फ्लाइट कैंसिलेशन बढ़े, केंद्र सरकार दबाव में आई
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो पिछले चार दिनों से तीव्र ऑपरेशनल संकट से जूझ रही थी। हालात ऐसे बने कि 1200 से अधिक फ्लाइटें रद्द करनी पड़ीं, जिससे यात्रियों में भारी नाराज़गी फैल गई। स्थिति बिगड़ते देख केंद्र सरकार भी बैकफुट पर आ गई और तत्काल समीक्षा शुरू की। बढ़ती परेशानियों को देखते हुए DGCA ने 10 फरवरी 2026 तक इंडिगो समेत सभी एयरलाइंस को अस्थायी राहत देने का फैसला किया। यानी, वे नियम जिनके कारण स्टाफ की कमी और ऑपरेशन में बाधा आ रही थी, उन्हें फिलहाल वापस ले लिया गया है।
इंडिगो ने कहा—नए नियमों से स्टाफ शॉर्टेज बढ़ा
इंडिगो ने DGCA को बताया कि हाल में लागू किए गए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) फेज-2 ने उनके पायलटों व क्रू पर भारी असर डाला। नए प्रावधानों के कारण अचानक काम करने वाले कर्मचारियों की उपलब्धता कम हुई, शेड्यूल गड़बड़ा गया और मैनेजमेंट को कई उड़ानें रोकनी पड़ीं। कंपनी का कहना है कि नियमों के कारण ऑपरेशन सामान्य करने में समय लगेगा। DGCA द्वारा लागू किए गए FDTL के पहले चरण को 1 जुलाई 2025 और दूसरे चरण को 1 नवंबर 2025 से लागू किया गया था।
FDTL के नियम क्यों बने और विवाद कैसे बढ़ा
FDTL-2 के तहत DGCA ने एयरलाइंस को आदेश दिया था कि पायलटों को हर हफ्ते 48 घंटे का अनिवार्य आराम देना होगा। साथ ही यह भी शर्त थी कि किसी छुट्टी को वीकली रेस्ट में जोड़ना मान्य नहीं होगा। लगातार नाइट शिफ्ट पर पाबंदी का नियम भी लागू किया गया। उद्देश्य था—थकान कम करना, सुरक्षा बढ़ाना, और पायलटों की गलतियों को रोकना।
लेकिन, इन सभी प्रावधानों ने एयरलाइंस में स्टाफ प्लानिंग को उलझा दिया। अचानक अतिरिक्त पायलटों की जरूरत बढ़ गई, जबकि उपलब्धता कम थी। इसी वजह से इंडिगो का पूरा ऑपरेशन लड़खड़ा गया और भारी संख्या में फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं।
DGCA ने राहत दी, अब फिर पुराने सिस्टम पर लौटेगी एयरलाइन
DGCA ने अब स्थिति को काबू में लाने के लिए नए नियमों को फिलहाल स्थगित कर दिया है। अब एयरलाइंस को पायलटों और क्रू मेंबर्स को पहले की तरह 36 घंटे का लगातार आराम देना पर्याप्त होगा। इसका मतलब यह हुआ कि एयरलाइंस दोबारा अपने शेड्यूल को आसानी से मैनेज कर सकेंगी और यात्रियों को भी राहत मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि DGCA को नियम बनाते समय एयरलाइंस की वास्तविक क्षमता और स्टाफ स्ट्रेंथ पर अधिक विचार करना चाहिए था। हालांकि माना जा रहा है कि अगले एक साल तक DGCA, एयरलाइंस और पायलट यूनियनों के बीच नई चर्चाएँ होंगी और फिर अंतिम नियम लागू किए जाएंगे।