भारत-रूस के बीच 10,000 करोड़ रुपये के S-400 मिसाइल सौदे पर चर्चा तेज, वायु रक्षा क्षमता बढ़ाने की तैयारी

भारतीय वायु सेना अपनी वायु रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए रूस से अतिरिक्त S-400 मिसाइलें खरीदने पर गंभीरता से विचार कर रही है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच 10,000 करोड़ रुपये के इस सौदे पर चर्चा पहले से ही चल रही है। ऑपरेशन सिंदूर में S-400 वायु रक्षा प्रणाली के शानदार प्रदर्शन ने इस योजना को और गति दी है, जहां चार दिनों के भीतर पाकिस्तान के 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर पांच से छह लड़ाकू विमानों और एक जासूसी विमान को मार गिराया गया।

ऑपरेशन सिंदूर में S-400 का अद्भुत प्रदर्शन
भारतीय वायु सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 प्रणाली की मारक क्षमता का प्रदर्शन किया। चार दिनों में यह प्रणाली पाकिस्तान की सीमा के भीतर कई विमानों और जासूसी उपकरणों को निशाना बनाने में सक्षम रही। रक्षा विशेषज्ञ इसे भारतीय वायु रक्षा में क्रांतिकारी बदलाव बताते हैं। इस प्रदर्शन के बाद वायु सेना ने और अधिक मिसाइल स्क्वाड्रन जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया है।

रूस के साथ नई खरीद पर बातचीत
सूत्रों के मुताबिक, भारत और रूस 2018 में हुए समझौते के तहत पांच S-400 स्क्वाड्रन की खरीद पर पहले ही सहमत हो चुके हैं। इनमें से तीन स्क्वाड्रन पहले ही भारत को मिल चुके हैं, जबकि चौथे की आपूर्ति से पहले रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हो गया। अब भारत शेष दो स्क्वाड्रन की आपूर्ति के लिए रूस से बातचीत कर रहा है। इसके साथ ही दोनों देश S-400 और S-500 प्रणालियों को शामिल करने पर भी चर्चा कर रहे हैं।

डिफेंस अधिग्रहण परिषद की बैठक में प्रस्ताव पर विचार
रक्षा मंत्रालय 23 अक्टूबर को होने वाली डिफेंस अधिग्रहण परिषद की बैठक में भारतीय वायु सेना के इस प्रस्ताव पर विचार कर सकता है। प्रस्ताव के तहत नई स्क्वाड्रन की खरीद और वायु रक्षा क्षमता को बढ़ाने की योजना रखी जाएगी। इससे भारत अपनी दृश्य सीमा से परे की सुरक्षा को भी मजबूत करेगा और हवा से हवा में मार करने वाली नई मिसाइलों का अधिग्रहण करेगा।

ब्रहमोस और वायु रक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा
भारत और रूस ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और उसके विविध प्रकारों की क्षमताओं को और बढ़ाने पर भी बातचीत की है। साथ ही, नई वायु रक्षा तकनीक और लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइलों को शामिल करने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इससे भारतीय वायु सेना की रणनीतिक ताकत में और वृद्धि होगी और सीमा पर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

 

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