Parliament Budget Session Live: ‘ भारत शांति का पक्षदार संसद में पीएम मोदी का बड़ा बयान घरेलू LPG को दी जा रही प्राथमिकता US-ईरान युद्ध के बीच 3.75 लाख भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौटे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ससंद में बजट सत्र के दौरान सदन को संबोधित किया। सोमवार को दोपहर 2 बजे से शुरू हुए संबोधन में पीएम ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और उससे जुडे मुख्य पहलुओं और इस मुद्दे पर भारत के रुख के बारे में बताया। यह संबोधन तब हुआ, जब सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था, सप्लाई चेन और ज़रूरी चीज़ों पर इस संकट के असर की समीक्षा की और नागरिकों व कारोबारों के लिए रुकावटों को कम करने के उपायों पर चर्चा की।

पश्चिमी एशाय के हालात पर समीक्षा की गई

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, कैबिनेट सचिव ने हाल ही में बदलती वैश्विक स्थिति और अब तक उठाए गए राहत उपायों के साथ-साथ भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा नियोजित उपायों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी।

इस समीक्षा में कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, MSME, निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त और सप्लाई चेन सहित कई क्षेत्रों पर पड़ने वाले संभावित असर को शामिल किया गया। अधिकारियों ने व्यापक मैक्रो-इकोनॉमिक परिदृश्य की भी जांच की और भारत की आर्थिक स्थिरता को सुरक्षित रखने के लिए आगे के उपायों पर चर्चा की।
सरकार ने यह आकलन किया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकते हैं। भारत पर इसके संभावित प्रभाव का मूल्यांकन किया गया, और तत्काल तथा दीर्घकालिक, दोनों तरह के जवाबी उपायों पर चर्चा की गई।

ईरान-अमेरिका युद्ध
पश्चिम एशिया में संघर्ष और तेज़ हो गया है, क्योंकि ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि तेहरान 48 घंटों के भीतर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह से फिर से नहीं खोलता है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों को “नष्ट” कर देगा। इसके जवाब में, ईरान ने कहा कि ऐसा कोई भी हमला अमेरिका और इज़राइल की ऊर्जा और बुनियादी ढाँचे की संपत्तियों पर हमलों को जन्म देगा।

इस युद्ध में मरने वालों की संख्या ईरान में 1,500 से अधिक और लेबनान में 1,000 से अधिक हो गई है; वहीं इज़राइल में 15 लोगों के मारे जाने की खबर है और 13 अमेरिकी सैन्यकर्मी मारे गए हैं। खाड़ी क्षेत्र में ज़मीन और समुद्र पर हुई घटनाओं में कई नागरिक भी मारे गए हैं, जबकि लेबनान और ईरान में लाखों लोग इस लड़ाई के कारण विस्थापित हो गए हैं।

भारतीयों की सुरक्षा हमारी बड़ी प्राथमिकता’, लोकसभा में बोले पीएम
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हमारे मिशन नियमित रूप से एडवाइजरी जारी कर रहे हैं. यहां भारत में और अन्य प्रभावित देशों में 24×7 कंट्रोल रूप और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित की गई हैं. इनके माध्यम से सभी प्रभावितों को त्वरित जानकारी दी जा रही है. संकट की इस स्थिति में देश-विदेश में भारतीयों की सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता रही है.’

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बाधित करना स्वीकार्य नहीं है। भारत हमेशा शांति और संवाद का समर्थक रहा है और चाहता है कि युद्ध जल्द समाप्त हो। प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि ऐसे संवेदनशील समय में कुछ असामाजिक तत्व स्थिति का गलत फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक चलने वाला युद्ध वैश्विक स्तर पर आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियां बढ़ा सकता है, जिसका असर कई देशों पर पड़ सकता है।

गर्मी के मौसम में बिजली की बढ़ती मांग को लेकर पावर सेक्टर सतर्क
गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ बिजली की मांग बढ़ने की संभावना है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए देश के पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला स्टॉक सुनिश्चित किया गया है। पावर जनरेशन से लेकर सप्लाई तक हर स्तर पर निगरानी की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं को बिना बाधा बिजली मिलती रहे।
खाद्यान्न भंडार पर्याप्त, आपात स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में अन्न का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और जरूरत पड़ने पर आपूर्ति बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पहले भी वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने के बावजूद किसानों को यूरिया कम कीमत पर उपलब्ध कराया गया था। सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी संकट का असर आम नागरिकों और किसानों पर कम से कम पड़े।
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