अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का सख्त और साफ संदेश
United Nations Human Rights Council के 61वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। भारत की ओर से जवाब के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए प्रतिनिधि अनुपमा सिंह ने कहा कि अगर पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में हो रहे विकास और बदलाव को देखने से इनकार कर रहा है, तो वह किसी भ्रम की स्थिति में जी रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस तरह के बेबुनियाद और राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है।
OIC पर भी निशाना, एक देश की आवाज़ बनकर रह गया मंच
भारत ने सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि Organisation of Islamic Cooperation पर भी सवाल उठाए। भारतीय पक्ष ने कहा कि यह संगठन अब निष्पक्ष मंच नहीं रह गया है और खुद को एक सदस्य देश की बातों को दोहराने वाला मंच बना चुका है। भारत का आरोप था कि बिना तथ्यों की जांच किए झूठे दावों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया जा रहा है, जो परिषद की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।
जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा, 1947 का फैसला अंतिम
भारत ने दो टूक शब्दों में दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है। 1947 में हुआ विलय पूरी तरह वैध था और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपरिवर्तनीय है। भारत ने यह भी साफ किया कि इस क्षेत्र से जुड़ा एकमात्र वास्तविक विवाद पाकिस्तान द्वारा भारतीय जमीन पर अवैध कब्जा है। भारत ने पाकिस्तान से कहा कि वह पहले अपने कब्जे वाले इलाकों को खाली करे, बजाय इसके कि वह बार-बार कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाए।
विकास की सच्चाई और ‘चिनाब रेल ब्रिज’ का उदाहरण
भारत ने जमीनी हकीकत दिखाते हुए जम्मू-कश्मीर में हुए विकास कार्यों का जिक्र किया, जिनमें Chenab Rail Bridge जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शामिल हैं, जिसे दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज बताया गया। भारत ने तंज कसते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान इन परियोजनाओं को भी नकली बताता है, तो वह हकीकत से कोसों दूर किसी काल्पनिक दुनिया में जी रहा है।
लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था और पाकिस्तान को आत्ममंथन की सलाह
भारत ने लोकतंत्र पर दिए जा रहे पाकिस्तानी उपदेशों को भी खारिज किया। भारत ने कहा कि जहां जम्मू-कश्मीर में रिकॉर्ड मतदान के जरिए लोग हिंसा और आतंक की राजनीति को नकार रहे हैं, वहीं पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकारें शायद ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाती हों। आर्थिक मोर्चे पर भी भारत ने तुलना करते हुए बताया कि जम्मू-कश्मीर का विकास बजट, पाकिस्तान द्वारा International Monetary Fund से मांगे गए हालिया बेलआउट पैकेज से दोगुना है। अंत में भारत ने साफ कहा कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिखावे की राजनीति छोड़कर अपनी अंदरूनी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि दुनिया अब सच्चाई को भली-भांति समझती है। यह सत्र Geneva में 23 फरवरी से 31 मार्च तक आयोजित हो रहा है।





