अब रंगपंचमी पर उड़ेगा रंग—गुलाल…जानें क्यों खास होती है इंदौर में रंगपंचमी पर ‘गेर’…रंग, रौब और स्वच्छता का अनोखा संगम

Indore Rangpanchami
इंदौर की रंगपंचमी का ‘गेर’: रंग, रौब और स्वच्छता का अनोखा संगम
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होली के पांचवें दिन जब देश के कई हिस्सों में रंगों की खुमारी उतरने लगती है, तब मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में रंगपंचमी का जश्न अपने चरम पर होता है। यहां निकलने वाली ‘गेर’ केवल एक जुलूस नहीं, बल्कि परंपरा, उत्साह और सामाजिक संदेश का जीवंत उदाहरण है। खास बात यह है कि रंगों के इस महाउत्सव के साथ इंदौर “स्वच्छ शहर” होने का संदेश भी मजबूती से देता है।

क्या है ‘गेर’ की परंपरा?

इंदौर की गेर की शुरुआत पुराने शहर क्षेत्र से होती है, खासकर ऐतिहासिक राजवाड़ा के आसपास से। ढोल-नगाड़ों की थाप, डीजे की धुन और रंगों की बौछार के बीच हजारों लोग एक साथ सड़कों पर उतरते हैं। बड़े टैंकरों और विशेष वाहनों से रंगीन पानी की फुहारें छोड़ी जाती हैं। लोग गुलाल उड़ाते हुए “रंग बरसे” के माहौल में सराबोर हो जाते हैं।

गेर की खासियत यह है कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी होती है—व्यापारी, युवा, महिलाएं, सामाजिक संगठन और प्रशासनिक अमला भी। यह उत्सव शहर की सामूहिक ऊर्जा का प्रतीक बन चुका है।

रंगों के साथ स्वच्छता का संदेश

इंदौर लगातार कई वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित होता आया है। इसलिए रंगपंचमी की गेर केवल रंगों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि स्वच्छता का संकल्प भी साथ लेकर चलती है।

  1. प्राकृतिक और हर्बल रंगों पर जोर – प्रशासन और सामाजिक संगठन लोगों से अपील करते हैं कि रासायनिक रंगों की जगह हर्बल या ऑर्गेनिक रंगों का उपयोग करें, ताकि सड़कों और नालियों पर दुष्प्रभाव न पड़े।
  2. सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर रोक – गेर के दौरान प्लास्टिक की थैलियों और बोतलों के उपयोग पर विशेष निगरानी रखी जाती है।
  3. जनजागरूकता अभियान – गेर के मार्ग पर स्वच्छता से जुड़े बैनर और संदेश लगाए जाते हैं—“मेरा शहर, मेरी जिम्मेदारी” जैसे स्लोगन लोगों को याद दिलाते हैं कि उत्सव के बाद सफाई भी उतनी ही जरूरी है।

सफाई की तैयारी: जश्न के साथ जिम्मेदारी

गेर खत्म होते ही नगर निगम की टीम तुरंत सक्रिय हो जाती है। सैकड़ों सफाईकर्मी, आधुनिक रोड स्वीपिंग मशीनें और पानी के टैंकर सड़कों पर उतर आते हैं।

  • तत्काल कचरा संग्रहण – जहां-जहां रंग, प्लास्टिक या अन्य कचरा जमा होता है, वहां तुरंत सफाई की जाती है।
  • हाई-प्रेशर वॉशिंग – सड़कों और चौराहों को पानी से धोया जाता है ताकि रंगों के दाग न रहें।
  • ड्रेनेज की जांच – नालियों की विशेष सफाई की जाती है, ताकि रंग या कचरा जल निकासी को बाधित न करे।

अक्सर देखा गया है कि जिस सड़क पर कुछ घंटे पहले हजारों लोग रंगों में झूम रहे होते हैं, वही सड़क शाम तक फिर से साफ-सुथरी नजर आने लगती है। यही इंदौर मॉडल की पहचान है—उत्सव भी पूरे जोश से, और सफाई भी पूरी जिम्मेदारी से।

परंपरा से प्रेरणा तक

इंदौर की रंगपंचमी की गेर यह साबित करती है कि त्योहार और स्वच्छता एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं। रंगों के बीच जब स्वच्छता का संदेश गूंजता है, तो वह केवल एक शहर नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन जाता है। रंग, रौनक और जिम्मेदारी—इंदौर की गेर इन तीनों का अद्भुत संगम है। यही कारण है कि यहां की रंगपंचमी देश में अनोखी मानी जाती है और “स्वच्छता” को उत्सव का अभिन्न हिस्सा बना देती है।

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