भारत का ‘त्रिशूल वार गेम’: 30 अक्टूबर से चीन-पाकिस्तान में मचेगी हलचल, तीनों सेनाएं मैदान में उतरेंगी

India Trishul War Game From 30 October

भारत का ‘त्रिशूल वार गेम’: 30 अक्टूबर से चीन-पाकिस्तान में मचेगी हलचल, तीनों सेनाएं मैदान में उतरेंगी

नई दिल्ली। भारत अब एक और बड़ा सैन्य शक्ति प्रदर्शन करने जा रहा है, जिसका असर सीधे-सीधे पाकिस्तान और चीन की सीमाओं तक महसूस होगा। 30 अक्टूबर से 10 नवंबर तक थल सेना, नौसेना और वायुसेना का संयुक्त युद्धाभ्यास ‘एक्स त्रिशूल’ आयोजित किया जा रहा है। इस त्रि-सेना अभ्यास को लेकर भारत ने NOTAM (Notice to Airmen) जारी कर दिया है, जिसके बाद पाकिस्तान और चीन दोनों की नींद उड़ गई है। इस अभ्यास के चलते पश्चिमी सीमा के बड़े हिस्से को नो-फ्लाई जोन घोषित कर दिया गया है।

पाकिस्तान-चीन की बढ़ी टेंशन
इस बड़े अभ्यास की घोषणा के बाद ही पाकिस्तान के जनरल असीम मुनीर ने अपने कई कमांड और ठिकानों को हाई अलर्ट पर रख दिया है। भारतीय सीमा के पास पाकिस्तानी जंगी जेट्स की उड़ानें भी रोक दी गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान को डर है कि भारत की यह कवायद केवल डिफेंस टेस्ट नहीं, बल्कि किसी संभावित प्रतिक्रिया की तैयारी भी हो सकती है। वहीं चीन भी इस अभ्यास पर कड़ी नजर रखे हुए है, क्योंकि इसका सीधा संदेश हिंद महासागर और पूर्वी लद्दाख मोर्चे पर भी जाएगा।

‘त्रिशूल’: तीनों सेनाओं का संयुक्त युद्धाभ्यास
‘त्रिशूल’ भारत की तीनों सेनाओं का संयुक्त सैन्य अभ्यास है, जो राजस्थान के जैसलमेर से लेकर गुजरात के सर क्रीक इलाके तक फैले क्षेत्र में होगा। इसका मकसद है – त्रि-सेना की संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमता, इंटरऑपरेबिलिटी और रणनीतिक तत्परता का परीक्षण करना। इस दौरान तीनों सेनाएं मिलकर मल्टी-डोमेन वॉरफेयर, डीप स्ट्राइक ऑपरेशन, और यूनिफाइड कॉम्बैट स्ट्रैटेजी का अभ्यास करेंगी।

नए हथियारों और हाई-टेक सिस्टम की टेस्टिंग
‘त्रिशूल’ में भारत कई अत्याधुनिक स्वदेशी हथियारों और सिस्टम्स का भी परीक्षण करेगा। इनमें शामिल होंगे।

T-90S और अर्जुन टैंक
हॉवित्जर तोपें
अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर
चिनूक हेवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर
ड्रोन और लोइटर म्यूनिशन सिस्टम
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण और संचार बाधा (जैमिंग) तकनीकें। वायुसेना की ओर से प्रिसिशन स्ट्राइक मिशन, एयर डिफेंस इंटरसेप्शन और ऑटोमैटिक स्पेक्ट्रम मॉनिटरिंग सिस्टम का डेमो भी किया जाएगा।

ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद क्यों अहम है ‘त्रिशूल’?
हाल ही में पश्चिमी सीमा पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की ओर से ड्रोन गतिविधियों और घुसपैठ में तेजी आई थी। इस अनुभव के बाद भारत अब अपने रेस्पॉन्स मैकेनिज़्म को और मजबूत करने की तैयारी में है। ‘त्रिशूल’ के तहत काउंटर-ड्रोन सिस्टम, नेटवर्क जैमिंग और सिग्नल इंटेलिजेंस जैसी क्षमताओं को वास्तविक परिस्थितियों में परखा जाएगा।

