ग्रोव संरक्षण को मिला वैश्विक मंच, अंतर्राष्ट्रीय मैंग्रोव केंद्र ने शुरू किया काम

26 जुलाई को "मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण अंतर्राष्ट्रीय दिवस" मनाया गया। मैंग्रोव संरक्षण
और सहयोग के लिए समर्पित दुनिया के पहले अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन के रूप में,
अंतर्राष्ट्रीय मैंग्रोव केंद्र ने इसी दिन औपचारिक रूप से काम करना शुरू किया। इसके साथ ही यह
वैश्विक पहल से वास्तविक संचालन के नए चरण में प्रवेश कर गया है।
अंतर्राष्ट्रीय मैंग्रोव केंद्र में 8 सदस्य देश और 13 हस्ताक्षरकर्ता देश शामिल हैं। ये देश एशिया, अफ्रीका
और अमेरिका सहित दुनिया के प्रमुख मैंग्रोव क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। केंद्र के वास्तविक
संचालन में आने के बाद, यह संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण जैसे
माध्यमों से वैश्विक स्तर पर मैंग्रोव संरक्षण के लिए समन्वित प्रयासों को बढ़ावा देगा।
अंतर्राष्ट्रीय मैंग्रोव केंद्र के सचिवालय के महासचिव पाओ तामिंग ने कहा, "हम सदस्य देशों में प्रदर्शन
परियोजनाएं शुरू करेंगे। इनमें मैंग्रोव संरक्षण और बहाली, पारिस्थितिक निगरानी तथा नीला कार्बन
व्यापार जैसी परियोजनाएं शामिल होंगी। इन प्रयासों के माध्यम से दुनिया भर के मैंग्रोव क्षेत्रों वाले
देशों को व्यावहारिक और दोहराए जा सकने वाले तकनीकी मॉडल उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही,
सभी सदस्य देशों की मैंग्रोव संरक्षण और बहाली से जुड़ी तकनीकी क्षमता को भी मजबूत किया
जाएगा।"
कंबोडिया के पर्यावरण मंत्रालय के राष्ट्रीय उद्यान विभाग के आर्द्रभूमि संरक्षण प्रभाग के कार्यालय
प्रमुख यांग वीसाल ने कहा, "चीन ने मैंग्रोव संरक्षण और बहाली के लिए एक प्रभावी और व्यवस्थित
योजना तैयार की है, जो मैंग्रोव संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए चीनी सरकार की प्रतिबद्धता को
दर्शाती है। चीन के व्यावहारिक अनुभव सीखने योग्य हैं और कंबोडिया सहित कई देश इससे लाभ उठा
सकते हैं।"
नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, चीन में मैंग्रोव क्षेत्र बढ़कर 31,700 हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो इस
सदी की शुरुआत की तुलना में 44 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही चीन दुनिया के उन चुनिंदा देशों
में शामिल हो गया है, जहां मैंग्रोव क्षेत्र में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा, मैंग्रोव
पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता, जैव विविधता और नीला कार्बन के माध्यम से कार्बन अवशोषण
क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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