भारत ही नहीं अमेरिका में भी महंगाई बनी चुनाव का केंद्रीय मुद्दा… अमेरिकी कांग्रेस की जंग में कौन आगे? ट्रंप की लोकप्रियता, महंगाई और ईरान युद्ध ने बढ़ाई रिपब्लिकन की चुनौती

Inflation has become a central election issue not just in India but in the US as well Who is leading the battle for the US Congress

अमेरिका में अनुसार मध्यावधि चुनाव में अभी 20 दिन बाकी हैं। कांग्रेस में अपने बहुमत को बचाने की रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदें अब कुछ संभावित परिस्थितियों पर निर्भर दिखाई दे रही हैं। इनमें चुनावी क्षेत्रों का अनुकूल गणित, धन के मामले में बढ़त का लाभ मिलना, सर्वेक्षणों का गलत साबित होना या कोई बड़ी राजनीतिक घटना शामिल है, जो पार्टी की संभावनाओं को बेहतर बना सके। इस बीच, कड़े मुकाबले वाली सीटों पर रिपब्लिकन उम्मीदवार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एजेंडे से अपनी दूरी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। चुनाव से तीन सप्ताह से कुछ अधिक समय पहले ट्रंप की नीतियां पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती बनती दिखाई दे रही हैं।

कुछ उम्मीदवार, जो पहले ट्रंप के आयात शुल्क यानी टैरिफ का समर्थन कर चुके थे, अब उन्हीं शुल्कों के विरोध में विज्ञापन जारी कर रहे हैं। ईरान युद्ध का समर्थन करने वाले कुछ उम्मीदवार अब युद्ध समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, ट्रंप के प्रमुख सहयोगी बनने का वादा करने वाले कुछ उम्मीदवार दोनों दलों के साथ मिलकर काम करने की छवि पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले सप्ताह हुई चुनावी बहसों से संकेत मिला कि रिपब्लिकन उम्मीदवारों को कई मुद्दों पर रक्षात्मक स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। महंगाई, ऊंची कीमतें, आयात शुल्क और ईरान युद्ध जैसे विषय उन राज्यों में हुई बहसों पर हावी रहे, जहां चुनावी मुकाबला कड़ा है।

रिपब्लिकन पार्टी के विज्ञापनों में अक्सर डेमोक्रेटिक नेताओं को पार्टी के वामपंथी धड़े से जोड़ने और ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों से जुड़े विवादों को उठाने की कोशिश होती है। लेकिन इस वर्ष मतदाताओं के लिए रोजमर्रा की जिंदगी का खर्च सबसे अहम मुद्दों में शामिल है। ट्रंप की बयानबाजी भी उनकी पार्टी की मदद करती दिखाई नहीं दे रही। उनकी अपनी स्वीकृति दर में गिरावट के बावजूद वह मतदाताओं से इस तरह अपील कर रहे हैं, मानो चुनाव में उनका नाम भी सीधे शामिल हो। वह डेटा सेंटरों की उपलब्धियां भी गिनाते हैं, जबकि लेख के अनुसार उनकी लोकप्रियता से भी कम समर्थन डेटा सेंटरों को मिल रहा है। ईरान युद्ध और टैरिफ पर भी उन्होंने अपने रुख में नरमी के संकेत नहीं दिए हैं।

लेकिन इस राजनीतिक तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है। वह है धनबल। ट्रंप के समर्थन वाले सुपर पीएसी और आर्थिक रूप से मजबूत राजनीतिक सहयोगियों के कारण रिपब्लिकन पार्टी को धन के मामले में बढ़त हासिल है। अरबपति एलन मस्क ने जुलाई की शुरुआत से रिपब्लिकन पार्टी के समर्थन में 276 मिलियन डॉलर से अधिक की रकम दी है।

अमेरिकी कांग्रेस की सीटों का चुनावी गणित

अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों की स्थिति को अलग-अलग दिखाया गया है। उपलब्ध ग्राफिक के आंकड़ों का अर्थ इस प्रकार है।

सीनेट: 100 सीटों वाले सदन की लड़ाई

4 डेमोक्रेट के पक्ष में

7  कड़े मुकाबले वाली सीटें

2 रिपब्लिकन के पक्ष में

9 अन्य मुकाबले

प्रतिनिधि सभा: बहुमत के लिए 218 सीटें

लेख में दिए गए 435 सदस्यीय सदन के चुनावी नक्शे के आंकड़े

डेमोक्रेट के पक्ष में झुकाव   12

कड़े मुकाबले वाले क्षेत्र  21
रिपब्लिकन के पक्ष में झुकाव   9
201  डेमोक्रेट के लिए सुरक्षित या संभावित सीटें

192 रिपब्लिकन के लिए सुरक्षित या संभावित सीटें

बहुमत का आंकड़ा: 218 सीटें 

ट्रंप की नीतियों से दूरी क्यों बना रहे हैं रिपब्लिकन उम्मीदवार?