रणनीतिक संदेश: “दो मोर्चों पर एकसाथ तैयार भारत”

‘त्रिशूल’ केवल पश्चिमी सीमा पर केंद्रित नहीं है, बल्कि यह अभ्यास भारत की दो-मोर्चा युद्ध (Two-Front War) की तैयारी को भी दिखाता है। यह संदेश साफ है कि भारत एक साथ पश्चिम में पाकिस्तान और पूर्व में चीन – दोनों से निपटने में सक्षम है।
इस अभ्यास से दक्षिण-पश्चिम वायुसेना कमान की “ऑपरेशनल रेडिनेस” और तीनों सेनाओं की “इंटीग्रेशन स्ट्रैटेजी” का परीक्षण किया जाएगा।

NOTAM क्या है और क्यों जारी होता है

NOTAM (Notice to Airmen) एक तकनीकी चेतावनी है, जिसे वायुसेना या रक्षा मंत्रालय तब जारी करता है जब किसी विशेष क्षेत्र में परीक्षण, मिसाइल प्रक्षेपण, या सैन्य अभ्यास होना हो। इसका उद्देश्य है नागरिक विमानों और हवाई मार्गों को संभावित खतरों से सचेत करना। अभ्यास क्षेत्र को “नो-फ्लाई ज़ोन” घोषित करना। हवाई यातायात को अस्थायी रूप से डायवर्ट करना। ‘त्रिशूल’ के लिए जारी NOTAM का दायरा इतना बड़ा है कि इसमें राजस्थान, गुजरात और अरब सागर तट के कई हवाई मार्ग शामिल हैं।

अभ्यास के दौरान होंगे ये मुख्य ऑपरेशन

एयरबोर्न इन्फैंट्री ड्रॉप – वायुसेना द्वारा सीमित क्षेत्र में सैनिकों की तैनाती।नेवल फ्लीट मूवमेंट्स – पश्चिमी तट पर नौसेना के युद्धपोतों की रिहर्सल। सिम्युलेटेड एयर स्ट्राइक – सटीक बमबारी और मिसाइल लॉन्च अभ्यास। काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन – दुश्मन के ड्रोन को इलेक्ट्रॉनिक रूप से निष्क्रिय करने का ट्रायल। कमांड एंड कंट्रोल कोऑर्डिनेशन – तीनों सेनाओं के मुख्यालयों के बीच एकीकृत कम्युनिकेशन।

भारत का बढ़ता आत्मविश्वास
‘त्रिशूल’ सिर्फ एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की रक्षा क्षमता का प्रतीक है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत की “न्यू एज वारफेयर रेडिनेस” को दुनिया के सामने पेश करेगा। इस अभ्यास के जरिए भारत न सिर्फ पाकिस्तान और चीन को संदेश दे रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि उसकी सेनाएं अब किसी भी आपात स्थिति में एकसाथ “इंटीग्रेटेड रेस्पॉन्स” देने में सक्षम हैं।
30 अक्टूबर से शुरू होने वाला ‘त्रिशूल’ वॉर गेम भारत की सैन्य इतिहास में एक और मील का पत्थर साबित होगा। यह अभ्यास दिखाएगा कि भारत न सिर्फ अपने सीमाओं की सुरक्षा के लिए तैयार है, बल्कि किसी भी स्थिति में जवाब देने की क्षमता रखता है। पाकिस्तान और चीन के लिए यह एक सख्त संकेत है — भारत अब सिर्फ रक्षा नहीं, बल्कि रणनीतिक प्रभुत्व की दिशा में भी आगे बढ़ चुका है। प्रकाश कुमार पांडेय

Exit mobile version