महंगाई की चौतरफा मार, 5 महीने में रसोई का बजट बिगड़ा! तेल ₹8, दालें ₹6 हुईं महंगी

Inflation hits from all sides
​मुंबई/भोपाल: आम आदमी की जेब पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है.  उपभोक्ता मामले विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम के आंकड़ों के विश्लेषण से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पिछले मात्र पांच महीनों में राशन की लगभग 99 प्रतिशत आवश्यक चीजों के दाम बढ़ गए हैं. विश्लेषण के अनुसार, 16 प्रमुख खाद्य वस्तुओं में से 15 के दाम इस अवधि में बढ़ गए हैं. रसोई के बजट में सबसे ज्यादा उछाल खाद्य तेलों और दालों की कीमतों में आया है.

​बढ़ोतरी का आंकड़ा:

​इस वर्ष 28 फरवरी से लेकर 3 अगस्त तक की अवधि का विश्लेषण करने पर यह सामने आया है कि: ​खाद्य तेल: सरसों तेल, सोया तेल, पाम तेल और मूंगफली तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है. औसतन, तेल की कीमतें लगभग ₹8 प्रति लीटर महंगी हो गई हैं. विशिष्ट रूप से, मूंगफली तेल में ₹7.92 की वृद्धि हुई है.
​दालें: दालों की कीमतों में भी भारी तेजी आई है. विशेष रूप से चना और अरहर (तुअर) दाल सबसे ज्यादा महंगी हुई हैं. दालों के दाम औसतन ₹6 प्रति किलोग्राम बढ़ गए हैं. अरहर दाल की कीमत में ₹5.96 और चना दाल में ₹4.65 प्रति किलो की वृद्धि दर्ज की गई है.
​दूध: दूध की कीमतों में भी ₹3 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी देखी गई है.

​चीनी: चीनी के दाम में ₹2.25 प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई है

​अन्य वस्तुएं: चीनी, नमक, चावल और आटे जैसी अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई है. आटे की कीमत में सबसे कम (0.59%) वृद्धि हुई है, फिर भी इसमें बढ़ोतरी हुई है.

​महंगाई की प्रमुख वजह:

​इंफोमेरिक्स रेटिंग के चीफ इकोनॉमिस्ट डॉ. मनोरंजन शर्मा के अनुसार, इस अभूतपूर्व मूल्य वृद्धि के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं:
​वैश्विक अस्थिरता और आयात लागत: अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को अस्थिर कर दिया है. विशेष रूप से पाम तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण भारत की आयात लागत बढ़ गई है. भारत खाद्य तेलों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी भी अस्थिरता का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है. ​कमजोर मानसून की आशंका: इस वर्ष मानसून के कमजोर रहने की आशंका ने खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, कमजोर मानसून के कारण खरीफ फसलों की बुवाई के रकबे में लगभग 7% की कमी आने की संभावना है. इससे दालों और अन्य कृषि उत्पादों के उत्पादन में गिरावट आ सकती है, जिससे आपूर्ति में कमी और कीमतों में और वृद्धि हो सकती है.

​त्योहारी सीजन की मांग

अगस्त महीने से देश में रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, नवरात्रि और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार शुरू होने वाले हैं. इन त्योहारों के दौरान दालों और खाद्य तेलों की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक कीमतों और आयात लागत में कोई नरमी नहीं आती है, तो बढ़ी हुई मांग कीमतों पर और दबाव डालेगी.

​आने वाले समय में क्या उम्मीद है?

​विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग और अंतरराष्ट्रीय कारकों के जारी रहने के कारण कीमतों पर दबाव बना रहने की संभावना है. दालों और खाद्य तेलों की कीमतें विशेष रूप से संवेदनशील रह सकती हैं. यदि मानसून की स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो कृषि उत्पादन में कमी के कारण खाद्य मुद्रास्फीति और बढ़ सकती है.

​आम आदमी पर असर:

​इस बढ़ती महंगाई का सबसे ज्यादा असर मध्यम और निम्न-आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है. आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से रसोई का बजट बिगड़ रहा है और लोगों को अपनी अन्य जरूरतों में कटौती करने पर मजबूर होना पड़ रहा है. यह स्थिति मुद्रास्फीति की चिंताओं को और बढ़ा रही है और सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है.

​उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़े

​यह रिपोर्ट पूरी तरह से उपभोक्ता मामले मंत्रालय और एफसीआई (FCI) के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है. इन आंकड़ों के विस्तृत विश्लेषण के बाद यह स्पष्ट है कि महंगाई की मार वास्तविक और व्यापक है. आपको महंगाई की इस खबर पर हर अपडेट देता रहेगा. यह खबर आपको यह समझने में मदद करेगी कि आपकी जेब पर कैसे और क्यों बोझ बढ़ रहा है.
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