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के सामने एक असामान्य राजनीतिक चुनौती दिखाई दे रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उसी पार्टी के नेता हैं, जिसके उम्मीदवार कांग्रेस में बहुमत बचाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जिन नीतियों को ट्रंप अपनी सरकार की प्राथमिकता बताते हैं, उन्हीं मुद्दों पर कुछ रिपब्लिकन उम्मीदवारों को मतदाताओं के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। कई कड़े मुकाबलों में रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रंप के एजेंडे से अपनी दूरी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। टैरिफ का पहले समर्थन करने वाले उम्मीदवार अब उसके विरोध में विज्ञापन दे रहे हैं। ईरान युद्ध के समर्थक रहे कुछ उम्मीदवार अब युद्ध समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। यह बदलाव चुनावी राजनीति में एक महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने लाता है। ट्रंप पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में हैं, लेकिन उनके साथ राजनीतिक निकटता हर चुनावी क्षेत्र में समान लाभ देगी, यह मानकर नहीं चला जा सकता।

महंगाई बनी चुनाव का केंद्रीय मुद्दा

अमेरिकी मतदाता जब रोजमर्रा की चीजों की कीमतों, परिवार के खर्च और आर्थिक सुरक्षा को लेकर चिंतित हों, तब विदेश नीति या वैचारिक मुद्दों पर आधारित प्रचार की सीमाएं सामने आ सकती हैं। टैरिफ का मुद्दा भी इसी आर्थिक बहस से जुड़ा है। आयात पर शुल्क लगाने की नीति का उद्देश्य घरेलू उद्योगों को संरक्षण देना हो सकता है, लेकिन आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ने का असर कारोबार और उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। इसका वास्तविक प्रभाव वस्तु, बाजार और कंपनियों की प्रतिक्रिया के अनुसार अलग-अलग होता है। इसीलिए रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए चुनौती यह है कि वे ट्रंप की आर्थिक नीतियों का समर्थन करते हुए मतदाताओं की बढ़ती लागत संबंधी चिंताओं का जवाब कैसे दें। दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक पार्टी इन चिंताओं को सरकार के आर्थिक रिकॉर्ड पर सवाल उठाने के अवसर के रूप में इस्तेमाल कर रही है।

ईरान युद्ध: विदेश नीति का घरेलू चुनाव पर असर

ईरान युद्ध का मुद्दा अमेरिकी चुनाव में एक और महत्वपूर्ण पहलू बनकर उभरा है। आमतौर पर विदेश नीति का महत्व राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के संदर्भ में देखा जाता है। लेकिन युद्ध की अवधि, उससे जुड़ा सरकारी खर्च और उसके व्यापक आर्थिक प्रभाव भी मतदाताओं की राय को प्रभावित कर सकते हैं।  कुछ रिपब्लिकन उम्मीदवारों ने युद्ध समाप्त करने की मांग उठाई है, जबकि वे पहले इसका समर्थन कर चुके थे। यह बदलाव संकेत देता है कि चुनावी क्षेत्रों में स्थानीय मतदाताओं की प्राथमिकताओं और राष्ट्रीय नेतृत्व के रुख के बीच संतुलन बनाना उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि पूरी रिपब्लिकन पार्टी ने ईरान नीति पर अपना रुख बदल लिया है। लेख में खास तौर पर प्रतिस्पर्धी सीटों पर चुनाव लड़ रहे कुछ उम्मीदवारों की रणनीति का उल्लेख है।

एलन मस्क का पैसा बनाम मतदाताओं का मूड

रिपब्लिकन पार्टी के लिए आर्थिक संसाधन एक अहम ताकत हैं। एलन मस्क का 276 मिलियन डॉलर से अधिक का योगदान चुनावी अभियानों, मतदाता संपर्क और प्रचार गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है। लेकिन चुनावी नक्शा केवल पैसे से नहीं बदलता। उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़, मतदाताओं की प्राथमिकताएं, मतदान प्रतिशत और राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रति जनता की धारणा भी महत्वपूर्ण हैं। यही वजह है कि धन के मामले में बढ़त और चुनावी समर्थन के बीच अंतर समझना जरूरी है। मस्क के योगदान से रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी क्षमता बढ़ सकती है, लेकिन उससे किसी सीट पर जीत सुनिश्चित नहीं होती।

चुनावी मुकाबले में असली कसौटी क्या होगी?

  • क्या रिपब्लिकन पार्टी का आर्थिक संसाधनों और चुनावी क्षेत्रों के नक्शे में लाभ मतदाताओं के रुख की भरपाई कर पाएगा?

  • क्या महंगाई, टैरिफ और ईरान युद्ध जैसे मुद्दे ट्रंप की पार्टी के लिए चुनौती बने रहेंगे?

  • क्या डेमोक्रेटिक पार्टी इन मुद्दों को कांग्रेस में बहुमत हासिल करने के लिए प्रभावी चुनावी अभियान में बदल पाएगी?

इन सवालों के जवाब केवल राष्ट्रीय सर्वेक्षणों से नहीं मिलेंगे। सीनेट में राज्यवार मुकाबले और प्रतिनिधि सभा में अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम भी महत्वपूर्ण होंगे।

अमेरिका का 2026 मध्यावधि चुनाव केवल रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के बीच सीटों की लड़ाई नहीं है। यह ट्रंप की नीतियों, अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर मतदाताओं की धारणा और बड़े राजनीतिक दानदाताओं की भूमिका की भी परीक्षा है। रिपब्लिकन पार्टी के सामने एक तरफ एलन मस्क जैसे बड़े दानदाताओं से मिलने वाला आर्थिक समर्थन है, तो दूसरी तरफ कुछ प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में महंगाई, टैरिफ और ईरान युद्ध को लेकर उठ रहे सवाल हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए चुनौती इन मुद्दों को मतदाताओं के समर्थन में बदलने की है। अंततः, चुनावी नक्शा संभावनाएं दिखाता है, धन प्रचार की ताकत बढ़ाता है और सर्वेक्षण मतदाताओं के रुझान का अनुमान देते हैं। लेकिन कांग्रेस में बहुमत का वास्तविक निर्धारण मतदान और सीटवार परिणामों से ही होगा।

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