू किया, अब हम खत्म करेंगे” जैसी सख्त चेतावनी दी है। सरकारी मीडिया और सेना दोनों ने हमले की पुष्टि के साथ ही बदले का संकेत दिया है। ईरान के सहयोगी नेताओं की हत्या जैसे हैदर अल-मौसावी, अबू अली अल-खलील से ईरान की प्रतिक्रिया और तीव्र हो सकती है।
क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की आहट है?
फिलहाल सीमित युद्ध की स्थिति है, लेकिन अगर ईरान ने सीधे इजरायल या अमेरिकी ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमला किया। अमेरिका ने फिर से जवाबी हमले किए और रूस-चीन जैसे देश खुलकर किसी पक्ष का समर्थन करने लगे तो यह संघर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल सकता है। जिससे वैश्विक अस्थिरता, तेल आपूर्ति पर संकट और आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ सकता है। ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच यह नया मोड़ मध्य पूर्व में दशकों में सबसे बड़ा सैन्य संकट बन सकता है। यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक बड़ी भू-राजनीतिक साजिश, शक्ति-संतुलन और रणनीतिक सन्देश का हिस्सा है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान क्या जवाब देता है। क्या दुनिया किसी नए बड़े युद्ध की ओर बढ़ रही है। प्रकाश कुमार पांडेय