इंडिगो का ऑपरेशन संकट सातवे दिन भी जारी, 450 से ज्यादा उड़ानें रद्द, एयरपोर्ट्स पर यात्री परेशान
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो का ऑपरेशन संकट सातवे दिन भी जारी है, जिसके कारण आज भी सैकड़ों उड़ानें रद्द हो गईं। सोमवार को देशभर में 450 से ज्यादा इंडिगो फ्लाइट्स को कैंसिल कर दिया गया, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी आदेश के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं दिखा और एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की भीड़ और असमंजस बढ़ता जा रहा है।
इंडिगो के ऑपरेशन संकट का कारण
इंडिगो के ऑपरेशन संकट की वजह एक सरकारी नियम में बदलाव है, जिसे फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) कहा जाता है। इस नियम के तहत पायलटों के कार्य समय की सीमा निर्धारित की जाती है ताकि उनकी थकान से उड़ान की सुरक्षा पर कोई असर न पड़े। हालांकि, इस नियम के पूरी तरह से लागू होने के बाद इंडिगो को कॉकपिट क्रू की कमी का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द हो गईं।
पायलटों और एयरलाइन कर्मचारियों ने इन नए नियमों पर आपत्ति जताई है। एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट साग्निक बनर्जी ने आरोप लगाया कि एयरलाइंस सुरक्षा को नजरअंदाज कर मुनाफे को प्राथमिकता दे रही है। उनका कहना था, “इंडिगो फ्लाइट्स की सुरक्षा खतरे में है। लंबे समय से जो फ्लाइट ड्यूटी नियम अपनाए गए थे, वे अब बदल दिए गए हैं, जिससे पायलट्स को अपनी ड्यूटी को सही तरीके से निभाने में मुश्किल हो रही है।”
सरकार के कदम और रिफंड प्रक्रिया
इंडिगो द्वारा लगातार उड़ानें रद्द होने के बाद, सरकार ने एयरलाइन से स्थिति को शीघ्र सुधारने और प्रभावित यात्रियों को रिफंड देने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। इंडिगो ने अब तक प्रभावित यात्रियों के लिए 610 करोड़ रुपये से अधिक के टिकट रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, यह संकट केवल उड़ान रद्द होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रियों को एयरपोर्ट्स पर भी लंबी-लंबी कतारों और असमंजस का सामना करना पड़ रहा है।
एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी
इंडिगो की उड़ानें रद्द होने से एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। अहमदाबाद में 20 फ्लाइट्स ग्राउंडेड रही, जबकि विशाखापत्तनम में 7 फ्लाइट्स को कैंसिल किया गया। मुंबई, कोलकाता, दिल्ली और अन्य प्रमुख एयरपोर्ट्स पर भी यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सोमवार सुबह तक, लगभग 456 फ्लाइट्स कैंसिल होने की खबरें आईं। इससे यात्रियों के बीच गुस्सा और निराशा का माहौल देखा गया, क्योंकि वे कई घंटों तक एयरपोर्ट पर इंतजार करते रहे, लेकिन उड़ानें स्थगित होती रहीं।
सरकार ने लिया कार्रवाई का निर्णय
सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने इस स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कदम उठाए हैं। मंत्रालय ने एयरलाइन को टिकट रिफंड प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया है और हवाई किराए की सीमा भी तय करने के लिए कहा है, ताकि किसी भी असमर्थ यात्रियों को अत्यधिक शुल्क का सामना न करना पड़े। सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि यह संकट पूरी तरह से इंडिगो एयरलाइन की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) के संबंध में आवश्यक निर्देश एक साल पहले ही जारी किए गए थे और इसे लागू किया गया था, इसलिए इसमें एयरलाइन का ही दोष है। इसके अलावा, सरकार ने इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच शुरू कर दी है ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके।
इंडिगो का बयान और भविष्य की उम्मीद
इंडिगो के प्रवक्ता ने इस संकट के लिए खेद जताया है और कहा कि वह 10 दिसंबर तक अपनी सेवाओं को सामान्य करने की उम्मीद करते हैं। एयरलाइन ने यह भी दावा किया है कि वह फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन के नए नियमों के तहत पायलटों की कमी को दूर करने के प्रयास कर रही है। इसके लिए वह अतिरिक्त पायलटों की भर्ती करने और शेष क्रू को अस्थायी रूप से दूसरी उड़ानों में नियुक्त करने की योजना बना रही है। इंडिगो ने यह भी कहा कि यात्रियों को जल्द से जल्द रिफंड दिया जाएगा और प्रभावित एयरपोर्ट्स पर अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की जा रही है ताकि यात्रा में रुकावटों को कम किया जा सके। इंडिगो का यह ऑपरेशन संकट भारतीय एयरलाइन इंडस्ट्री के लिए एक चेतावनी के रूप में सामने आया है। जहां एक ओर सरकार ने स्थिति को सुधारने के लिए कदम उठाए हैं, वहीं यात्रियों को होने वाली परेशानी ने एयरलाइन के प्रति विश्वास को भी ठेस पहुंचाई है। पायलटों और कर्मचारियों की सुरक्षा और यात्रियों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना अब एयरलाइन और सरकार दोनों की जिम्मेदारी बन गया है। यह देखना होगा कि इंडिगो और अन्य एयरलाइंस भविष्य में इस प्रकार के संकटों से बचने के लिए क्या कदम उठाती हैं।