Indian Economy: इतिहास रचने की दहलीज पर भारत… ट्रंप की ‘लंगड़ी’ के बावजूद हासिल करेगा 4 ट्रिलियन डॉलर का मुकाम
भारत की अर्थव्यवस्था एक ऐतिहासिक मुकाम छूने वाली है। जहां वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और महाशक्तियों के बीच चल रही आर्थिक जंग ने कई देशों को प्रभावित किया है, वहीं भारत मजबूती से आगे बढ़ रहा है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने पुष्टि की है कि भारत इस वित्त वर्ष के भीतर 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। वर्तमान में भारत लगभग 3.9 ट्रिलियन डॉलर के GDP के साथ विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल होने जा रही है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता था। लेकिन भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया और कूटनीतिक कौशल ने उस प्रभाव को काफी हद तक निष्प्रभावी कर दिया।
ट्रंप के 50% टैरिफ की मार के बीच भारत की मजबूती
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% तक के टैरिफ ने वैश्विक व्यापार समीकरणों में बड़ा बदलाव किया। इस टैरिफ का लगभग आधा हिस्सा रूस से तेल की खरीद के कारण लगाया गया। हालांकि इस कदम को विशेषज्ञ भारत की अर्थव्यवस्था को धीमा करने का प्रयास मानते हैं, लेकिन भारत ने इससे निकलने के लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाई।
भारत ने नए व्यापार बाजार खोले,
वैकल्पिक आयात-निर्यात चैनल तैयार किए,
ऊर्जा व्यापार में लचीलापन दिखाया,
आंतरिक उत्पादन और घरेलू उपभोग बढ़ाया।
इन कदमों ने अमेरिका को भी चौंका दिया। विश्लेषक मानते हैं कि अमेरिका को अंदाजा नहीं था कि भारत इतने कम समय में टैरिफ के प्रभाव को न्यूट्रलाइज कर देगा। CEA नागेश्वरन ने कहा कि भारत ने आर्थिक स्थिरता और वैश्विक प्रभाव को बनाए रखने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
IVCA ग्रीन रिटर्न्स समिट में CEA का बड़ा बयान
नई दिल्ली में आयोजित IVCA ग्रीन रिटर्न्स समिट 2025 में बोलते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन ने कहा कि भारत अपने लक्ष्य तक पहुंचने वाली अंतिम रेखा के पास खड़ा है।
उन्होंने कहा कि कि क“चालू वित्त वर्ष में भारत 3.9 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। हमें विकास को जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता की प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाना होगा।” CEA ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत जलवायु संकट के बढ़ते खतरों को लेकर गंभीर है और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। नेट-जीरो का अर्थ है कि देश जितना कार्बन उत्सर्जन करेगा, उतना ही उसे वातावरण से हटाने की क्षमता विकसित करेगा। यह लक्ष्य विकास और पर्यावरण दोनों के बीच संतुलन को दर्शाता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था की लंबी छलांग—10 ट्रिलियन तक का सफर
इतिहास सिर्फ 4 ट्रिलियन पर ही नहीं थमेगा। 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने कहा है कि भारत का भविष्य बेहद उज्ज्वल है। उनके अनुसार वर्तमान विकास दर जारी रही तो अगले 10 वर्षों में भारत 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। “विकसित भारत 2047” के विज़न के मुताबिक देश की प्रति व्यक्ति आय में भारी वृद्धि होगी।अभी भारत की प्रति व्यक्ति आय लगभग 2,570 डॉलर है। पनगढ़िया का अनुमान है कि यह बढ़कर 2047 तक 14,000 डॉलर तक पहुंच सकती है। इसके लिए भारत को औसतन 7.3% की वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी। भारत ने पिछले दशक में तेज़ डिजिटलीकरण, मजबूत बैंकिंग सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश,युवा आबादी का प्रभावी उपयोग, और स्टार्टअप-इनोवेशन की शक्ति के दम पर दुनिया का ध्यान खींचा है। इन्हीं कारणों से वैश्विक एजेंसियां भी भारत को अगले दशक की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था मानती हैं।
ट्रंप के ‘मिसकैलकुलेशन’ का असर उल्टा पड़ा?
विशेषज्ञ कहते हैं कि ट्रंप प्रशासन के टैरिफ से भारत की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ने के बजाय और अधिक सतर्क और मजबूत हुई। भारत ने रूस, मध्य एशिया, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों पर ध्यान बढ़ाया और अमेरिकी दबाव को कूटनीतिक तरीके से संतुलित किया। कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ट्रंप का टैरिफ भारत के लिए चुनौती से अधिक अवसर साबित हुआ।
भारत ने तेल व्यापार को नए तरीके से संरचित किया। घरेलू औद्योगिक उत्पादन को प्राथमिकता दी। “चीन प्लस वन” रणनीति से वैश्विक निवेश आकर्षित किए। अमेरिका को अब यह अहसास हो रहा है कि भारत उसके टैरिफ दबाव के आगे नहीं झुकने वाला है और उसने भारत की आर्थिक ताकत का कम आँकलन किया।
नई आर्थिक शक्ति बनने की ओर बढ़ता भारत
भारत आज सिर्फ एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक संतुलन का एक नया स्तंभ बनकर उभर रहा है। भू-राजनीतिक तनावों, ट्रंप के टैरिफ प्रहार और विश्व अर्थव्यवस्था की कमजोरी के बीच जिस तरह भारत ने 4 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य हासिल करने की तैयारी की है, वह उसके आर्थिक साहस और रणनीतिक सूझबूझ को दर्शाता है। आने वाले वर्षों में भारत न सिर्फ 10 ट्रिलियन की ओर कदम बढ़ाएगा, बल्कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भी बड़ा कदम रख चुका होगा। विश्व अर्थव्यवस्था में भारत का प्रभाव बढ़ रहा है—और यह नई यात्रा अब इतिहास में दर्ज होने ही वाली है।